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Chandigarh News: भारत-ईयू के बीच मुक्त व्यापार समझौते से पाक एवं तुर्किये में खलबली
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-बदला वैश्विक समीकरण: भारतीय निर्यातकों के लिए खुले नए अवसर
-ईयू और यूएस के साथ समझौतों से भारत को बड़ा फायदा, प्रतिस्पर्धी देशों की बढ़ी चिंता
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राजीव शर्मा
लुधियाना। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ भारत अब वैश्विक व्यापार का केंद्र बनता जा रहा है। इसी कड़ी में भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए समीकरण गढ़ दिए हैं। गणतंत्र दिवस के आसपास हुए इस समझौते के महज एक सप्ताह बाद भारत और अमेरिका के बीच भी कारोबारी डील पक्की हो गई, जिसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया। इन समझौतों का सीधा असर भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्किये पर पड़ा है, जहां निर्यातकों में खलबली मची हुई है।
ईयू बाजार में भारत को बढ़त
आंकड़ों के अनुसार यूरोपियन यूनियन हर साल करीब 263.5 अरब डॉलर का टेक्सटाइल और अपैरल आयात करता है। अब तक इस बड़े बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज सात अरब डॉलर की थी, क्योंकि भारतीय उत्पादों पर ईयू में औसतन 12 प्रतिशत आयात शुल्क लगता था। दूसरी ओर पाकिस्तान को ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलने के कारण उसका निर्यात ईयू को लगभग नौ अरब डॉलर तक पहुंच गया था। एफटीए के बाद भारत भी अब जीरो ड्यूटी पर निर्यात कर सकेगा। इससे भारतीय उत्पाद कीमत और प्रतिस्पर्धा दोनों मोर्चों पर मजबूत होंगे। यही वजह है कि पाकिस्तान के टेक्सटाइल उद्योग में चिंता गहराती जा रही है।
पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
पाकिस्तानी निर्यातकों का मानना है कि भारत उनके नौ अरब डॉलर के ईयू बाजार में बड़ी हिस्सेदारी छीन सकता है। वहां के उद्यमियों का कहना है कि पाकिस्तान में उत्पादन लागत अधिक है, बिजली महंगी है और टैक्स का बोझ भी ज्यादा है। ऐसे में भारतीय उद्योग से मुकाबला करना कठिन होगा। इसी आशंका के चलते ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार से बिजली दरों में कटौती, टैक्स हॉलिडे और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। उनका दावा है कि राहत नहीं मिलने पर लाखों लोगों के रोजगार पर संकट आ सकता है।
तुर्किये को भी सता रहा डर
तुर्किये की चिंता भी कम नहीं है। उसका ईयू के साथ 1996 से कस्टम यूनियन समझौता है, जिसके तहत ईयू से जुड़े किसी भी देश का माल तुर्किये में ड्यूटी फ्री आ सकता है। भारत-ईयू एफटीए के बाद तुर्किये के उद्योगपतियों को आशंका है कि भारतीय उत्पाद उनके घरेलू बाजार में भी चुनौती बनेंगे। तुर्किये के निर्यात का करीब 41 प्रतिशत हिस्सा ईयू को जाता है, जबकि 32 प्रतिशत आयात ईयू से होता है। टेक्सटाइल, रक्षा, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील और ऑटोमोटिव सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत ने तुर्किये को कस्टम यूनियन समझौते की समीक्षा की मांग करने पर मजबूर कर दिया है।
भारतीय उद्योग में उत्साह
भारतीय उद्यमियों का मानना है कि ईयू और यूएस के साथ हुए समझौते देश के निर्यात के लिए गेम चेंजर साबित होंगे। वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात का लक्ष्य अब पहले से कहीं ज्यादा हासिल करने योग्य दिख रहा है।
उद्योग जगत की राय
नाॅर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के प्रधान सिद्धार्थ खन्ना के अनुसार ईयू और यूएस के साथ समझौतों के बाद भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में बूम आएगा। उद्योग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। निटवियर अपैरल एक्सपोर्टर्स ऑर्गेनाइजेशन के प्रधान हरीश दुआ कहते हैं कि एफटीए के बाद खुले बाजारों में भारतीय उत्पादों की पकड़ मजबूत होगी। गुणवत्ता के मामले में हम किसी से कम नहीं। निटवियर अपैरल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन लुधियाना के प्रधान दर्शन जैन के अनुसार सरकार ने बड़े वैश्विक बाजारों के दरवाजे खोले हैं। अब उद्योग और सरकार मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।
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-ईयू और यूएस के साथ समझौतों से भारत को बड़ा फायदा, प्रतिस्पर्धी देशों की बढ़ी चिंता
राजीव शर्मा
लुधियाना। तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ भारत अब वैश्विक व्यापार का केंद्र बनता जा रहा है। इसी कड़ी में भारत और यूरोपियन यूनियन (ईयू) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में नए समीकरण गढ़ दिए हैं। गणतंत्र दिवस के आसपास हुए इस समझौते के महज एक सप्ताह बाद भारत और अमेरिका के बीच भी कारोबारी डील पक्की हो गई, जिसके तहत अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत करने का ऐलान किया। इन समझौतों का सीधा असर भारत के प्रतिस्पर्धी देशों पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्किये पर पड़ा है, जहां निर्यातकों में खलबली मची हुई है।
ईयू बाजार में भारत को बढ़त
आंकड़ों के अनुसार यूरोपियन यूनियन हर साल करीब 263.5 अरब डॉलर का टेक्सटाइल और अपैरल आयात करता है। अब तक इस बड़े बाजार में भारत की हिस्सेदारी महज सात अरब डॉलर की थी, क्योंकि भारतीय उत्पादों पर ईयू में औसतन 12 प्रतिशत आयात शुल्क लगता था। दूसरी ओर पाकिस्तान को ड्यूटी फ्री एक्सेस मिलने के कारण उसका निर्यात ईयू को लगभग नौ अरब डॉलर तक पहुंच गया था। एफटीए के बाद भारत भी अब जीरो ड्यूटी पर निर्यात कर सकेगा। इससे भारतीय उत्पाद कीमत और प्रतिस्पर्धा दोनों मोर्चों पर मजबूत होंगे। यही वजह है कि पाकिस्तान के टेक्सटाइल उद्योग में चिंता गहराती जा रही है।
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पाकिस्तान में बढ़ी बेचैनी
पाकिस्तानी निर्यातकों का मानना है कि भारत उनके नौ अरब डॉलर के ईयू बाजार में बड़ी हिस्सेदारी छीन सकता है। वहां के उद्यमियों का कहना है कि पाकिस्तान में उत्पादन लागत अधिक है, बिजली महंगी है और टैक्स का बोझ भी ज्यादा है। ऐसे में भारतीय उद्योग से मुकाबला करना कठिन होगा। इसी आशंका के चलते ऑल पाकिस्तान टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की सरकार से बिजली दरों में कटौती, टैक्स हॉलिडे और विशेष आर्थिक पैकेज की मांग की है। उनका दावा है कि राहत नहीं मिलने पर लाखों लोगों के रोजगार पर संकट आ सकता है।
तुर्किये को भी सता रहा डर
तुर्किये की चिंता भी कम नहीं है। उसका ईयू के साथ 1996 से कस्टम यूनियन समझौता है, जिसके तहत ईयू से जुड़े किसी भी देश का माल तुर्किये में ड्यूटी फ्री आ सकता है। भारत-ईयू एफटीए के बाद तुर्किये के उद्योगपतियों को आशंका है कि भारतीय उत्पाद उनके घरेलू बाजार में भी चुनौती बनेंगे। तुर्किये के निर्यात का करीब 41 प्रतिशत हिस्सा ईयू को जाता है, जबकि 32 प्रतिशत आयात ईयू से होता है। टेक्सटाइल, रक्षा, केमिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील और ऑटोमोटिव सेक्टर में भारत की बढ़ती ताकत ने तुर्किये को कस्टम यूनियन समझौते की समीक्षा की मांग करने पर मजबूर कर दिया है।
भारतीय उद्योग में उत्साह
भारतीय उद्यमियों का मानना है कि ईयू और यूएस के साथ हुए समझौते देश के निर्यात के लिए गेम चेंजर साबित होंगे। वर्ष 2030 तक 100 अरब डॉलर के टेक्सटाइल निर्यात का लक्ष्य अब पहले से कहीं ज्यादा हासिल करने योग्य दिख रहा है।
उद्योग जगत की राय
नाॅर्दर्न इंडिया टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन के प्रधान सिद्धार्थ खन्ना के अनुसार ईयू और यूएस के साथ समझौतों के बाद भारतीय टेक्सटाइल उद्योग में बूम आएगा। उद्योग ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। निटवियर अपैरल एक्सपोर्टर्स ऑर्गेनाइजेशन के प्रधान हरीश दुआ कहते हैं कि एफटीए के बाद खुले बाजारों में भारतीय उत्पादों की पकड़ मजबूत होगी। गुणवत्ता के मामले में हम किसी से कम नहीं। निटवियर अपैरल मैन्युफैक्चर्स एसोसिएशन लुधियाना के प्रधान दर्शन जैन के अनुसार सरकार ने बड़े वैश्विक बाजारों के दरवाजे खोले हैं। अब उद्योग और सरकार मिलकर ‘मेक इन इंडिया’ को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं।
