चंडीगढ़ में सुरक्षा इंतजामों की हकीकत: शहर में लगे 50 नाके किसी काम के नहीं, अमर उजाला पड़ताल में खुलासा
अमर उजाला की टीम ने शहर के 20 से ज्यादा नाकों का निरीक्षण किया। हैरानी की बात यह रही कि एक भी नाके पर किसी वाहन को रोककर जांच करते नहीं देखा गया। ज्यादातर स्थानों पर पुलिसकर्मी साइड में खड़े बातचीत करते नजर आए जबकि वाहन लगातार बिना जांच के निकलते रहे।
विस्तार
चंडीगढ़ में फायरिंग और हत्या की ताजा घटनाओं के बाद सुरक्षा के नाम पर चंडीगढ़ प्रशासन भले ही दिन-रात सख्त चेकिंग का दावा कर रहा हो लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
अमर उजाला की पड़ताल में सामने आया है कि शहर में लगाए गए करीब 50 नाकों में से अधिकतर पर चेकिंग नाममात्र की भी नहीं हो रही। वाहन बिना किसी रोक-टोक के गुजर रहे हैं और पुलिसकर्मी मूकदर्शक बने खड़े हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कोई अपराधी वारदात को अंजाम देकर भागता है तो उसे रोकने के लिए ये नाके कितने कारगर साबित होंगे।
पड़ताल के दौरान टीम ने शहर के 20 से ज्यादा नाकों का निरीक्षण किया। हैरानी की बात यह रही कि एक भी नाके पर किसी वाहन को रोककर जांच करते नहीं देखा गया। ज्यादातर स्थानों पर पुलिसकर्मी साइड में खड़े बातचीत करते नजर आए जबकि वाहन लगातार बिना जांच के निकलते रहे।
तीन महीने तक नाके लगाने के आदेश
दरअसल, 17 मार्च को पंजाब यूनिवर्सिटी में सोपू नेता पर फायरिंग और 18 मार्च को सेक्टर-9 में चिन्नी की हत्या के बाद प्रशासन ने सख्ती दिखाते हुए शहर में तीन महीने तक नाके लगाने के निर्देश दिए थे। इसके तहत एक थाने के क्षेत्र में दो और एक चौकी के अंतर्गत एक नाका लगाया गया है। दावा था कि इन नाकों पर 24 घंटे सख्त चेकिंग होगी, ताकि अपराधियों पर लगाम कसी जा सके।
मुख्य नाकों पर भी लापरवाही
अमर उजाला की टीम सेक्टर-9 में पुलिस मुख्यालय के सामने मुख्य सड़क पर लगे नाके पर पहुंची तो वहां एक पुलिसकर्मी एक्टिवा सवार दो लोगों से बातचीत करता मिला। इस दौरान कई वाहन बिना जांच के निकलते रहे। कुछ देर बाद दूसरा पुलिसकर्मी भी वहां पहुंचा, लेकिन वह भी चेकिंग के बजाय बातचीत में ही व्यस्त हो गया।
इसके बाद सेक्टर-7/8 डिवाइडिंग रोड, सेक्टर-26 थाना के सामने, सेक्टर-18/19 और सेक्टर-21/18 डिवाइडिंग रोड पर लगे नाकों की स्थिति भी लगभग एक जैसी मिली। कहीं पुलिसकर्मी खड़े थे लेकिन निष्क्रिय, तो कहीं किसी तरह की चेकिंग नहीं हो रही थी।
दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर सुखना लेक के पास पहुंचने पर स्थिति और चौंकाने वाली मिली। यहां दो से तीन नाके लगे थे, लेकिन एक नाके पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद ही नहीं था। बाकी जगह कर्मचारी समूह बनाकर खड़े थे और वाहन बिना रोके गुजर रहे थे।
इन सवालों के जवाब जरूरी
जब नाकों पर चेकिंग ही नहीं हो रही, तो इन्हें लगाने का क्या उद्देश्य?
क्या नाके केवल औपचारिकता बनकर रह गए हैं?
वारदात के बाद अपराधियों को पकड़ने की रणनीति क्या है?
नाकों की मॉनिटरिंग कौन और कैसे कर रहा है?
शहर में लगे 50 नाके रोक रहे रास्ता, सिर्फ दिखावा