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मानवाधिकार आयोग के आदेशों पर हाईकोर्ट की रोक: अधिकार क्षेत्र में रहें सदस्य, ज्यूडिशियल ट्रेनिंग की जरूरत

Fri, 13 Feb 2026 09:44 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 13 Feb 2026 09:44 AM IST
सार

मामला एक समाचार रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें पटियाला के एक निजी अस्पताल पर बकाया राशि के कारण शव रोके रखने का आरोप लगाया गया था। आयोग के एक गैर-न्यायिक सदस्य ने 16 दिसंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी और मेडिकल बोर्ड गठित किया था।

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Punjab Haryana High Court Human Rights Commission orders
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बकाया भुगतान के चलते निजी अस्पताल द्वारा मरीज का शव परिजनों को न सौंपने के आरोपों पर पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग की सख्त कार्रवाई को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फिलहाल रोक दिया है। 
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कोर्ट ने डॉक्टरों और अस्पताल निदेशकों की व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य करने के आयोग के आदेशों पर अंतरिम रोक लगाते हुए टिप्पणी की कि आयोग के सदस्यों को अपने अधिकारक्षेत्र से बाहर नहीं जाना चाहिए और प्रतीत होता है कि उन्हें ज्यूडिशियल अकादमी में प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
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हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित डॉक्टर और अस्पताल प्रबंधन व्यक्तिगत रूप से पेश होने के बजाय हलफनामा और सहायक दस्तावेज दाखिल करें। साथ ही आयोग को कार्यवाही में जल्दबाजी न करने की हिदायत दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयोग के न्यायिक सदस्य को अन्य सदस्यों को प्रक्रियात्मक पहलुओं पर मार्गदर्शन देना चाहिए।
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मामला एक समाचार रिपोर्ट के बाद सामने आया, जिसमें पटियाला के एक निजी अस्पताल पर बकाया राशि के कारण शव रोके रखने का आरोप लगाया गया था। याचिका के अनुसार प्रारंभिक बकाया करीब 7.21 लाख रुपये बताया गया, जिसे सोशल मीडिया पर बढ़ाकर 35 लाख तक प्रचारित किया गया। आयोग के एक गैर-न्यायिक सदस्य ने 16 दिसंबर 2025 को स्वतः संज्ञान लेते हुए अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी और मेडिकल बोर्ड गठित किया था।


अस्पताल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ए.एस. राय ने दलील दी कि सिविल सर्जन की रिपोर्ट में मामला भुगतान विवाद का बताया गया है, न कि चिकित्सकीय लापरवाही का। मेडिकल बोर्ड ने भी इलाज में कोई चूक नहीं पाई।
 
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