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मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई पर बढ़ा विवाद: प्रभावित गांवों ने 21 अगस्त की प्रक्रिया रद्द करने की मांग की
Thu, 13 Aug 2026 06:45 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: अमन कोशले
Updated Thu, 13 Aug 2026 06:45 PM IST
सार
संगठन ने 21 अगस्त को होने वाली प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि पुरानी मांगों और विस्थापन से जुड़े मामलों का समाधान किए बिना जनसुनवाई कराई गई तो वे सामूहिक रूप से इसका विरोध करेंगे।
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मानिकपुर खदान विस्तार की जनसुनवाई पर बढ़ा विवाद
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के एसईसीएल की मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों और भू-विस्थापित संगठन ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने 21 अगस्त को होने वाली प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि पुरानी मांगों और विस्थापन से जुड़े मामलों का समाधान किए बिना जनसुनवाई कराई गई तो वे सामूहिक रूप से इसका विरोध करेंगे।
भिलाई-1, भिलाई-2, भिलाई-3, रापाखरा, दादर खुर्द, कुदरी बस्ती, ढेलवाडीह, कदमहाखार, इमलीडुग्गु और मानिकपुर के किसान व ग्रामीण इस आंदोलन में शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पहले अपनी उपजाऊ जमीन गंवाने के बाद भी आज तक करीब 200 से 250 किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं।
ग्रामीणों ने रखीं 4 प्रमुख मांगें है कि ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन सिर्फ कॉर्पोरेट मुनाफे और खदान विस्तार को तरजीह दे रहे हैं। जब तक विस्थापितों के पुराने वादे पूरे नहीं होते, तब तक क्षेत्र में किसी भी तरह की जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।वादाखिलाफी के विरोध में प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही कम से कम 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग की गई है।
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भिलाई खुर्द-1, 2, 3 के बचे हुए मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन किया जाए। वर्षों बाद भी यहां के लोगों को सही हक नहीं मिला है। रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार और आने-जाने का वैकल्पिक मार्ग दिया जाए। वहीं दादर खुर्द के तालाब, जो गांव की निस्तारी का एकमात्र स्रोत है, उस क्षेत्र में OB डंपिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए।
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। 15-20 दिन पहले अधिकारियों से बातचीत में कहा गया था कि जानकारी मिलने पर बताया जाएगा, लेकिन अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेज दिया गया है। उन्होंने इसे प्रबंधन की "सोची-समझी साजिश" बताया।
संगठन ने कहा है कि रापाखरा गांव चारों तरफ खदानों से घिरकर मिट्टी का टीला बन चुका है, जहां न रास्ता बचा है और न बुनियादी सुविधाएं। यदि समय रहते जनसुनवाई स्थगित नहीं की गई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और SECL मानिकपुर प्रबंधन की होगी।
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भिलाई-1, भिलाई-2, भिलाई-3, रापाखरा, दादर खुर्द, कुदरी बस्ती, ढेलवाडीह, कदमहाखार, इमलीडुग्गु और मानिकपुर के किसान व ग्रामीण इस आंदोलन में शामिल हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पहले अपनी उपजाऊ जमीन गंवाने के बाद भी आज तक करीब 200 से 250 किसानों को मुआवजा नहीं मिला है। SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नदारद हैं।
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ग्रामीणों ने रखीं 4 प्रमुख मांगें है कि ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन सिर्फ कॉर्पोरेट मुनाफे और खदान विस्तार को तरजीह दे रहे हैं। जब तक विस्थापितों के पुराने वादे पूरे नहीं होते, तब तक क्षेत्र में किसी भी तरह की जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।वादाखिलाफी के विरोध में प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही कम से कम 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग की गई है।
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भिलाई खुर्द-1, 2, 3 के बचे हुए मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन किया जाए। वर्षों बाद भी यहां के लोगों को सही हक नहीं मिला है। रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार और आने-जाने का वैकल्पिक मार्ग दिया जाए। वहीं दादर खुर्द के तालाब, जो गांव की निस्तारी का एकमात्र स्रोत है, उस क्षेत्र में OB डंपिंग पर तुरंत रोक लगाई जाए।
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी कोई सूचना नहीं दी गई। 15-20 दिन पहले अधिकारियों से बातचीत में कहा गया था कि जानकारी मिलने पर बताया जाएगा, लेकिन अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेज दिया गया है। उन्होंने इसे प्रबंधन की "सोची-समझी साजिश" बताया।
संगठन ने कहा है कि रापाखरा गांव चारों तरफ खदानों से घिरकर मिट्टी का टीला बन चुका है, जहां न रास्ता बचा है और न बुनियादी सुविधाएं। यदि समय रहते जनसुनवाई स्थगित नहीं की गई तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और SECL मानिकपुर प्रबंधन की होगी।