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Korba: कमीशन के चक्कर में फंस गए दो खाताधारक, साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे थे बैंक खाते; पुलिस ने कसा शिकंजा
Thu, 13 Aug 2026 09:28 PM IST
कोरबा ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Thu, 13 Aug 2026 09:28 PM IST
सार
पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में साइबर थाना कोरबा ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो खाताधारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है।
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पुलिस के गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरबा जिले में कमीशन के लालच में अपना बैंक खाता और मोबाइल नंबर दूसरों को देना कोरबा के दो लोगों को महंगा पड़ा। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में साइबर थाना कोरबा ने म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो खाताधारकों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस लगातार ऐसे बैंक खातों की जांच कर रही है जिनका उपयोग साइबर अपराध में किए जाने की आशंका है। इसी कड़ी में अलग-अलग बैंकों से जुड़े दो खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना शुरू की गई।
विवेचना के दौरान महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर और के. प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर निवासी को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में दोनों ने बताया कि लाभ कमाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने बैंक खाते अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग करने के लिए दे दिए थे। बाद में जब खाते होल्ड हो गए तब उन्हें पता चला कि उनके खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया गया है। उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना जारी है।
साइबर अपराधी आम लोगों को कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते हैं या पहले से चल रहे खातों का इस्तेमाल करते हैं। साइबर ठगी से आई रकम को इन्हीं खातों में ट्रांसफर कर इधर-उधर भेजा जाता है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। पुलिस ऐसे खातों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है। ध्यान रखें, अपना खाता किसी को देने वाला व्यक्ति भी साइबर अपराध की जांच और कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है।
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साइबर अपराधी कमीशन और लाभ का झांसा देकर आपसे बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम और मोबाइल नंबर मांग सकते हैं। नागरिकों से अपील है।अपना बैंक खाता, एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या नेट बैंकिंग की जानकारी किसी से साझा न करें। अपना मोबाइल नंबर या सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। कमीशन या आसान कमाई के नाम पर खाता मांगने वाले से सतर्क रहें। अपने खाते में होने वाले लेन-देन पर नियमित नजर रखें।संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तुरंत बैंक और पुलिस को दें। किसी अनजान के कहने पर खाते में आई राशि को आगे ट्रांसफर या नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस का कहना है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के चक्कर में अपना खाता और नंबर किसी को न दें। इससे आप खुद साइबर अपराध की विवेचना में फंस सकते हैं।
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विवेचना के दौरान महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर और के. प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर निवासी को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ में दोनों ने बताया कि लाभ कमाने के उद्देश्य से उन्होंने अपने बैंक खाते अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग करने के लिए दे दिए थे। बाद में जब खाते होल्ड हो गए तब उन्हें पता चला कि उनके खातों का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया गया है। उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना जारी है।
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साइबर अपराधी आम लोगों को कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाते हैं या पहले से चल रहे खातों का इस्तेमाल करते हैं। साइबर ठगी से आई रकम को इन्हीं खातों में ट्रांसफर कर इधर-उधर भेजा जाता है। ऐसे खातों को म्यूल अकाउंट कहा जाता है। पुलिस ऐसे खातों की पहचान कर कार्रवाई कर रही है। ध्यान रखें, अपना खाता किसी को देने वाला व्यक्ति भी साइबर अपराध की जांच और कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकता है।
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साइबर अपराधी कमीशन और लाभ का झांसा देकर आपसे बैंक खाता, एटीएम कार्ड, पासबुक, सिम और मोबाइल नंबर मांग सकते हैं। नागरिकों से अपील है।अपना बैंक खाता, एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या नेट बैंकिंग की जानकारी किसी से साझा न करें। अपना मोबाइल नंबर या सिम किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए न दें। कमीशन या आसान कमाई के नाम पर खाता मांगने वाले से सतर्क रहें। अपने खाते में होने वाले लेन-देन पर नियमित नजर रखें।संदिग्ध लेन-देन की जानकारी तुरंत बैंक और पुलिस को दें। किसी अनजान के कहने पर खाते में आई राशि को आगे ट्रांसफर या नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस का कहना है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के चक्कर में अपना खाता और नंबर किसी को न दें। इससे आप खुद साइबर अपराध की विवेचना में फंस सकते हैं।