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Chandigarh News: पंजाबी यूनिवर्सिटी ने पेट के सीटी स्कैन के लिए विकसित की एआई तकनीक

Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 25 Jan 2026 09:49 PM IST
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Punjabi University has developed AI technology for abdominal CT scans.
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-मेडिकल क्षेत्र में नई खोज, रेडियोलॉजिस्टों को तेज़ निर्णय लेने में मदद मिलेगी
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अमर उजाला ब्यूरो
पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी ने मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज की है। यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने पेट के सीटी स्कैन चित्रों के लिए एक नई एआई तकनीक विकसित की है, जो अंगों की पहचान को अधिक सटीक और प्रभावी बनाती है। इस तकनीक की मदद से रेडियोलॉजिस्टों को तेज़ और जीवन रक्षक फैसले लेने में मदद मिलेगी।
यह तकनीक डॉ. नवजोत कौर और डॉ. निरवैर नीरू की अगुवाई में डॉ. हरिंदर कौर द्वारा किए गए शोध का परिणाम है। यह शोध पेट के सीटी स्कैन चित्रों में अंगों की पहचान से संबंधित है और इसे डीप-लर्निंग मॉडल्स की तुलना में कहीं अधिक प्रभावी पाया गया है। डॉ. हरिंदर कौर ने बताया कि इस शोध में दो पड़ावी विधि (टू स्टेज मथ्ड) का प्रयोग किया गया, जिससे अंगों की सीमाओं और नाजुक आकारों को बेहतर तरीके से पहचाना जा सकता है।
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इस तकनीक का पहला चरण अंगों के चित्रों के कंट्रास्ट को बढ़ाने के लिए वेटेड ग्रे वुल्फ ऑप्टिमाइजेशन एल्गोरिदम का इस्तेमाल करता है। दूसरे चरण में एक्स डैंसनेट आर्किटेक्चरका प्रयोग किया गया, जो अंगों की अंदरूनी विशेषताओं को पहचानने में मदद करता है। इस शोध ने अंतरराष्ट्रीय स्तरीय डेटासेट फलेयर 22 और बीटीसीवी के मुकाबले बेहतर नतीजे दिए हैं। उदाहरण स्वरूप, एओर्टा का पता लगाने में इसने 0.9938 का स्कोर हासिल किया, जो मौजूदा मॉडल्स से कहीं ज्यादा है।

अंतरराष्ट्रीय मान्यता
यह शोध पहले ही ‘डिस्प्लेज’ (एल्सेवियर, एससीआई-इंडेक्स्ड) जैसे प्रमुख जर्नल्स में प्रकाशित हो चुका है और इसे कई आईईईई कॉन्फ्रेंस में भी प्रस्तुत किया गया है। पंजाबी यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. जगदीप सिंह ने इस योगदान को सराहा। उन्होंने कहा कि यह तकनीक रेडियोलॉजिस्टों को तेज़ और सही निर्णय लेने में मदद करेगी, जिससे जीवन रक्षक फैसले लिए जा सकेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यूनिवर्सिटी इस तरह के शोध कार्यों के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध है, जो असल ज़िंदगी पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। यह तकनीक न केवल मेडिकल इमेजिंग के क्षेत्र में एक नवाचार है, बल्कि यह चिकित्सकों को सटीकता और तेज़ निर्णय लेने की क्षमता भी प्रदान करती है, जिससे मरीजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित हो सकेगी।
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