मल्लिका हांडा की मांग को समर्थन: डिप्टी सीएम सुखजिंदर रंधावा ने दिया दिव्यांग खिलाड़ी को मदद का भरोसा, कहा- परगट सिंह से करूंगा बात
मल्लिका हांडा जालंधर के खोसला मूक बधिक स्कूल की छात्रा रही है। मल्लिका के पिता सुरेश हांडा अकाउंटेंट हैं। मल्लिका ने स्कूल में ही शतरंज खेलना शुरू किया था। वे सात बार नेशनल चैंपियन रह चुकी हैं।
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जालंधर की दिव्यांग शतरंज खिलाड़ी मल्लिका हांडा ने कई पदक जीतने के बाद भी सरकारी नौकरी और नकद इनाम राशि न मिलने पर वीडियो साझा कर अपना दर्द बयां किया था। सोमवार को इस पर पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार को मल्लिका हांडा की मदद करनी चाहिए। अगर वह मेरे पास आती है तो मैं जरूर उसकी मदद करूंगा। मैं खेल मंत्री परगट सिंह को हांडा की मदद करने के लिए कहूंगा।
Govt should help her (speech impaired chess player Malika Handa). If she comes to me, I will definitely help her. I will ask Pargat Singh Ji (Punjab Sports Minister) to help her: State Deputy CM Sukhjinder Singh Randhawa pic.twitter.com/mCZJIshVTl
— ANI (@ANI) January 3, 2022विज्ञापन
पंजाब सरकार पर लगाया था वादों को न पूरा करने का आरोप
मल्लिका ने ट्वीट किया था कि पंजाब सरकार अपने वादों को पूरा करने में विफल है। पूर्व खेल मंत्री ने मेरे लिए नकद इनाम की घोषणा की थी और मेरे पास निमंत्रण पत्र भी है, जिसमें मुझे आमंत्रित किया गया था लेकिन इसे कोविड-19 के कारण रद्द कर दिया गया था। मैं 31 दिसंबर को खेल मंत्री परगट सिंह से मिली थी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नौकरी और नकद ईनाम राशि नहीं दे सकती क्योंकि उनके पास मूक-बधिर खेलों के लिए कोई नीति नहीं है। हांडा ने कहा कि ये सारे मेडल और सर्टिफिकेट बेकार गए हैं। हरियाणा के खिलाड़ियों को लाखों-करोड़ों का पुरस्कार मिलता है। मैं खेल छोड़ दूंगी। मेरी 10 साल की मेहनत बेकार हो गई।
मल्लिका ने कहा कि सात बार नेशनल चैंपियन रही लेकिन फिर भी मुझे सरकार से ना तो कोई नौकरी मिली और ना ही कोई मदद। यहां तक कि मेरे पास कोच भी नहीं है। मल्लिका हांडा जालंधर के खोसला मूक बधिक स्कूल की छात्रा रही है। मल्लिका के पिता सुरेश हांडा अकाउंटेंट हैं। मल्लिका ने स्कूल में ही शतरंज खेलना शुरू किया था।