{"_id":"69fdcd1dfe9046ed6f028061","slug":"kisan-sabha-protests-against-tribal-land-grab-attempts-administration-assures-investigation-camp-korba-news-c-1-1-noi1487-4255894-2026-05-08","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरबा में रैली से प्रदर्शन तक: आदिवासी किसानों की जमीन हड़पने की साजिश, डिप्टी कलेक्टर ने सुनी शिकायतें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरबा में रैली से प्रदर्शन तक: आदिवासी किसानों की जमीन हड़पने की साजिश, डिप्टी कलेक्टर ने सुनी शिकायतें
अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा
Published by: कोरबा ब्यूरो
Updated Fri, 08 May 2026 05:46 PM IST
विज्ञापन
सार
पुराने कागजात दिखाकर पैतृक कृषि भूमि पर कब्जा करने की कोशिश के खिलाफ छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में आदिवासी किसानों ने रैली निकाली। कलेक्टर कार्यालय में प्रदर्शन के दौरान डिप्टी कलेक्टर ने किसानों की शिकायतें सुनी। गांव में शिविर लगाकर जांच कराने का आश्वासन दिया।
छत्तीसगढ़ किसान सभा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
भैसमा तहसील के ग्राम पतरापाली में आदिवासी किसानों की जमीन को बेनामी खरीद के जरिए हड़पने की कोशिशों के खिलाफ ग्रामीणों ने शुक्रवार को जिलाधीश कार्यालय पर प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने इस प्रदर्शन का नेतृत्व किया। डिप्टी कलेक्टर टीआर भारद्वाज ने किसानों की समस्या सुनकर ज्ञापन लिया और गांव में शिविर लगाकर जांच कराने का आश्वासन दिया।
Trending Videos
ग्राम पतरापाली एक आदिवासी बहुल गांव है, जहां अधिकांश आदिवासी निरक्षर या कम पढ़े-लिखे हैं। भूमि कानूनों की जानकारी न होने का फायदा उठाकर प्रभावशाली लोग उनकी जमीन हड़पने का प्रयास कर रहे हैं। प्रदर्शन में शामिल ग्रामीणों ने बताया कि वे पीढ़ियों से अपनी पैतृक जमीन पर खेती कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
पिछले एक माह से शहरों के कुछ अज्ञात लोग गांव आकर उनकी कृषि भूमि को अपना बता रहे हैं। वे पंजीयन के कागजात दिखाकर जमीन छोड़ने का दबाव बना रहे हैं और बेदखली की धमकी दे रहे हैं। ग्रामीणों ने कहा कि वे इन लोगों को पहचानते तक नहीं। बाहरी लोग वर्ष 1990 में उनके पूर्वजों से जमीन खरीदने का दावा कर रहे हैं। मामला तब गंभीर हुआ जब एक गैर-आदिवासी ने सगे भाइयों मंगल सिंह और भूखन लाल को जमीन से बेदखल कर उस पर घेरा डालकर कब्जा कर लिया। इसके बाद सभी आदिवासी जबरन बेदखली की आशंका से डरे हुए हैं।
फर्जी सौदों का आरोप
किसान सभा के संयुक्त सचिव प्रशांत झा, जिला सचिव दीपक साहू और सीटू के राज्य महासचिव एस एन बनर्जी ने इस मामले पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 1999 में भी ऐसा ही एक प्रकरण सामने आया था। तब अनुविभागीय अधिकारी कोरबा ने पीड़ित आदिवासी के पक्ष में फैसला सुनाया था और गैर कानूनी अंतरण को रद्द किया था। नेताओं ने कहा कि सभी प्रकरणों में 40-50 साल पहले भूमि विक्रय का दावा किया जा रहा है, जबकि मूल भूस्वामी अब तक काबिज हैं।
प्रशासन की कार्रवाई
आदिवासी भूमि का गैर-आदिवासी को अंतरण अवैध है, इसलिए ये सभी बेनामी सौदे फर्जी हैं। प्रशासन ने शिकायतों की जांच के लिए गांव में शिविर लगाकर भूमि स्वामित्व का निराकरण करने का आश्वासन दिया है। किसान सभा और सीटू ने सकारात्मक कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने आशंका जताई कि पतरापाली के साथ आसपास के गांवों में भी ऐसे फर्जी सौदे हुए होंगे, इसलिए पूरे क्षेत्र में शिविर लगाकर सत्यापन जरूरी है।