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स्मृति ईरानी करेंगी समीक्षा बैठकें: छत्तीसगढ़ की 36 हारी सीटों पर मंथन, मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन होगा
Sat, 24 Oct 2026 08:22 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 24 Oct 2026 08:22 PM IST
सार
भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी और सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू 25-26 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ में 12 समीक्षा बैठकें करेंगे। बैठकों में मंत्रियों के कामकाज, सरकारी योजनाओं और संगठन की स्थिति का मूल्यांकन होगा। वर्ष 2023 में हारी 36 विधानसभा सीटों पर चर्चा कर 2028 चुनाव के लिए बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की रणनीति बनाई जाएगी।
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स्मृति ईरानी दो दिन छत्तीसगढ़ में रहेंगी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारतीय जनता पार्टी की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी और सह-प्रभारी सिद्धार्थ शंभू अपने पहले छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान दो दिन में 12 महत्वपूर्ण समीक्षा बैठकें करेंगे। 25 और 26 अक्तूबर को होने वाली इन बैठकों में राज्य सरकार के मंत्रियों के कामकाज के मूल्यांकन के साथ संगठन के जमीनी फीडबैक पर चर्चा की जाएगी। इस प्रवास का मुख्य केंद्र वर्ष 2023 के चुनाव में हारी हुई 36 सीटों की समीक्षा करना रहेगा, ताकि वर्ष 2028 के चुनाव से पहले संगठन को निचले स्तर तक सशक्त बनाया जा सके।
प्रदेश प्रभारी इस दौरान सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगी। बैठकों के माध्यम से सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं और संगठन की धरातलीय स्थिति के मध्य तालमेल को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। वर्ष 2023 के राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 90 में से 54 सीटों पर सफलता प्राप्त कर सरकार बनाई थी, जबकि 36 सीटों पर पराजय मिली थी। इन सभी 36 निर्वाचन क्षेत्रों में पराजय के कारणों और सांगठनिक कमजोरियों की समीक्षा की जाएगी।
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प्रदेश प्रभारी इस दौरान सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और संगठन के पदाधिकारियों से चर्चा करेंगी। बैठकों के माध्यम से सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं और संगठन की धरातलीय स्थिति के मध्य तालमेल को बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। वर्ष 2023 के राज्य विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 90 में से 54 सीटों पर सफलता प्राप्त कर सरकार बनाई थी, जबकि 36 सीटों पर पराजय मिली थी। इन सभी 36 निर्वाचन क्षेत्रों में पराजय के कारणों और सांगठनिक कमजोरियों की समीक्षा की जाएगी।
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विभागीय कामकाज और लक्ष्यों की विस्तृत समीक्षा
बैठकों में मंत्रियों को अपने विभागों की उपलब्धियों और योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस समीक्षा में घोषित योजनाओं के धरातलीय प्रभाव और निर्धारित समय में लक्ष्यों की पूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिन विकास परियोजनाओं में विलंब हुआ है या कार्य लंबित पड़े हैं, उनके कारणों की पड़ताल की जाएगी।
इसके अतिरिक्त 'मोदी की गारंटी' के अंतर्गत आरंभ की गई योजनाओं की स्थिति, स्वीकृत व पूर्ण परियोजनाओं, आवंटित बजट के उपयोग और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच का ब्योरा मांगा जाएगा। जिन विभागीय योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उनके लिए नई समय सीमा तय की जाएगी। साथ ही जनशिकायतों, प्रशासनिक अड़चनों और लंबित मामलों पर भी बातचीत होगी।
बैठकों में मंत्रियों को अपने विभागों की उपलब्धियों और योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। इस समीक्षा में घोषित योजनाओं के धरातलीय प्रभाव और निर्धारित समय में लक्ष्यों की पूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। जिन विकास परियोजनाओं में विलंब हुआ है या कार्य लंबित पड़े हैं, उनके कारणों की पड़ताल की जाएगी।
इसके अतिरिक्त 'मोदी की गारंटी' के अंतर्गत आरंभ की गई योजनाओं की स्थिति, स्वीकृत व पूर्ण परियोजनाओं, आवंटित बजट के उपयोग और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच का ब्योरा मांगा जाएगा। जिन विभागीय योजनाओं में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है, उनके लिए नई समय सीमा तय की जाएगी। साथ ही जनशिकायतों, प्रशासनिक अड़चनों और लंबित मामलों पर भी बातचीत होगी।
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प्रभार वाले जिलों और जनसंपर्क का हिसाब
मंत्रियों की कार्यकुशलता का आकलन केवल विभागीय उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता का भी मूल्यांकन होगा। मंत्रियों से पूछा जाएगा कि वे अपने प्रभार वाले जिलों का नियमित प्रवास कर रहे हैं या नहीं और वहां प्रत्येक माह समीक्षा बैठकें बुलाई जा रही हैं या नहीं। कार्यकर्ताओं व आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण हेतु उठाए गए कदमों का विवरण भी लिया जाएगा।
जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर मंत्रियों के प्रस्तुतीकरण का सत्यापन किया जाएगा। यदि प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय या कार्यकर्ताओं की अनदेखी की शिकायतें सामने आती हैं, तो उन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही नेताओं की सोशल मीडिया सक्रियता और योजनाओं के प्रचार में उनकी भूमिका को भी देखा जाएगा।
मंत्रियों की कार्यकुशलता का आकलन केवल विभागीय उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रभार वाले जिलों में उनकी सक्रियता का भी मूल्यांकन होगा। मंत्रियों से पूछा जाएगा कि वे अपने प्रभार वाले जिलों का नियमित प्रवास कर रहे हैं या नहीं और वहां प्रत्येक माह समीक्षा बैठकें बुलाई जा रही हैं या नहीं। कार्यकर्ताओं व आम नागरिकों की शिकायतों के निवारण हेतु उठाए गए कदमों का विवरण भी लिया जाएगा।
जिलाध्यक्षों, जिला प्रभारियों, विधायकों और सांसदों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर मंत्रियों के प्रस्तुतीकरण का सत्यापन किया जाएगा। यदि प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय या कार्यकर्ताओं की अनदेखी की शिकायतें सामने आती हैं, तो उन पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। इसके साथ ही नेताओं की सोशल मीडिया सक्रियता और योजनाओं के प्रचार में उनकी भूमिका को भी देखा जाएगा।
हारी सीटों पर बूथ पुनर्गठन की ठोस रणनीति
वर्ष 2028 के चुनावी लक्ष्यों को ध्यान में रखकर पार्टी पराजित 36 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की योजना पर कार्य कर रही है। बैठकों के दौरान बूथ समितियों की कार्यप्रणाली और पन्ना प्रमुखों की भूमिका का विश्लेषण किया जाएगा। प्रत्येक हारी हुई सीट पर विफलता के कारक भिन्न थे, जिनमें कहीं स्थानीय मुद्दे, तो कहीं प्रत्याशी चयन या बूथ प्रबंधन की शिथिलता कारण रही।
प्रदेश प्रभारी इस समीक्षा के पश्चात बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों के पुनर्गठन के लिए स्पष्ट कार्ययोजना सौंपेंगी, जिसके तहत विशेष सदस्यों की नियुक्ति कर बूथों को सुदृढ़ किया जाएगा। हालांकि समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल या नई जिम्मेदारियों के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह दौरा संगठन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
वर्ष 2028 के चुनावी लक्ष्यों को ध्यान में रखकर पार्टी पराजित 36 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत करने की योजना पर कार्य कर रही है। बैठकों के दौरान बूथ समितियों की कार्यप्रणाली और पन्ना प्रमुखों की भूमिका का विश्लेषण किया जाएगा। प्रत्येक हारी हुई सीट पर विफलता के कारक भिन्न थे, जिनमें कहीं स्थानीय मुद्दे, तो कहीं प्रत्याशी चयन या बूथ प्रबंधन की शिथिलता कारण रही।
प्रदेश प्रभारी इस समीक्षा के पश्चात बूथ समितियों और पन्ना प्रमुखों के पुनर्गठन के लिए स्पष्ट कार्ययोजना सौंपेंगी, जिसके तहत विशेष सदस्यों की नियुक्ति कर बूथों को सुदृढ़ किया जाएगा। हालांकि समीक्षा के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल या नई जिम्मेदारियों के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन यह दौरा संगठन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।