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आई महंगाई: प्याज के दाम में अप्रत्याशित उछाल आर्थिक दबावों का संकेत, आने वाले दिनों में दायरा बढ़ सकता है

Tue, 25 Aug 2026 09:55 AM IST
न्यूज डेस्क अमर उजाला, नई दिल्ली।
अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: न्यूज डेस्क Updated Tue, 25 Aug 2026 09:55 AM IST
सार

अभी चीनी की बढ़ती कीमतों की कड़वाहट से आम उपभोक्ता जूझ ही रहे हैं कि अब प्याज के दाम में अप्रत्याशित उछाल आया है, जो उन आर्थिक दबावों का संकेत है, जिनकी आशंका पिछले काफी समय से जताई जा रही थी, और जो आने वाले दिनों में महंगाई का दायरा बढ़ा सकते हैं।

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Inflation Strikes Unexpected surge in onion prices signals economic pressures impact could wider
प्याज के दाम अचानक बढ़े। - फोटो : amar ujala

विस्तार

अभी चीनी की बढ़ती कीमतों की कड़वाहट से आम उपभोक्ता जूझ ही रहे हैं कि अब प्याज के दाम में अप्रत्याशित उछाल ने न सिर्फ रसोई का बजट बिगाड़ दिया है, बल्कि सरकार की चिंता भी बढ़ा दी है। दरअसल, पिछले एक महीने के भीतर प्याज की थोक कीमत में करीब 76 फीसदी की बढ़ोतरी उस व्यापक महंगाई की आहट है, जिसकी आशंका अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के मद्देनजर पिछले काफी समय से जताई जा रही थी। यह तेजी इसलिए भी चिंताजनक है, कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर आम आदमी की क्रयशक्ति और घरेलू बजट पर पड़ता है।

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प्याज की कीमतों में तेजी की प्रमुख वजह खरीफ फसल की बुआई में देरी, प्याज की कमजोर होती आवक और अगस्त-सितंबर में प्याज भंडार में कमी को बताया जा रहा है। यही नहीं, इस साल सरकार ने बफर के लिए दो लाख टन प्याज खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन जुलाई के अंत तक करीब 1.20 लाख टन ही खरीद हो सकी, क्योंकि बेहतर भाव न मिलने के कारण किसानों ने सरकारी खरीद में दिलचस्पी नहीं दिखाई। इसके अलावा,  कमजोर मानसून या बेमौसम बारिश से गन्ने, प्याज और दलहन की फसलों को नुकसान पहुंचा है।
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मांग के अनुपात में आपूर्ति की कमी को भांपते ही जमाखोर और मुनाफाखोर सक्रिय हो जाते हैं। ऐसे में, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को जरूरी खाद्य सामग्री की आपूर्ति में कमी का आकलन समय रहते करना चाहिए। भले ही सरकार कीमतों पर नियंत्रण के लिए बफर स्टॉक बाजार में उतारने वाली है, लेकिन वह भी कितना प्रभावी होगा, यह देखने वाली बात होगी, क्योंकि एक बार जब कीमतें बढ़ने लगती हैं, तो उन पर नियंत्रण करना आसान नहीं होता।
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अभी तो चीनी एवं प्याज के मूल्यों में ही तेजी आई है, आने वाले त्योहारी मौसम को देखते हुए हैरानी नहीं कि सब्जियों, अन्य खाद्य पदार्थों व खाद्य तेलों की कीमतें भी आसमान छूने लगें। लिहाजा सरकार को जमाखोरी पर प्रभावी कार्रवाई, बफर स्टॉक की बेहतर व्यवस्था और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति की सतत निगरानी के साथ जरूरत पड़ने पर निर्यात नियंत्रण जैसे कदम उठाने चाहिए। यह केवल चीनी और प्याज की समस्या नहीं है, बल्कि उन दबावों का संकेत है, जो आने वाले दिनों में खाद्य महंगाई को व्यापक बना सकते हैं।


लिहाजा सरकार के लिए यही समय सतर्क होने का है। महंगाई बढ़ने के बाद राहत देने से बेहतर है कि उसके कारणों की पहचान पहले की जाए और आपूर्ति तंत्र को इतना सक्षम बनाया जाए कि किसी भी घरेलू या वैश्विक झटके का बोझ सीधे आम आदमी की थाली पर न पड़े।

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