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छत्तीसगढ़ की जेलों में डिजिटल कनेक्टिविटी: अब जेल में बंद कैदी परिजनों से कर सकेंगे वीडियो कॉल पर बात
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Tue, 31 Mar 2026 06:12 PM IST
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सार
जेल मुख्यालय और भारत संचार निगम लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत राज्य की सभी 33 जेलों में वीडियो और ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के जरिए कैदी अब अपने परिजनों और वकीलों से न केवल बात कर सकेंगे।
सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
छत्तीसगढ़ में जेल प्रशासन ने बंदियों के अधिकारों और उनके सामाजिक पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए एक अहम पहल शुरू की है। जेल मुख्यालय और भारत संचार निगम लिमिटेड के बीच हुए समझौते के तहत राज्य की सभी 33 जेलों में वीडियो और ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। इस नई व्यवस्था के जरिए कैदी अब अपने परिजनों और वकीलों से न केवल बात कर सकेंगे, बल्कि उन्हें देख भी पाएंगे।
यह पहल उप मुख्यमंत्री और जेल मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर शुरू की गई है। अभी तक प्रदेश की केवल 17 जेलों में ऑडियो कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन नई व्यवस्था के लागू होने के बाद यह सुविधा व्यापक स्तर पर बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि परिवार से दूरी के कारण बंदियों में मानसिक तनाव और अवसाद बढ़ता है, जिसे यह तकनीक काफी हद तक कम कर सकती है।
नई प्रणाली के तहत कैदियों को पहले से निर्धारित नंबरों पर ही कॉल करने की अनुमति होगी। ऑडियो कॉल के लिए एक रुपये प्रति मिनट और वीडियो कॉल के लिए पांच रुपये प्रति मिनट शुल्क तय किया गया है। प्रत्येक बंदी को सप्ताह में एक बार पांच मिनट के लिए इस सुविधा का उपयोग करने का मौका मिलेगा। जेल में काम करने वाले सजायाफ्ता कैदियों को मिलने वाला पारिश्रमिक उनके खातों में जमा होता है, जिससे वे इस सेवा का उपयोग कर सकेंगे।
इसी बीच, राज्य में सुधारात्मक न्याय की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 10 कैदियों को समय से पहले रिहा किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंजूरी के बाद राज्य दंडादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिश पर यह निर्णय लिया गया। इन कैदियों ने 14 साल से अधिक की सजा पूरी कर ली थी और उनके अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें रिहाई दी गई।
रायपुर, दुर्ग और अंबिकापुर की केंद्रीय जेलों से रिहा हुए इन बंदियों के लिए यह फैसला नई शुरुआत का अवसर माना जा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि इस तरह के कदम न केवल बंदियों के पुनर्वास में मददगार होते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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यह पहल उप मुख्यमंत्री और जेल मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर शुरू की गई है। अभी तक प्रदेश की केवल 17 जेलों में ऑडियो कॉलिंग की सुविधा उपलब्ध थी, लेकिन नई व्यवस्था के लागू होने के बाद यह सुविधा व्यापक स्तर पर बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि परिवार से दूरी के कारण बंदियों में मानसिक तनाव और अवसाद बढ़ता है, जिसे यह तकनीक काफी हद तक कम कर सकती है।
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नई प्रणाली के तहत कैदियों को पहले से निर्धारित नंबरों पर ही कॉल करने की अनुमति होगी। ऑडियो कॉल के लिए एक रुपये प्रति मिनट और वीडियो कॉल के लिए पांच रुपये प्रति मिनट शुल्क तय किया गया है। प्रत्येक बंदी को सप्ताह में एक बार पांच मिनट के लिए इस सुविधा का उपयोग करने का मौका मिलेगा। जेल में काम करने वाले सजायाफ्ता कैदियों को मिलने वाला पारिश्रमिक उनके खातों में जमा होता है, जिससे वे इस सेवा का उपयोग कर सकेंगे।
इसी बीच, राज्य में सुधारात्मक न्याय की दिशा में एक और कदम उठाते हुए 10 कैदियों को समय से पहले रिहा किया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंजूरी के बाद राज्य दंडादेश पुनर्विलोकन बोर्ड की सिफारिश पर यह निर्णय लिया गया। इन कैदियों ने 14 साल से अधिक की सजा पूरी कर ली थी और उनके अच्छे आचरण को देखते हुए उन्हें रिहाई दी गई।
रायपुर, दुर्ग और अंबिकापुर की केंद्रीय जेलों से रिहा हुए इन बंदियों के लिए यह फैसला नई शुरुआत का अवसर माना जा रहा है। जेल प्रशासन का कहना है कि इस तरह के कदम न केवल बंदियों के पुनर्वास में मददगार होते हैं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।