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मनेंद्रगढ़ में बर्खास्तगी पर रार: कमरो ने कलेक्टर की कार्रवाई को बताया कठोर, शासन से लगाई ये फरियाद

अमर उजाला नेटवर्क, कोरिया Published by: अंबिकापुर ब्यूरो Updated Thu, 15 Jan 2026 08:03 PM IST
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सार

त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2025 के दौरान निर्वाचन ड्यूटी में तैनात दो आदिवासी शिक्षकों की सेवा समाप्ति का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।

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पूर्व विधायक गुलाब कमरो - फोटो : अमर उजाला डिजिटल
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विस्तार

Korea News: त्रि-स्तरीय पंचायत आम निर्वाचन 2025 के दौरान निर्वाचन ड्यूटी में तैनात दो आदिवासी शिक्षकों की सेवा समाप्ति का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने इस पूरी कार्रवाई को कठोर और अन्यायपूर्ण करार देते हुए छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव, राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग और आयुक्त सरगुजा संभाग को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप और शिक्षकों की बहाली की मांग की है।
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क्या है पूरा मामला?
घटना 19 फरवरी 2025 की है, जब शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय साल्ही में निर्वाचन सामग्री का वितरण किया जा रहा था। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात अशोक कुमार सिंह (सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला हर्रा टोला) अभय कुजूर (सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला चुकतीपानी) इन दोनों शिक्षकों पर कथित रूप से मदिरा सेवन कर कार्यक्षेत्र में उपस्थित होने का आरोप लगाया गया। इस आधार पर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी ने दोनों शिक्षकों को सीधे सेवा से बर्खास्त करने की अनुशंसा कर दी गई।
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मिले सुधार का अवसर: कमरो
पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने अपने पत्र में आदिवासी समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश का हवाला देते हुए इस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

इन बिंदुओं पर की मांग
सांस्कृतिक पक्ष: आदिवासी समाज में कुछ अवसरों पर पारंपरिक रूप से सेवन किया जाता है। कई बार पूर्व रात्रि के सेवन की गंध अगले दिन तक रह जाती है, जिसे कार्य के दौरान मदिरा सेवन का गलत प्रमाण मान लिया जाता है।
प्राकृतिक न्याय का अभाव: बिना किसी समुचित जांच, विस्तृत सुनवाई या सुधार का अवसर दिए सीधे नौकरी से निकालना न्यायसंगत नहीं है। शासकीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन: राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों के अनुसार, अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों के मामलों में प्रथम दृष्टया समझाइश और सुधार का अवसर दिया जाना चाहिए।

'मानवीय पक्ष पर दें जोर'
गुलाब कमरो ने शासन से पुरजोर मांग की है कि यदि इन शिक्षकों से अनजाने में कोई त्रुटि हुई भी है, तो उनके लंबे करियर और उनके परिवारों के मानवीय पक्ष को ध्यान में रखा जाए। बर्खास्तगी के कठोर दंड के बजाय उन्हें पुनः सेवा में बहाल किया जाए ताकि वे भविष्य में पूर्ण अनुशासन के साथ अपना दायित्व निभा सकें। क्षेत्र में इस पत्र के बाद अब चर्चा तेज है कि क्या प्रशासन अपने इस सख्त फैसले पर पुनर्विचार करेगा या यह मामला एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक आंदोलन का रूप लेगा।

 

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