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शिक्षा के मंदिर में हंगामा: प्राचार्य-व्याख्याता भिड़े, मारपीट के गवाह बने छात्र; कलेक्टर-DEO को जाएगी रिपोर्ट

अमर उजाला नेटवर्क, कोरबा Published by: कोरबा ब्यूरो Updated Wed, 17 Jun 2026 07:48 PM IST
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सार

कोरबा जिले के पाली स्थित एक विद्यालय में प्राचार्य मनोज सराफ और फिजिक्स व्याख्याता प्रखर पांडेय के बीच मारपीट हो गई। विवाद छात्रों की मौजूदगी में हुआ। एसडीएम के निर्देश पर जांच शुरू कर रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी जा रही है।

Pali school shamed on session's first day as principal, lecturer clashed
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विस्तार

शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पाली में नए शिक्षा सत्र के पहले दिन एक अप्रिय घटना हुई। प्राचार्य मनोज सराफ और भौतिकी व्याख्याता प्रखर पांडेय के बीच विवाद मारपीट तक पहुंच गया। इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी विद्यालय के छात्र-छात्राएं बने, जिससे पूरे शिक्षा विभाग पर सवाल उठे हैं।



सूत्रों के अनुसार, विद्यालय में प्रायोगिक सामग्री और भौतिकी रजिस्टर के कथित फर्जी संधारण को लेकर दोनों अधिकारियों के बीच कई महीनों से तनाव था। आरोप है कि रजिस्टर में कथित अनियमितताओं को वैध दर्शाने के लिए दबाव बनाया जा रहा था। व्याख्याता द्वारा इसका विरोध किए जाने पर विवाद लगातार गहराता गया। गर्मी की छुट्टियों के दौरान मामला शांत दिखाई दिया, लेकिन नए सत्र के पहले दिन यह दबा हुआ विवाद विस्फोट बनकर सामने आ गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि विद्यालय परिसर में पहले तीखी बहस हुई, फिर गाली-गलौज शुरू हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों के बीच धक्का-मुक्की तक नौबत आ गई। हालात इतने बिगड़ गए कि अन्य शिक्षकों को बीच-बचाव के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। कक्षाओं में मौजूद छात्र इस पूरे घटनाक्रम को देखकर स्तब्ध रह गए, जिससे अभिभावकों में भी आक्रोश है।
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प्रशासनिक कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। अनुविभागीय दंडाधिकारी पाली के निर्देश पर नायब तहसीलदार तत्काल स्कूल पहुंचे। उन्होंने मौके पर सभी संबंधित शिक्षकों और कर्मचारियों के बयान दर्ज किए। प्रारंभिक जांच प्रतिवेदन तैयार कर कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी को भेजा जा रहा है। जांच में फर्जी संधारण और खरीदी से जुड़े आरोपों की भी पड़ताल होगी। शिक्षा विभाग ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
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शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घटना शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। जब गुरुजन स्वयं अनुशासन और मर्यादा की सीमाएं लांघने लगें, तब विद्यार्थियों को आदर्श व्यवहार का पाठ कौन पढ़ाएगा। यदि फर्जी संधारण और खरीदी से जुड़े आरोपों में सच्चाई है, तो यह केवल दो व्यक्तियों का विवाद नहीं है। यह घटना विभाग की निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही की बड़ी परीक्षा बन गई है। सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और संभावित अनुशासनात्मक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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