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रायपुर में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बड़ा संदेश: बोले- आचार्य पद तप, त्याग और साधना की सर्वोच्च पहचान

अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 18 Jun 2026 02:18 PM IST
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सार

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज रायपुर की धरती आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो गई है। उन्होंने कहा कि जैन संतों का जीवन तपस्या, त्याग और आत्मसंयम का प्रतीक होता है।

Om Birla message in Raipur He said – Acharya post is the highest identity of penance, sacrifice and meditation
रायपुर में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला का बड़ा संदेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजधानी रायपुर के बूढ़ापारा इंडोर स्टेडियम में आयोजित तीन दिवसीय आचार्य पदारोहण महोत्सव में विनय कुशल मुनि को खरतरगच्छ परंपरा के नए आचार्य के रूप में प्रतिष्ठित किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक क्षण का महत्व इसलिए भी खास है क्योंकि करीब 71 वर्षों बाद इस परंपरा में किसी संत को आचार्य पद की गरिमा प्राप्त हो रही है। 


इस ऐतिहासिक समारोह में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह सहित कई जनप्रतिनिधियों और गणमान्य नागरिकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान जैन धर्म की तप, त्याग और संयम की परंपराओं पर भी विचार साझा किए गए।
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लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि आज रायपुर की धरती आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो गई है। उन्होंने कहा कि जैन संतों का जीवन तपस्या, त्याग और आत्मसंयम का प्रतीक होता है। विनय कुशल मुनि का आचार्य पद पर प्रतिष्ठित होना केवल एक पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण, साधना और आदर्श जीवन मूल्यों की स्वीकृति है।
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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य का अवसर बताते हुए कहा कि इतने बड़े संतों और महापुरुषों का प्रदेश में आगमन पूरे राज्य के लिए आशीर्वाद समान है। उन्होंने विराग मुनि के तप और साधना की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका सान्निध्य प्रदेशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मुख्यमंत्री ने हंसभद्र मुनि की विलक्षण स्मरण शक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि एक हजार प्रश्नों को क्रमवार याद रखकर उनका उत्तर देना असाधारण उपलब्धि है।

विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने कहा कि यह छत्तीसगढ़ के इतिहास का गौरवपूर्ण क्षण है। त्याग, तपस्या और आत्मज्ञान का जो उदाहरण जैन संत प्रस्तुत कर रहे हैं, वह आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करेगा। उन्होंने विराग मुनि की कठोर साधना का उल्लेख करते हुए कहा कि 169 दिनों तक केवल गर्म पानी के सहारे तप करना अद्भुत आत्मसंयम का परिचायक है।

महोत्सव का एक और आकर्षण हंसभद्र मुनि का सहस्त्रावधान प्रदर्शन रहा। उन्होंने एक हजार शब्दों को क्रमवार स्मरण कर अपनी विलक्षण प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जिसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया है। इस उपलब्धि ने समारोह की गरिमा को और बढ़ा दिया।

26 साधुओं और 16 साध्वियों की पावन निश्रा में चल रहा यह महोत्सव केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि तप, साधना, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना का उत्सव बन गया है। रायपुर की फिजा में इन दिनों श्रद्धा और उत्साह का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जिसे जैन समाज लंबे समय तक याद रखेगा।
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