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Exclusive: अमेरिका ने लौटाई रायपुर से चुराई गई 'अवलोकितेश्वर' की कांस्य प्रतिमा; 20 लाख डॉलर है कुल कीमत
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: Lalit Kumar Singh
Updated Fri, 01 May 2026 04:04 PM IST
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सार
US Returns 'Avalokiteshvara' Bronze Statue in india: अमेरिका ने भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन वस्तुएं लौटाई है।
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल
- फोटो : Amar ujala digital
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विस्तार
US Returns 'Avalokiteshvara' Bronze Statue in india: अमेरिका ने भारत को करीब 1.4 करोड़ डॉलर मूल्य की 657 प्राचीन वस्तुएं लौटाई है। खास और बड़ी बात ये है कि इसमें छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से चुराई गई 20 लाख डॉलर की 'अवलोकितेश्वर'की कांस्य प्रतिमा भी शामिल हैं। शिलालेख में कारीगर का नाम द्रोणादित्य अंकित है, जो छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के श्रीपुर (वर्तमान में सिरपुर) के निवासी थे। यह प्रतिमा वर्ष 1939 में लक्ष्मण मंदिर के पास मिली कांस्य प्रतिमाओं के एक बड़े भंडार का हिस्सा थी। साल 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय के संग्रह में शामिल हो गई थी। इसे महासमुंद जिले के लक्ष्मण मंदिर के पास से खोजा गया था। बता दें कि महासमुंद जिला भी रायपुर का ही हिस्सा था, जो बाद में रायपुर से पृथक होकर अलग जिला बना।
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चुराई गई थी प्रतिमा
बताया जाता है कि रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चुराई गई 'अवलोकितेश्वर' की कांस्य प्रतिमा को अमेरिका भारत को लौटा दिया गया है। 20 लाख डॉलर करीब 19 करोड़ रुपये की यह प्रतिमा उन 657 प्राचीन वस्तुओं में शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में न्यूयॉर्क के मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने वापस किया है।
सिंहों से सजा सिंहासन
इस प्रतिमा में सिंहों से सजे एक सिंहासन (सिंहासन के ऊपर उत्कीर्ण दोहरे कमल) पर बैठा हुआ दिखाया गया है। यह प्रतिमा 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित थी, लेकिन 1982 तक इसे वहां से चुराकर अमेरिका तस्करी कर दिया गया। इसे 2014 में न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में ट्रैक किया गया था और 2025 में मैनहट्टन जिला अटॉर्नी के 'एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट' की ओर से जब्त किया गया। यह बरामदगी अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसमें कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर का नाम भी शामिल है।
अमेरिका ने कहा कि इस एशियाई देश को चुराई गई कलाकृतियां वापस दिलाने के लिए अभी और काम किया जाना बाकी है। प्राचीन वस्तुएं लौटाने की घोषणा मैनहट्टन के जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने की। ये वस्तुएं कई तस्करी गिरोहों की जांच के बाद बरामद की गईं, जिनमें कुख्यात कला व्यापारी सुभाष कपूर और दोषी तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े गिरोह भी शामिल हैं।
इन वस्तुओं को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की दूत राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में भारत को सौंपा गया। ब्रैग ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने वाले तस्करी गिरोह का दायरा बहुत बड़ा है। यह 650 से अधिक वस्तुओं की वापसी से स्पष्ट होता है। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्रालय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सतत सहयोग की सराहना भी की।
गणेश प्रतिमा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से लूटी
एक अन्य वस्तु नृत्य करते हुए 'गणेश' की बलुआ पत्थर की प्रतिमा है, जिसे कपूर के सहयोगी रंजीत कंवर ने 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूटा था।
बुद्ध की 75 लाख डॉलर की मूर्ति
लाल बलुआ पत्थर की 'बुद्ध' प्रतिमा में बुद्ध अपना दाहिना हाथ 'अभय मुद्रा' में उठाए खड़े हैं। इस प्रतिमा के घुटनों के नीचे के पैर टूटे हैं और सिर के पीछे का आभामंडल भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है।
कपूर का भारत से प्रत्यर्पण लंबित
जिला अटॉर्नी कार्यालय ने 2012 में सुभाष कपूर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नवंबर 2019 में उसे और उसके सात सह-आरोपियों को चोरी की प्राचीन वस्तुओं की तस्करी की साजिश के आरोप में अभियुक्त बनाया गया। कपूर का भारत से प्रत्यर्पण अभी लंबित है, जहां उसे 2022 में तस्करी गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया था। उसके पांच सह-आरोपियों को मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय पहले ही दोषी ठहरा चुका है। उसने करोड़ो डॉलर का सामान बेचा।
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महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चुराई गई थी प्रतिमा
बताया जाता है कि रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चुराई गई 'अवलोकितेश्वर' की कांस्य प्रतिमा को अमेरिका भारत को लौटा दिया गया है। 20 लाख डॉलर करीब 19 करोड़ रुपये की यह प्रतिमा उन 657 प्राचीन वस्तुओं में शामिल हैं, जिन्हें हाल ही में न्यूयॉर्क के मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय ने वापस किया है।
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सिंहों से सजा सिंहासन
इस प्रतिमा में सिंहों से सजे एक सिंहासन (सिंहासन के ऊपर उत्कीर्ण दोहरे कमल) पर बैठा हुआ दिखाया गया है। यह प्रतिमा 1952 तक रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में सुरक्षित थी, लेकिन 1982 तक इसे वहां से चुराकर अमेरिका तस्करी कर दिया गया। इसे 2014 में न्यूयॉर्क के एक निजी संग्रह में ट्रैक किया गया था और 2025 में मैनहट्टन जिला अटॉर्नी के 'एंटीक्विटीज ट्रैफिकिंग यूनिट' की ओर से जब्त किया गया। यह बरामदगी अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, जिसमें कुख्यात तस्कर सुभाष कपूर का नाम भी शामिल है।
अमेरिका ने कहा कि इस एशियाई देश को चुराई गई कलाकृतियां वापस दिलाने के लिए अभी और काम किया जाना बाकी है। प्राचीन वस्तुएं लौटाने की घोषणा मैनहट्टन के जिला अटॉर्नी एल्विन ब्रैग ने की। ये वस्तुएं कई तस्करी गिरोहों की जांच के बाद बरामद की गईं, जिनमें कुख्यात कला व्यापारी सुभाष कपूर और दोषी तस्कर नैन्सी वीनर से जुड़े गिरोह भी शामिल हैं।
इन वस्तुओं को न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास की दूत राजलक्ष्मी कदम की मौजूदगी में भारत को सौंपा गया। ब्रैग ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत को निशाना बनाने वाले तस्करी गिरोह का दायरा बहुत बड़ा है। यह 650 से अधिक वस्तुओं की वापसी से स्पष्ट होता है। न्यूयॉर्क में भारत के महावाणिज्य दूत बिनय प्रधान ने मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय, अमेरिकी गृह सुरक्षा मंत्रालय और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सतत सहयोग की सराहना भी की।
गणेश प्रतिमा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से लूटी
एक अन्य वस्तु नृत्य करते हुए 'गणेश' की बलुआ पत्थर की प्रतिमा है, जिसे कपूर के सहयोगी रंजीत कंवर ने 2000 में मध्य प्रदेश के एक मंदिर से लूटा था।
बुद्ध की 75 लाख डॉलर की मूर्ति
लाल बलुआ पत्थर की 'बुद्ध' प्रतिमा में बुद्ध अपना दाहिना हाथ 'अभय मुद्रा' में उठाए खड़े हैं। इस प्रतिमा के घुटनों के नीचे के पैर टूटे हैं और सिर के पीछे का आभामंडल भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त है।
कपूर का भारत से प्रत्यर्पण लंबित
जिला अटॉर्नी कार्यालय ने 2012 में सुभाष कपूर के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था। नवंबर 2019 में उसे और उसके सात सह-आरोपियों को चोरी की प्राचीन वस्तुओं की तस्करी की साजिश के आरोप में अभियुक्त बनाया गया। कपूर का भारत से प्रत्यर्पण अभी लंबित है, जहां उसे 2022 में तस्करी गतिविधियों के लिए दोषी ठहराया गया था। उसके पांच सह-आरोपियों को मैनहट्टन जिला अटॉर्नी कार्यालय पहले ही दोषी ठहरा चुका है। उसने करोड़ो डॉलर का सामान बेचा।
