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दूसरा पहलू: एक पोटली में कश्मीर से कराची तक का भारत, तीर्थ पुरोहितों के पास दर्ज है इतिहास

प्रेम प्रताप सिंह प्रेम प्रताप सिंह
Updated Mon, 28 Sep 2026 09:12 AM IST
सार

उत्तर प्रदेश के कासगंज में सोरोंजी के तीर्थ पुरोहितों के पास एक पोटली है, जिसमें कश्मीर से कराची तक के भारत का इतिहास दर्ज है। कहा जाता है कि यहां किया गया पितृ तर्पण काशी व प्रयागराज जितना ही फलदायी है। यहां का गंगा जल इतना पवित्र व शुद्ध माना जाता है कि मुगल बादशाह अकबर आगरा प्रवास के दौरान सोरोंजी घाट से ही पानी मंगवाता था। 

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Indian History UP Kasganj from Kashmir to Karachi encapsulated in bundle preserved by pilgrim priests
यूपी में कासगंज के सोरोंजी का तीर्थ - फोटो : अमर उजाला प्रिंट-एजेंसी

विस्तार

कासगंज के सोरोंजी में तीर्थ पुरोहितों के पास पोटली है। कपड़े की उस पोटली को खोलिए, तो कश्मीर से कराची तक का भारत निकलता है। सैकड़ों साल पुरानी वंशबहियों में उन परिवारों का ब्योरा है, जो कभी कश्मीर से गंगा स्नान के लिए आते थे और उनका भी, जो पाकिस्तान में बसे कराची-लाहौर से आते थे। तब ये दोनों शहर भारत का ही हिस्सा थे। धीरे-धीरे कागज की उम्र और नमी इन बहियों को खा रही है। इनके साथ ही भारत का एक जीवंत ऐतिहासिक और सामाजिक दस्तावेज भी नष्ट हो रहा है।

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यह पोटली जिस तीर्थ की है, वह कोई सामान्य गंगा घाट या तीर्थ नहीं है, बल्कि भारत का प्राचीन और पौराणिक तीर्थ है। उत्तर प्रदेश के आगरा से 120 किलोमीटर दूर आगरा-बरेली मार्ग पर कासगंज जिले का यह प्राचीन तीर्थ सोरोंजी शूकरक्षेत्र है। पौराणिक साहित्य से लेकर संस्कृत, बौद्ध, हिंदी साहित्य और आइन-ए-अकबरी तक में इसका उल्लेख मिलता है। सोरोंजी को कलियुग का वराह क्षेत्र कहा गया है, जहां विष्णु जी के तीसरे अवतार श्रीवराह की पूजा होती है।
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उत्तर भारत में मृत्यु के पश्चात मृत आत्मा की शांति और अस्थि विसर्जन के लिए सोरोंजी को सर्वोपरि माना जाता है। मान्यता है कि यहां के पवित्र कुंड हरिपदी गंगा में अस्थियां विसर्जित करने से वे बहुत जल्दी विलीन हो जाती हैं और जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है। पितृ पक्ष के दौरान यहां हरि की पाैड़ी पर 16 दिनों तक विशेष तर्पण और पिंडदान किया जाता है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि यहां किया गया पितृ तर्पण, काशी और प्रयागराज जितना ही फलदायी है।
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सोरोंजी का गंगा जल इतना पवित्र व शुद्ध माना जाता था कि मुगल बादशाह अकबर आगरा प्रवास के दौरान सोरोंजी घाट से पानी मंगवाता था। आज भी सोरोंजी के वराह घाट और हरिपदी गंगा के तीर्थ पुरोहित समाज के पास अकबर की दी हुई शाही सनद, ताम्रपत्र और फरमान सुरक्षित हैं। जरूरत है कि सरकार सोरोंजी के बहुमूल्य धरोहरों के संरक्षण के साथ राजस्व अभिलेखों में सोरोंजी के नाम को पुनर्स्थापित करे।

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