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बिलासपुर: राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान अस्पताल के नाम पर घोटाले में हाईकोर्ट ने सीबीआई को दिए जांच के आदेश
अमर उजाला नेटवर्क, बिलासपुर
Published by: Digvijay Singh
Updated Wed, 24 Sep 2025 10:36 PM IST
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सार
राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान अस्पताल के नाम पर हुए एक हजार करोड़ के घोटाले के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं।
बिलासपुर हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान अस्पताल के नाम पर हुए एक हजार करोड़ के घोटाले के मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं। जस्टिस पीपी साहू और जस्टिस सजंय कुमार जायसवाल की डीबी ने अपने आदेश में कहा है कि इस मामले में राज्य के 6 आईएएस अधिकारी आलोक शुक्ला, विवेक ढांड, एमके राउत, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल और पीपी सोती समेत सतीश पांडेय, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा पर लगाए गए आरोप प्रारंभिक तौर पर सही पाए गए। इस गंभीर मामले की स्थानीय एजेंसियों और पुलिस से जांच कराना सही नहीं होगा। हाईकोर्ट ने सीबीआई को 15 दिनों में सभी दस्तावेज जब्त करते हुए जांच शुरू करने कहा है।
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ध्यान रहे कि सीबीआई जबलपुर ने इससे पहले मामले में अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इसी बीच घोटाले के आरोप में फंसे आईएएस व राज्य सेवा संवंर्ग के अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर सीबीआई जांच पर रोक की मांग की थी। प्रकरण की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई जांच पर रोक लगाते हुए सुनवाई के लिए प्रकरण छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट को वापस भेज दिया था। इस पर चल रही सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने अब सीबीआई को जांच का आदेश दिया है।
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रायपुर के कुशालपुर निवासी कुंदन सिंह ठाकुर ने छत्तीसगढ़ के कुछ वर्तमान और रिटायर्ड आईएएस अफसरों पर एनजीओ के नाम पर करोड़ों का घोटाला करने का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका 2017 में याचिका दायर की। 2018 में जनहित याचिका के रूप में इसकी सुनवाई शुरू की गई। सुनवाई के दौरान पता चला कि राज्य स्रोत नि:शक्त जन संस्थान नाम की संस्था ही नहीं है। सिर्फ कागजों में संस्था का गठन किया गया था। राज्य को संस्था के माध्यम से 1000 करोड़ का वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा, जो कि 2004 से 2018 के बीच में 10 साल से ज्यादा समय तक किया गया।
याचिका में बताया गया है कि खुद याचिकाकर्ता को एक शासकीय अस्पताल राज्य स्त्रोत नि:शक्त जन संस्थान में कार्यरत बताते हुए वेतन देने की जानकारी पहले मिली। इसके बाद उन्होंने आरटीआई के तहत जानकारी ली तो पता चला कि नया रायपुर स्थित इस कथित अस्पताल को एक एनजीओ चला रहा है। जिसमें करोड़ों की मशीनें खरीदी गईं हैं। इनके रखरखाव में भी करोड़ों का खर्च आना बताया गया। याचिका में कहा गया कि स्टेट रिसोर्स सेंटर का कार्यालय माना रायपुर में बताया गया, जो समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत है। इस मामले में राज्य के 6 आईएएस अधिकारी आलोक शुक्ला, विवेक ढांड, एमके राउत, सुनील कुजूर, बीएल अग्रवाल और पीपी सोती समेत सतीश पांडेय, राजेश तिवारी, अशोक तिवारी, हरमन खलखो, एमएल पांडेय और पंकज वर्मा पर आरोप लगाया गया।
याचिका में यह भी बताया गया कि एसआरसी ने बैंक ऑफ इंडिया के अकाउंट और एसबीआई मोतीबाग के तीन एकाउंट से संस्थान में कार्यरत अलग-अलग लोगों के नाम पर फर्जी आधार कार्ड से खाते खुलवाकर रुपए निकाले गए। सुनवाई के दौरान राज्य के तात्कालीन मुख्य सचिव अजय सिंह ने शपथ-पत्र दिया। इसमें उन्होंने 150-200 करोड़ की गलतियां सामने आने की बात कही। हाईकोर्ट ने कहा कि जिसे राज्य के मुख्य सचिव गलतियां और त्रुटि बता रहे हैं, वह एक संगठित और सुनियोजित अपराध है। कोर्ट ने सीबीआई को जांच के लिए निर्देश दिए थे। साथ ही हाईकोर्ट के निर्देश पर घोटाले में फंसे आधा दर्जन से अधिक आईएएस अधिकारियों ने भी अपना जवाब प्रस्तुत किया। इसके बाद अब यह फैसला सुनाया गया है।