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तंत्र क्रिया के आरोप पर छात्र को स्कूल से निकाला: बाल आयोग ने दिए पढ़ाई जारी रखने के निर्देश
Fri, 18 Sep 2026 05:40 PM IST
अमन कोशले
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
Published by: अमन कोशले
Updated Fri, 18 Sep 2026 05:40 PM IST
सार
प्रयास विद्यालय में 13 वर्षीय छात्र को तंत्र क्रिया के आरोपों के बाद टीसी देने के मामले में बाल आयोग ने संज्ञान लिया है। आयोग ने टीसी रद्द कर छात्र की पढ़ाई तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी रायपुर के प्रयास विद्यालय में तंत्र क्रिया के अमान्य आरोपों के आधार पर नौवीं कक्षा के 13 वर्षीय छात्र को टीसी देकर बाहर करने के मामले में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने कड़ा रुख अपनाया है। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जारी हस्तांतरण प्रमाणपत्र को निरस्त करने और छात्र की पढ़ाई तुरंत बहाल करने के निर्देश दिए हैं।
बाल आयोग ने दी सख्त हिदायत
बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13(1)(ज) और धारा 14 के तहत संज्ञान लेते हुए आयोग ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला होने तक छात्र की शिक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में आयोग ने प्रयास विद्यालय के प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आपातकालीन खंडपीठ के सामने सभी मूल दस्तावेज के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है। पीड़ित परिवार ने 3 सितंबर को दाखिला मिलने के मात्र 14 दिन भीतर छात्र को निकालने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री शिकायत सेल में भी गुहार लगाई है।
हॉस्टल प्रबंधन का पक्ष-असामान्य व्यवहार पर कराई काउंसलिंग
दूसरी तरफ छात्रावास प्रबंधन ने अपनी सफाई पेश की है। हॉस्टल अधीक्षक आशीष पांडेय के अनुसार छात्र की मानसिक स्थिति और असामान्य व्यवहार को देखते हुए काउंसलर से काउंसलिंग कराई गई थी। संस्था का दावा है कि छात्र कमरे के भीतर अंधेरे में अकेला बैठकर अजीब आकृतियां बनाता था, जिससे हॉस्टल के अन्य छात्र डर गए थे। प्रबंधन ने कुछ साथी छात्रों के हवाले से अश्लील बातें करने, गला दबाने का प्रयास करने, अकेले हंसने और अनुचित व्यवहार के आरोप भी गिनाए हैं।
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परिजनों के गंभीर आरोप- विद्यालय ने मनमाने ढंग से बाहर किया
छात्र के परिजनों ने स्कूल प्रशासन की सं कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन ने बिना किसी ठोस आधार और बिना समुचित जानकारी दिए तंत्र क्रिया के अपुष्ट आरोपों के तहत कार्रवाई की। उनका कहना है कि विद्यालय ने मनमाने ढंग से छात्र को संस्था से बाहर कर दिया, जबकि प्रबंधन का दावा है कि परिजनों ने स्वयं लिखित आवेदन देकर टीसी मांगी थी। आयोग ने निर्देश दिया है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने और अंतिम निर्णय होने तक छात्र की शिक्षा निर्बाध रूप से चलती रहेगी।
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बाल आयोग ने दी सख्त हिदायत
बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 13(1)(ज) और धारा 14 के तहत संज्ञान लेते हुए आयोग ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को निष्पक्ष जांच कर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम फैसला होने तक छात्र की शिक्षा किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इस संबंध में आयोग ने प्रयास विद्यालय के प्राचार्य और छात्रावास अधीक्षक को 21 सितंबर 2026 को दोपहर 2 बजे आपातकालीन खंडपीठ के सामने सभी मूल दस्तावेज के साथ उपस्थित होने का आदेश दिया है। पीड़ित परिवार ने 3 सितंबर को दाखिला मिलने के मात्र 14 दिन भीतर छात्र को निकालने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री शिकायत सेल में भी गुहार लगाई है।
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हॉस्टल प्रबंधन का पक्ष-असामान्य व्यवहार पर कराई काउंसलिंग
दूसरी तरफ छात्रावास प्रबंधन ने अपनी सफाई पेश की है। हॉस्टल अधीक्षक आशीष पांडेय के अनुसार छात्र की मानसिक स्थिति और असामान्य व्यवहार को देखते हुए काउंसलर से काउंसलिंग कराई गई थी। संस्था का दावा है कि छात्र कमरे के भीतर अंधेरे में अकेला बैठकर अजीब आकृतियां बनाता था, जिससे हॉस्टल के अन्य छात्र डर गए थे। प्रबंधन ने कुछ साथी छात्रों के हवाले से अश्लील बातें करने, गला दबाने का प्रयास करने, अकेले हंसने और अनुचित व्यवहार के आरोप भी गिनाए हैं।
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परिजनों के गंभीर आरोप- विद्यालय ने मनमाने ढंग से बाहर किया
छात्र के परिजनों ने स्कूल प्रशासन की सं कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिजनों का कहना है कि प्रबंधन ने बिना किसी ठोस आधार और बिना समुचित जानकारी दिए तंत्र क्रिया के अपुष्ट आरोपों के तहत कार्रवाई की। उनका कहना है कि विद्यालय ने मनमाने ढंग से छात्र को संस्था से बाहर कर दिया, जबकि प्रबंधन का दावा है कि परिजनों ने स्वयं लिखित आवेदन देकर टीसी मांगी थी। आयोग ने निर्देश दिया है कि विस्तृत जांच रिपोर्ट आने और अंतिम निर्णय होने तक छात्र की शिक्षा निर्बाध रूप से चलती रहेगी।