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Haryana: गुरुद्वारा न्यायिक आयोग ने HSGPC का 104 करोड़ का बजट किया रद्द, सात जनवरी की बैठक के फैसले अमान्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Fri, 27 Mar 2026 04:08 PM IST
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सार
गुरुद्वारा न्यायिक आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बजट पास करने के लिए कम से कम 33 सदस्यों की उपस्थिति जरूरी है, जबकि 7 जनवरी की बैठक में केवल 28 सदस्य मौजूद थे।
फैसले की जानकारी देते अधिवक्ता रशपिंदर सिंह सोही
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एचएसजीपीसी) में बजट और अन्य फैसलों को लेकर चल रहे विवाद पर गुरुद्वारा न्यायिक आयोग ने शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया है।
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आयोग ने प्रधान जगदीश सिंह झींडा की अध्यक्षता में 7 जनवरी को पारित 104 करोड़ रुपये के बजट को रद्द कर दिया। इसके साथ ही उस बैठक में लिए गए अन्य सभी निर्णयों को भी अमान्य घोषित कर दिया गया।
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आयोग ने स्पष्ट किया कि लंगर जैसे नियमित खर्चों को छोड़कर अब किसी भी बड़े वित्तीय फैसले के लिए 49 सदस्यीय कमेटी की मंजूरी या न्यायिक आयोग की अनुमति अनिवार्य होगी। वहीं, कमेटी के मनोनीत सदस्य जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल को धर्म कमेटी से हटाने के निर्देश भी रद्द कर दिए गए हैं।
आयोग ने अपने फैसले में कहा कि बजट पास करने के लिए कम से कम 33 सदस्यों की उपस्थिति जरूरी है, जबकि 7 जनवरी की बैठक में केवल 28 सदस्य मौजूद थे। इसी तरह जमीन खरीद के लिए न्यूनतम 8 सदस्यों की सहमति आवश्यक है, लेकिन उस समय सिर्फ 7 सदस्यों की मंजूरी ली गई थी। इन प्रक्रियागत खामियों के चलते सभी फैसलों को अवैध करार दिया गया।
मामले में अधिवक्ता रशपिंदर सिंह सोही के अनुसार, नियमों की अनदेखी के खिलाफ वरिष्ठ उपाध्यक्ष गुरमीत सिंह ने 12 जनवरी को आयोग में याचिका दायर की थी। 13 जनवरी को हुई पहली सुनवाई में आयोग ने 49 सदस्यों को नोटिस जारी किया था, जिसके बाद यह फैसला सामने आया है।
कमेटी के प्रधान ने बिना कोरम पूरा किए बजट पास कर संगत को गुमराह किया। अब न्यायिक आयोग का फैसला सच्चाई सामने लाता है। - जत्थेदार बलजीत सिंह दादूवाल
यह फैसला लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है। कमेटी इसे स्वीकार नहीं करती और कानूनी विकल्पों पर विचार करेगी। - जगदीश सिंह झींडा, प्रधान, एचएसजीपीसी