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कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप: 13 स्वर्ण समेत 35 पदक, भारत ने पहली बार जीती विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी
Thu, 13 Aug 2026 06:09 PM IST
मयंक त्रिपाठी
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Thu, 13 Aug 2026 06:09 PM IST
सार
भारत ने कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए पहली बार ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब जीता और विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी अपने नाम की। भारतीय दल ने अंडर-23 और सीनियर स्पर्धाओं में कुल 35 पदक जीते, जिसमें 13 स्वर्ण, आठ रजत और 14 कांस्य पदक शामिल रहे।
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कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप
- फोटो : IANS
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विस्तार
भारतीय तलवारबाजी दल ने कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप 2026 में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए पहली बार ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। भारत ने चार दिन तक चली प्रतियोगिता में अंडर-23 और सीनियर वर्ग को मिलाकर कुल 35 पदक जीते, जिसमें 13 स्वर्ण, 8 रजत और 14 कांस्य पदक शामिल रहे। इस शानदार प्रदर्शन के साथ भारत ने प्रतिष्ठित विल्किंसन स्वॉर्ड ट्रॉफी पर भी कब्जा जमाया। यह ट्रॉफी 1982 से कॉमनवेल्थ फेंसिंग फेडरेशन की ओर से उस देश को दी जाती है, जो प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ ओवरऑल प्रदर्शन करता है।
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सीनियर टीम स्पर्धाओं में भारत का दबदबा
भारतीय फेंसर्स ने सीनियर टीम स्पर्धाओं में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह में से पांच स्वर्ण पदक अपने नाम किए। भारत ने पुरुष साबरे, महिला साबरे, पुरुष एपी, महिला एपी और महिला फॉयल में स्वर्ण पदक जीते, जबकि पुरुष फॉयल में कड़े मुकाबले के बाद रजत पदक हासिल किया। टीम स्पर्धाओं में इस दबदबे के साथ भारत ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान पक्का किया और पहली बार कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप का ओवरऑल खिताब अपने नाम किया।
भारतीय फेंसर्स ने सीनियर टीम स्पर्धाओं में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए छह में से पांच स्वर्ण पदक अपने नाम किए। भारत ने पुरुष साबरे, महिला साबरे, पुरुष एपी, महिला एपी और महिला फॉयल में स्वर्ण पदक जीते, जबकि पुरुष फॉयल में कड़े मुकाबले के बाद रजत पदक हासिल किया। टीम स्पर्धाओं में इस दबदबे के साथ भारत ने पदक तालिका में शीर्ष स्थान पक्का किया और पहली बार कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप का ओवरऑल खिताब अपने नाम किया।
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पहले दिन ही 17 पदकों की बंपर शुरुआत
भारत के लिए अभियान की शुरुआत ही शानदार रही। प्रतियोगिता के पहले दिन अंडर-23 व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 17 पदक जीते, जिसमें चार स्वर्ण, चार रजत और नौ कांस्य पदक शामिल थे। पुरुष साबरे में भारत ने पोडियम पर क्लीन स्वीप किया। निखिल वाघ ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा जॉयस अशिता ने महिला फॉयल, प्राची लोहान ने महिला एपी और जेफरलिन ने महिला साबरे में स्वर्ण पदक जीता।
भारत के लिए अभियान की शुरुआत ही शानदार रही। प्रतियोगिता के पहले दिन अंडर-23 व्यक्तिगत स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 17 पदक जीते, जिसमें चार स्वर्ण, चार रजत और नौ कांस्य पदक शामिल थे। पुरुष साबरे में भारत ने पोडियम पर क्लीन स्वीप किया। निखिल वाघ ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके अलावा जॉयस अशिता ने महिला फॉयल, प्राची लोहान ने महिला एपी और जेफरलिन ने महिला साबरे में स्वर्ण पदक जीता।
दूसरे दिन सीनियर खिलाड़ियों ने दिखाया दम
दूसरे दिन भारतीय दल ने सीनियर व्यक्तिगत स्पर्धाओं में सात पदक हासिल किए। इसमें एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक शामिल रहे। महिला सीनियर एपी में तनिष्का खत्री और खुशी दाभाड़े ने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीतकर भारत का दबदबा कायम रखा।
दूसरे दिन भारतीय दल ने सीनियर व्यक्तिगत स्पर्धाओं में सात पदक हासिल किए। इसमें एक स्वर्ण, दो रजत और चार कांस्य पदक शामिल रहे। महिला सीनियर एपी में तनिष्का खत्री और खुशी दाभाड़े ने क्रमश: स्वर्ण और रजत पदक जीतकर भारत का दबदबा कायम रखा।
तीसरे दिन तीन स्वर्ण समेत पांच पदक
प्रतियोगिता के तीसरे दिन भी भारतीय फेंसर्स का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। भारत ने तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य सहित कुल पांच पदक जीते। सीनियर महिला फॉयल में कनागलक्ष्मी, सीनियर पुरुष एपी में राजेंद्रन शांतिमोल शेरजिन और सीनियर पुरुष साबरे में सिंह करण सिंह ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
प्रतियोगिता के तीसरे दिन भी भारतीय फेंसर्स का शानदार प्रदर्शन जारी रहा। भारत ने तीन स्वर्ण, एक रजत और एक कांस्य सहित कुल पांच पदक जीते। सीनियर महिला फॉयल में कनागलक्ष्मी, सीनियर पुरुष एपी में राजेंद्रन शांतिमोल शेरजिन और सीनियर पुरुष साबरे में सिंह करण सिंह ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
खिलाड़ियों के साथ सपोर्ट स्टाफ की भी अहम भूमिका
भारत की ऐतिहासिक सफलता में खिलाड़ियों के साथ कोच और सपोर्ट स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। कोच भारतजी ठाकोर, श्रीहरि पिसे और शंकर नारायणन ने खिलाड़ियों को रणनीतिक मार्गदर्शन दिया। फिजियोथेरेपिस्ट अमृता बालकवाड़े ने खिलाड़ियों की फिटनेस का ध्यान रखा, जबकि टीम मैनेजर मनु त्यागी ने पूरे अभियान के दौरान टीम प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।
भारत की ऐतिहासिक सफलता में खिलाड़ियों के साथ कोच और सपोर्ट स्टाफ का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। कोच भारतजी ठाकोर, श्रीहरि पिसे और शंकर नारायणन ने खिलाड़ियों को रणनीतिक मार्गदर्शन दिया। फिजियोथेरेपिस्ट अमृता बालकवाड़े ने खिलाड़ियों की फिटनेस का ध्यान रखा, जबकि टीम मैनेजर मनु त्यागी ने पूरे अभियान के दौरान टीम प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाली।
'भारतीय फेंसिंग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि'
फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव मेहता ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि वह पूरे भारतीय दल के प्रदर्शन से बेहद गौरवान्वित हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार कॉमनवेल्थ ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब जीतना भारतीय फेंसिंग में मौजूद प्रतिभा, अनुशासन और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि भारतीय फेंसर्स का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और बड़े वैश्विक चैंपियनशिप से पहले सकारात्मक मोमेंटम तैयार करेगी।
फेंसिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव राजीव मेहता ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि वह पूरे भारतीय दल के प्रदर्शन से बेहद गौरवान्वित हैं। उन्होंने कहा कि पहली बार कॉमनवेल्थ ओवरऑल चैंपियनशिप का खिताब जीतना भारतीय फेंसिंग में मौजूद प्रतिभा, अनुशासन और कड़ी मेहनत का प्रमाण है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह उपलब्धि भारतीय फेंसर्स का आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं और बड़े वैश्विक चैंपियनशिप से पहले सकारात्मक मोमेंटम तैयार करेगी।