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भारत से हार का दर्द नहीं गया!: पहले अपना गिरेबां झांके पाकिस्तान; खेल को राजनीति में घसीटकर दे रहा घटिया बयान
Mon, 14 Sep 2026 11:15 AM IST
स्वप्निल शशांक
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, दुबई
Published by: स्वप्निल शशांक
Updated Mon, 14 Sep 2026 11:15 AM IST
सार
भारत की महिला टीम ने श्रीलंका को हराकर आठवीं बार महिला एशिया कप जीता, लेकिन ट्रॉफी विवाद फिर सुर्खियों में है। भारतीय टीम ने पाकिस्तान के मंत्री और एसीसी प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया। इसके बाद पाकिस्तान के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने भारत पर खेल भावना खराब करने का आरोप लगाया, जिसे खेल में राजनीति घसीटने वाला बयान माना जा रहा है।
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नकवी और तलाल
- फोटो : Twitter
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विस्तार
भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने रविवार को श्रीलंका को हराकर महिला एशिया कप का खिताब रिकॉर्ड आठवीं बार अपने नाम किया, लेकिन मैदान पर भारत की इस बड़ी जीत के बाद पाकिस्तान में अलग ही तरह की बयानबाजी शुरू हो गई। एशिया कप की ट्रॉफी लेने से भारतीय टीम के इनकार के बाद पाकिस्तान के राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने भारत पर ही खेल भावना खराब करने का आरोप लगा दिया। उनका बयान सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि आखिर खेल को राजनीति से जोड़कर माहौल बिगाड़ने की कोशिश कौन कर रहा है?
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भारतीय महिला टीम
- फोटो : BCCI Women
भारत ने फिर दिखाई मैदान पर बादशाहत
हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से हराया। इसके साथ ही भारत ने महिला एशिया कप का अपना आठवां खिताब जीता। हालांकि, पुरस्कार समारोह के दौरान भारतीय टीम ने एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। नकवी पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री भी हैं। यह मामला पिछले साल के पुरुष एशिया कप के घटनाक्रम की याद दिलाता है। तब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने भी नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था। इस बार भी बीसीसीआई ने पहले ही अपना रुख साफ कर दिया था कि अगर नकवी ट्रॉफी सौंपेंगे तो भारतीय टीम समारोह में हिस्सा नहीं लेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ट्रॉफी एसीसी के उपाध्यक्ष खालिद अल जरूनी से लेने की पेशकश की थी, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद भारतीय टीम ने पुरस्कार समारोह से दूरी बनाए रखी।
हरमनप्रीत कौर की अगुआई वाली भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 72 रन से हराया। इसके साथ ही भारत ने महिला एशिया कप का अपना आठवां खिताब जीता। हालांकि, पुरस्कार समारोह के दौरान भारतीय टीम ने एशियाई क्रिकेट परिषद (ACC) प्रमुख मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया। नकवी पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री भी हैं। यह मामला पिछले साल के पुरुष एशिया कप के घटनाक्रम की याद दिलाता है। तब सूर्यकुमार यादव की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने भी नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया था। इस बार भी बीसीसीआई ने पहले ही अपना रुख साफ कर दिया था कि अगर नकवी ट्रॉफी सौंपेंगे तो भारतीय टीम समारोह में हिस्सा नहीं लेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने ट्रॉफी एसीसी के उपाध्यक्ष खालिद अल जरूनी से लेने की पेशकश की थी, लेकिन यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया। इसके बाद भारतीय टीम ने पुरस्कार समारोह से दूरी बनाए रखी।
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नकवी और टीम इंडिया
- फोटो : Twitter
नकवी अड़े रहे, 90 मिनट तक चला ट्रॉफी का इंतजार
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया कि नकवी को फाइनल से पहले ही भारतीय टीम के रुख की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला। रिपोर्ट के मुताबिक, वह ट्रॉफी खुद सौंपने के अपने रुख पर कायम रहे। इस वजह से मैच खत्म होने के बाद पुरस्कार समारोह में करीब 90 मिनट की देरी हुई। अंत में भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने के बजाय अपनी जीत का जश्न मनाया, जबकि श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू ने उपविजेता की पुरस्कार राशि और पदक हासिल किए। पाकिस्तानी मीडिया ने एसीसी के एक सूत्र के हवाले से कहा कि भारतीय टीम के लिए ट्रॉफी उपलब्ध है और पुरुष एशिया कप 2025 की ट्रॉफी भी लेने के लिए उपलब्ध है। सूत्र ने कहा कि एसीसी का रुख नहीं बदला है।
पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट में दावा किया गया कि नकवी को फाइनल से पहले ही भारतीय टीम के रुख की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला। रिपोर्ट के मुताबिक, वह ट्रॉफी खुद सौंपने के अपने रुख पर कायम रहे। इस वजह से मैच खत्म होने के बाद पुरस्कार समारोह में करीब 90 मिनट की देरी हुई। अंत में भारतीय टीम ने ट्रॉफी लेने के बजाय अपनी जीत का जश्न मनाया, जबकि श्रीलंका की कप्तान चमारी अटापट्टू ने उपविजेता की पुरस्कार राशि और पदक हासिल किए। पाकिस्तानी मीडिया ने एसीसी के एक सूत्र के हवाले से कहा कि भारतीय टीम के लिए ट्रॉफी उपलब्ध है और पुरुष एशिया कप 2025 की ट्रॉफी भी लेने के लिए उपलब्ध है। सूत्र ने कहा कि एसीसी का रुख नहीं बदला है।
तलाल चौधरी
- फोटो : Twitter
भारत को ही खेल भावना का पाठ पढ़ाने लगे पाकिस्तानी मंत्री
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने भारतीय टीम के ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले पर निशाना साधा। उन्होंने भारत पर 'खेल संस्कृति को बर्बाद करने' का आरोप लगाया। जियो न्यूज से बातचीत में चौधरी ने बड़बोलापन दिखाते हुए बेतुका बयान देते हुए कहा, 'कूटनीतिक हार और सैन्य हार को ट्रॉफी लेने से इनकार करने से मिटाया नहीं जा सकता।' उन्होंने आगे कहा, 'खेल भावना मायने रखती है। अगर आपके अंदर वह भावना नहीं है तो जीत या हार का कोई मतलब नहीं है।'
चौधरी ने भारत पर अपने देश में 'कट्टर राष्ट्रवाद' भरने का आरोप भी लगाया और कहा कि खेल दोनों देशों के बीच शांति और प्रेम का माध्यम रहा है। लेकिन सवाल यही है कि खेल के मंच पर राजनीतिक और सैन्य घटनाओं का जिक्र आखिर कौन कर रहा है? भारतीय टीम ने किसी राजनीतिक भाषण के जरिए अपनी जीत का जश्न नहीं मनाया। उसने सिर्फ उस व्यक्ति से ट्रॉफी लेने से इनकार किया, जो पाकिस्तान सरकार में मंत्री होने के साथ-साथ एसीसी के प्रमुख भी हैं।
ऐसे में भारतीय टीम के फैसले को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन उसके जवाब में सैन्य और कूटनीतिक हार का जिक्र करना खुद खेल को राजनीति में घसीटने जैसा नजर आता है। इस पूरी घटना के बाद भारतीय कोच अमोल मजूमदार ने भी कहा, 'यह फैसला बीसीसीआई ने लिया है और हम उसके साथ हैं। हमारे लिए यह टूर्नामेंट खत्म हो चुका है। हम चैंपियन हैं, हमारे लिए यही काफी है। हम एकजुट हैं। मुझे इस टीम के हर एक सदस्य पर गर्व है, जिसमें सहयोगी स्टाफ और सभी खिलाड़ी भी शामिल हैं।' ऐसे में कहीं भी राजनीति का जिक्र नहीं है। बीसीसीआई पीसीबी की तरह ही आईसीसी का सदस्य देश है। यही वजह है कि चौधरी का बयान खेल भावना की बात करने के बावजूद खुद राजनीतिक रंग लिए हुए दिखाई देता है।
विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ। पाकिस्तान के गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने भारतीय टीम के ट्रॉफी नहीं लेने के फैसले पर निशाना साधा। उन्होंने भारत पर 'खेल संस्कृति को बर्बाद करने' का आरोप लगाया। जियो न्यूज से बातचीत में चौधरी ने बड़बोलापन दिखाते हुए बेतुका बयान देते हुए कहा, 'कूटनीतिक हार और सैन्य हार को ट्रॉफी लेने से इनकार करने से मिटाया नहीं जा सकता।' उन्होंने आगे कहा, 'खेल भावना मायने रखती है। अगर आपके अंदर वह भावना नहीं है तो जीत या हार का कोई मतलब नहीं है।'
चौधरी ने भारत पर अपने देश में 'कट्टर राष्ट्रवाद' भरने का आरोप भी लगाया और कहा कि खेल दोनों देशों के बीच शांति और प्रेम का माध्यम रहा है। लेकिन सवाल यही है कि खेल के मंच पर राजनीतिक और सैन्य घटनाओं का जिक्र आखिर कौन कर रहा है? भारतीय टीम ने किसी राजनीतिक भाषण के जरिए अपनी जीत का जश्न नहीं मनाया। उसने सिर्फ उस व्यक्ति से ट्रॉफी लेने से इनकार किया, जो पाकिस्तान सरकार में मंत्री होने के साथ-साथ एसीसी के प्रमुख भी हैं।
ऐसे में भारतीय टीम के फैसले को लेकर असहमति हो सकती है, लेकिन उसके जवाब में सैन्य और कूटनीतिक हार का जिक्र करना खुद खेल को राजनीति में घसीटने जैसा नजर आता है। इस पूरी घटना के बाद भारतीय कोच अमोल मजूमदार ने भी कहा, 'यह फैसला बीसीसीआई ने लिया है और हम उसके साथ हैं। हमारे लिए यह टूर्नामेंट खत्म हो चुका है। हम चैंपियन हैं, हमारे लिए यही काफी है। हम एकजुट हैं। मुझे इस टीम के हर एक सदस्य पर गर्व है, जिसमें सहयोगी स्टाफ और सभी खिलाड़ी भी शामिल हैं।' ऐसे में कहीं भी राजनीति का जिक्र नहीं है। बीसीसीआई पीसीबी की तरह ही आईसीसी का सदस्य देश है। यही वजह है कि चौधरी का बयान खेल भावना की बात करने के बावजूद खुद राजनीतिक रंग लिए हुए दिखाई देता है।
भारत पाकिस्तान मुकाबला
- फोटो : IANS
2022 के बाद भारत के सामने पाकिस्तान का रिकॉर्ड भी देख ले
- खेल में राजनीति को लेकर सवाल उठाने से पहले पाकिस्तान को मैदान पर अपना रिकॉर्ड भी देखना चाहिए। हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान की भिड़ंत में भारतीय टीम का पलड़ा लगातार भारी रहा है।
- 2022 से दोनों देशों के बीच हुए कई अहम मुकाबलों में भारत ने पाकिस्तान को शिकस्त दी है। भारत ने इस दौरान बड़े टूर्नामेंटों में पाकिस्तान को हराने के साथ कई खिताब भी अपने नाम किए हैं।
- 2024 टी20 विश्व कप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी, 2025 एशिया कप, 2025 महिला वनडे विश्वकप, 2026 टी20 विश्वकप और अब 2026 महिला एशिया कप जैसी उपलब्धियां भारतीय क्रिकेट की मजबूती दिखाती हैं।
- यानी मैदान पर जवाब भारत लगातार अपने प्रदर्शन से दे रहा है। वहीं, इसके उलट पाकिस्तान 2023 वनडे विश्वकप, 2024 टी20 विश्वकप, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में पहले ही दौर से बाहर हो गया था।
- ऐसे में पाकिस्तान की ओर से खेल भावना पर सवाल उठाने के बजाय अपने क्रिकेट और अपने बयानों पर ध्यान देना ज्यादा बेहतर होता।
भारत बनाम पाकिस्तान
- फोटो : ACC
राजनीति से खेल को अलग रखने की बात, लेकिन बयान में राजनीति ही
दिलचस्प बात यह है कि चौधरी ने खुद कहा कि पाकिस्तान ने खेल को राजनीति का निशाना नहीं बनाया और वह विवादित मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन उसी बयान में भारत की कूटनीतिक और सेना का जिक्र करना उनके दावे को कमजोर करता है। आखिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करके खेल भावना की बात कैसे की जा सकती है?
भारत में 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ा था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारत ने इसके पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे और संगठनों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। भारत ने अपनी इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में पाकिस्तान में छुपे आतंकियों को मार गिराया गया। इसके बाद बौखलाए पाकिस्तान की ओर से भारत पर सैन्य कार्रवाई की कोशिशें हुईं, लेकिन भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलों को नाकाम किया था और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की थी।
दिलचस्प बात यह है कि चौधरी ने खुद कहा कि पाकिस्तान ने खेल को राजनीति का निशाना नहीं बनाया और वह विवादित मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन उसी बयान में भारत की कूटनीतिक और सेना का जिक्र करना उनके दावे को कमजोर करता है। आखिर भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की पृष्ठभूमि को नजरअंदाज करके खेल भावना की बात कैसे की जा सकती है?
भारत में 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ा था। इस हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारत ने इसके पीछे पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे और संगठनों को जिम्मेदार ठहराया था। इसके कुछ दिनों बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया था। भारत ने अपनी इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में पाकिस्तान में छुपे आतंकियों को मार गिराया गया। इसके बाद बौखलाए पाकिस्तान की ओर से भारत पर सैन्य कार्रवाई की कोशिशें हुईं, लेकिन भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हमलों को नाकाम किया था और अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की थी।
तलाल, भारतीय टीम और मोहसिन नकवी
- फोटो : Twitter
झूठी बयानबाजी से फंसे पाकिस्तान के मंत्री
ऐसे संवेदनशील घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान के एक मंत्री का भारत की 'कूटनीतिक और सेना' का जिक्र करना खेल भावना की बात से बिल्कुल मेल नहीं खाता। हर बार की तरह इस बार भी पाकिस्तान की झूठी बयानबाजी बेनकाब हो गई है। यदि खेल को राजनीति से अलग रखना ही उद्देश्य है तो फिर राजनीतिक और सैन्य घटनाओं को क्रिकेट के विवाद में लाने की जरूरत क्यों पड़ी? खेल में हार-जीत का फैसला मैदान पर होना चाहिए। भारत ने महिला एशिया कप के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करके खिताब जीता है। ट्रॉफी समारोह को लेकर दोनों पक्षों की अपनी-अपनी स्थिति हो सकती है, लेकिन उस विवाद को सैन्य और कूटनीतिक घटनाओं से जोड़ना निश्चित तौर पर माहौल को और राजनीतिक बनाता है।
भारत की टीम ने किसी राजनीतिक मंच से बयान नहीं दिया, बल्कि ट्रॉफी सौंपने की प्रक्रिया को लेकर अपना फैसला लिया। ऐसे में भारत पर ही 'खेल संस्कृति को बर्बाद करने' का आरोप लगाना न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि अनावश्यक रूप से विवाद को और भड़काने वाला बयान भी है। पाकिस्तान को खेल भावना की नसीहत देने से पहले अपने बयानों पर नजर डालनी चाहिए। मैदान पर भारत से मुकाबला हो तो जवाब बल्ले और गेंद से दिया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी से।
ऐसे संवेदनशील घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान के एक मंत्री का भारत की 'कूटनीतिक और सेना' का जिक्र करना खेल भावना की बात से बिल्कुल मेल नहीं खाता। हर बार की तरह इस बार भी पाकिस्तान की झूठी बयानबाजी बेनकाब हो गई है। यदि खेल को राजनीति से अलग रखना ही उद्देश्य है तो फिर राजनीतिक और सैन्य घटनाओं को क्रिकेट के विवाद में लाने की जरूरत क्यों पड़ी? खेल में हार-जीत का फैसला मैदान पर होना चाहिए। भारत ने महिला एशिया कप के फाइनल में शानदार प्रदर्शन करके खिताब जीता है। ट्रॉफी समारोह को लेकर दोनों पक्षों की अपनी-अपनी स्थिति हो सकती है, लेकिन उस विवाद को सैन्य और कूटनीतिक घटनाओं से जोड़ना निश्चित तौर पर माहौल को और राजनीतिक बनाता है।
भारत की टीम ने किसी राजनीतिक मंच से बयान नहीं दिया, बल्कि ट्रॉफी सौंपने की प्रक्रिया को लेकर अपना फैसला लिया। ऐसे में भारत पर ही 'खेल संस्कृति को बर्बाद करने' का आरोप लगाना न सिर्फ विरोधाभासी है, बल्कि अनावश्यक रूप से विवाद को और भड़काने वाला बयान भी है। पाकिस्तान को खेल भावना की नसीहत देने से पहले अपने बयानों पर नजर डालनी चाहिए। मैदान पर भारत से मुकाबला हो तो जवाब बल्ले और गेंद से दिया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक बयानबाजी से।