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Durg: मेड़ेसरा पावर ग्रिड टावर प्रोजेक्ट पर किसानों का बवाल, मुआवजा नहीं मिलने से बढ़ा आक्रोश,आत्मदाह की कोशिश
अमर उजाला नेटवर्क, दुर्ग
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 09 Oct 2025 05:42 PM IST
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सार
मेड़ेसरा गांव में 400 केवी विद्युत ट्रांसमिशन टावर परियोजना को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। हजारों की संख्या में किसान बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और राज्य सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जमीन पर बैठकर धरना दिया।
मेड़ेसरा पावर ग्रिड टावर प्रोजेक्ट पर किसानों का बवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दुर्ग जिले के मेड़ेसरा गांव में 400 केवी विद्युत ट्रांसमिशन टावर परियोजना को लेकर किसानों का गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है। हजारों की संख्या में किसान बुधवार को कलेक्ट्रेट पहुंचे और राज्य सरकार व प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जमीन पर बैठकर धरना दिया। इस दौरान किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के दौरान माहौल उस समय तनावपूर्ण हो गया जब एक किसान नेता ने अपने ऊपर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने समय रहते उसे रोक लिया, जिससे बड़ी अनहोनी टल गई।
जानकारी के अनुसार, मेड़ेसरा पावर ग्रिड से धमतरी जिले के कुरूद तक लगाए जा रहे इन ट्रांसमिशन टावरों से करीब 19 गांवों के लगभग 1500 किसान प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि शासन ने 10 मार्च 2025 को आदेश जारी किया था कि टावर बेस की भूमि के लिए 200% और तारों के नीचे की भूमि के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा।
लेकिन इसके विपरीत प्रशासन ने टावर बेस के लिए सिर्फ 80% और तारों के नीचे की भूमि के लिए केवल 15% मुआवजा दिया। किसानों का आरोप है कि यही सबसे बड़ा विवाद है और इसी वजह से वे बार-बार आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव ने बताया कि कुछ गांवों में मुआवजा वितरण किया जा चुका है। किसानों की मांग पर 200% मुआवजा देने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में 2016 का नियम लागू होता है और किसानों की मांगों पर विचार कर रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।
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जानकारी के अनुसार, मेड़ेसरा पावर ग्रिड से धमतरी जिले के कुरूद तक लगाए जा रहे इन ट्रांसमिशन टावरों से करीब 19 गांवों के लगभग 1500 किसान प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का कहना है कि शासन ने 10 मार्च 2025 को आदेश जारी किया था कि टावर बेस की भूमि के लिए 200% और तारों के नीचे की भूमि के लिए 30% मुआवजा दिया जाएगा।
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लेकिन इसके विपरीत प्रशासन ने टावर बेस के लिए सिर्फ 80% और तारों के नीचे की भूमि के लिए केवल 15% मुआवजा दिया। किसानों का आरोप है कि यही सबसे बड़ा विवाद है और इसी वजह से वे बार-बार आंदोलन करने को मजबूर हो रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर उत्तम ध्रुव ने बताया कि कुछ गांवों में मुआवजा वितरण किया जा चुका है। किसानों की मांग पर 200% मुआवजा देने का प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा। उन्होंने कहा कि इस प्रोजेक्ट में 2016 का नियम लागू होता है और किसानों की मांगों पर विचार कर रिपोर्ट शासन को सौंपी जाएगी।