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सीजी: भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा में चुनावी बिगुल की तैयारी, कांग्रेस के सामने गढ़ बचाने की चुनौती

Mon, 12 Oct 2026 05:46 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 12 Oct 2026 05:46 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ के भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगमों में दिसंबर में प्रस्तावित चुनावों को लेकर कांग्रेस और भाजपा ने तैयारी तेज कर दी है। कांग्रेस विकास कार्यों पर जोर देगी, जबकि भाजपा भ्रष्टाचार, जल संकट और सड़कों को मुद्दा बनाएगी।

 

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CG Preparations for the election bugle in Bhilai, Risali, and Bhilai-Charoda Congress faces the challenge
कांग्रेस पार्टी का झंडा - फोटो : ANI Photos

विस्तार

छत्तीसगढ़ के भिलाई, रिसाली और भिलाई-चरोदा नगर निगमों में आगामी दिसंबर में प्रस्तावित चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। तीनों निकायों में सत्ता पर काबिज कांग्रेस के सामने अपना वर्चस्व बरकरार रखने की चुनौती है, जबकि भाजपा इन चुनावों के जरिए अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में जुटी है।

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तीनों नगर निगमों में कांग्रेस का कब्जा
प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े नगर निगम भिलाई में इस समय महापौर नीरज पाल के नेतृत्व में कांग्रेस का कब्जा है। वहीं, रिसाली नगर निगम में शशि सिन्हा और भिलाई-चरोदा नगर निगम में निर्मल कोसरे महापौर की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। पिछले आम चुनावों में कांग्रेस ने तीनों निकायों में भाजपा को शिकस्त दी थी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस बार भिलाई नगर निगम का चुनाव सबसे अधिक दिलचस्प हो सकता है। वहीं, रिसाली में सत्ता विरोधी रुझान और भिलाई-चरोदा में स्थानीय मुद्दे चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। इन चुनावों को वर्ष 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों की राजनीतिक ताकत परखने के अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
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कांग्रेस विकास कार्यों के सहारे बचाएगी साख
कांग्रेस अपनी राजनीतिक साख बनाए रखने के लिए विकास कार्यों को प्रमुख मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है। पार्टी की रणनीति में अमृत मिशन, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति, उद्यान विकास और प्रधानमंत्री आवास योजना के क्रियान्वयन से जुड़े कार्यों को जनता के सामने रखने पर जोर है।

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चुनावी तैयारियों के तहत वार्ड स्तर पर गठित बूथ कमेटियों को सक्रिय किया जा रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यकाल की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ प्रदेश की मौजूदा भाजपा सरकार की नीतियों और कार्यप्रणाली को भी चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में हैं। टिकट वितरण में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों के साथ जातिगत संतुलन साधने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।


भाजपा भ्रष्टाचार और बुनियादी सुविधाओं को बनाएगी मुद्दा
तीनों नगर निगमों में दोबारा अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए भाजपा भी चुनावी तैयारियों में जुटी है। पार्टी की रणनीति में कथित भ्रष्टाचार, जल संकट, खस्ताहाल सड़कें और कर वृद्धि जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाना शामिल है।

भाजपा संगठन ने वार्ड स्तर पर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। इसके आधार पर संभावित प्रत्याशियों के चयन की तैयारी की जा रही है। पार्टी का जोर बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने के साथ युवा और महिला मतदाताओं को अपने पक्ष में जोड़ने पर है।

प्रदेश में भाजपा की सरकार होने का लाभ उठाते हुए पार्टी विकास के मुद्दे पर डबल इंजन सरकार का नारा भी चुनाव प्रचार में इस्तेमाल करने की तैयारी कर रही है। ऐसे में दिसंबर में प्रस्तावित इन चुनावों में कांग्रेस के लिए अपना कब्जा बरकरार रखना और भाजपा के लिए तीनों नगर निगमों में अपनी स्थिति मजबूत करना बड़ी चुनौती होगी।

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