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Vikram Raju Dies: पूर्व अंपायर विक्रम राजू का निधन, 1986 के ऐतिहासिक टाई टेस्ट से जुड़ी थीं यादें
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू
Published by: मयंक त्रिपाठी
Updated Sun, 07 Jun 2026 10:36 PM IST
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सार
पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर वी. विक्रम राजू का रविवार को निधन हो गया। उन्होंने 92 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली।
क्रिकेट (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Adobestock
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विस्तार
भारत के पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट अंपायर वी. विक्रम राजू का रविवार को निधन हो गया। वह 92 वर्ष के थे। उनके निधन पर क्रिकेट जगत में शोक की लहर है। कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (केएससीए) ने एक बयान जारी कर उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। संघ ने कहा कि विक्रम राजू ने कई दशकों तक क्रिकेट की सेवा पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ की तथा अंपायर के रूप में खेल के सर्वोच्च स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
1986 के ऐतिहासिक टाई टेस्ट से मिली पहचान
विक्रम राजू का नाम सबसे अधिक वर्ष 1986 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट मैच के लिए याद किया जाता है। यह मुकाबला 18 से 22 सितंबर 1986 के बीच चेन्नई के एम चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया था। यह टेस्ट मैच क्रिकेट इतिहास का दूसरा टाई टेस्ट था। इससे पहले पहला टाई टेस्ट वर्ष 1960 में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच ब्रिस्बेन में खेला गया था।
विवादों में रहा था एक फैसला
मैच के अंतिम क्षणों में भारत को जीत के लिए एक रन की जरूरत थी। उस समय ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज की गेंद पर भारतीय बल्लेबाज मनिंदर सिंह को विक्रम राजू ने एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया था। इस फैसले के साथ ही भारत की दूसरी पारी 347 रन पर समाप्त हो गई और मैच टाई हो गया। उस मुकाबले में दूसरे ऑन-फील्ड अंपायर दारा दोतीवाला थे। हालांकि उस समय राजू के इस फैसले को लेकर काफी आलोचना भी हुई थी।
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अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेट में अहम योगदान
विक्रम राजू ने अपने करियर में दो टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की। पांच वनडे अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अंपायर की भूमिका निभाई। इसके अलावा 42 प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) मैचों में अंपायरिंग की। अंपायरिंग करियर समाप्त होने के बाद भी उन्होंने क्रिकेट से जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने मैच रेफरी के रूप में चार प्रथम श्रेणी मुकाबलों में जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक प्रीमियर लीग (केपीएल) में भी अपनी सेवाएं दीं।
केएससीए ने जताया शोक
केएससीए ने अपने शोक संदेश में कहा कि विक्रम राजू ने क्रिकेट को उत्कृष्ट सेवा दी और खेल की गरिमा को हमेशा बनाए रखा। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। क्रिकेट जगत ने एक अनुभवी अंपायर और खेल प्रशासक को खो दिया है, जिनका नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार टेस्ट मुकाबलों में से एक के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।
1986 के ऐतिहासिक टाई टेस्ट से मिली पहचान
विक्रम राजू का नाम सबसे अधिक वर्ष 1986 में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए ऐतिहासिक टेस्ट मैच के लिए याद किया जाता है। यह मुकाबला 18 से 22 सितंबर 1986 के बीच चेन्नई के एम चिदंबरम स्टेडियम में खेला गया था। यह टेस्ट मैच क्रिकेट इतिहास का दूसरा टाई टेस्ट था। इससे पहले पहला टाई टेस्ट वर्ष 1960 में ऑस्ट्रेलिया और वेस्टइंडीज के बीच ब्रिस्बेन में खेला गया था।
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विवादों में रहा था एक फैसला
मैच के अंतिम क्षणों में भारत को जीत के लिए एक रन की जरूरत थी। उस समय ऑस्ट्रेलिया के स्पिनर ग्रेग मैथ्यूज की गेंद पर भारतीय बल्लेबाज मनिंदर सिंह को विक्रम राजू ने एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया था। इस फैसले के साथ ही भारत की दूसरी पारी 347 रन पर समाप्त हो गई और मैच टाई हो गया। उस मुकाबले में दूसरे ऑन-फील्ड अंपायर दारा दोतीवाला थे। हालांकि उस समय राजू के इस फैसले को लेकर काफी आलोचना भी हुई थी।
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विक्रम राजू ने अपने करियर में दो टेस्ट मैचों में अंपायरिंग की। पांच वनडे अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में अंपायर की भूमिका निभाई। इसके अलावा 42 प्रथम श्रेणी (फर्स्ट क्लास) मैचों में अंपायरिंग की। अंपायरिंग करियर समाप्त होने के बाद भी उन्होंने क्रिकेट से जुड़ाव बनाए रखा। उन्होंने मैच रेफरी के रूप में चार प्रथम श्रेणी मुकाबलों में जिम्मेदारी निभाई। इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक प्रीमियर लीग (केपीएल) में भी अपनी सेवाएं दीं।
केएससीए ने जताया शोक
केएससीए ने अपने शोक संदेश में कहा कि विक्रम राजू ने क्रिकेट को उत्कृष्ट सेवा दी और खेल की गरिमा को हमेशा बनाए रखा। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। क्रिकेट जगत ने एक अनुभवी अंपायर और खेल प्रशासक को खो दिया है, जिनका नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे यादगार टेस्ट मुकाबलों में से एक के साथ हमेशा जुड़ा रहेगा।