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कोहली ने क्यों बनवाए इतने टैटू?: हर तस्वीर के पीछे छिपा एक राज; स्याही का हर निशान बताता है विराट की अलग पहचान

Mon, 14 Sep 2026 06:21 AM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वप्निल शशांक Updated Mon, 14 Sep 2026 06:21 AM IST
सार

विराट कोहली के दोनों हाथों पर बने टैटू उनकी जिंदगी, विश्वास, परिवार और क्रिकेट करियर के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं। उनके साथ काम करने वाले टैटू कलाकारों के मुताबिक, कोहली डिजाइन की हर बारीकी में खुद शामिल रहते हैं। हार्दिक पांड्या, तिलक वर्मा, स्मृति मंधाना और अर्शदीप सिंह जैसे क्रिकेटर भी टैटू को अपनी पहचान का हिस्सा बना चुके हैं।

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Virat Kohli: The Stories Behind His Tattoos and How They Became Part of His Identity
विराट कोहली के टैटूज - फोटो : Instagram

विस्तार

क्रिकेट के मैदान पर विराट कोहली को याद करते ही सबसे पहले उनके शॉट्स, आक्रामक अंदाज, जोशीले जश्न और खेल के प्रति जुनून की तस्वीर सामने आती है। इसके बाद उनके रिकॉर्ड और रन याद आते हैं, लेकिन कोहली ने सिर्फ बल्लेबाजी से ही एक पूरी पीढ़ी को प्रभावित नहीं किया। उनकी दाढ़ी, हेयरस्टाइल, पहनावा और अंदाज भी युवाओं के बीच चर्चा का हिस्सा रहे हैं। इन सबके बीच उनके शरीर पर बने टैटू उनकी पहचान का एक ऐसा हिस्सा हैं, जो मैदान से बाहर कोहली के व्यक्तित्व की बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाते हैं।
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कोहली के दोनों हाथों पर कई टैटू हैं। पहली नजर में ये डिजाइन किसी रॉकस्टार की तरह बहुत ज्यादा शोर मचाने वाले नहीं लगते, लेकिन इनके पीछे की कहानियां काफी व्यक्तिगत हैं। कहीं परिवार है, कहीं आध्यात्मिकता, कहीं अनुशासन और कहीं जिंदगी को देखने का नजरिया। यही वजह है कि कोहली के लिए टैटू महज शरीर पर बना डिजाइन नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी की डायरी जैसा है।
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Virat Kohli: The Stories Behind His Tattoos and How They Became Part of His Identity
कोहली के टैटू - फोटो : Instagram
कोहली के टैटू में क्या-क्या छिपा है?
विराट कोहली के टैटू कलेक्शन को देखें तो इसमें कई अलग-अलग प्रतीक दिखाई देते हैं। इनमें प्रमुख हैं:
 
  • ऑल-सीइंग आई, जिसे कोहली ने इस सोच से जोड़ा है कि इंसान जो कुछ करता है, उसे कोई न कोई देख रहा है और उसके कर्मों का हिसाब रखा जा रहा है।
  • जापानी समुराई का टैटू, जिससे कोहली ताकत, वफादारी, आत्म-अनुशासन और नैतिक व्यवहार जैसे मूल्यों को जोड़ते हैं।
  • उनकी वनडे और टेस्ट कैप के नंबर।
  • उनके पिता और मां के नाम।
  • भगवान शिव का टैटू, जिसमें शिव को कैलाश पर्वत पर ध्यान करते हुए दिखाया गया है।
  • एक मठ की तस्वीर।
  • स्कॉर्पियो, ओम और ट्राइबल डिजाइन भी उनके शरीर पर मौजूद हैं।

इन सभी टैटू को एक साथ देखें तो कोहली की मैदान वाली आक्रामक छवि के पीछे एक शांत, आध्यात्मिक और आत्मचिंतन करने वाला पक्ष भी नजर आता है।

Virat Kohli: The Stories Behind His Tattoos and How They Became Part of His Identity
कोहली के टैटू - फोटो : Instagram
बाएं हाथ की स्लीव अभी भी पूरी क्यों नहीं हुई?
कोहली के टैटू की खास बात यह भी है कि उनका बायां हाथ अभी पूरी तरह 'पूरा' नहीं हुआ है। यह अधूरापन जानबूझकर रखा गया है। इसके पीछे एक दिलचस्प सोच है। कोहली की जिंदगी लगातार बदलती रही है। क्रिकेट करियर में नई उपलब्धियां आईं, निजी जिंदगी में बदलाव हुए और सोच भी समय के साथ विकसित हुई। ऐसे में उनका टैटू भी किसी एक दौर की स्थिर तस्वीर नहीं है। वह लगातार आगे बढ़ रही कहानी की तरह है।

उनके साथ काम करने वाले कलाकारों के मुताबिक, पिछले तीन साल से ज्यादा समय से कोहली के टैटू पर काम चल रहा है और अभी भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है। बाएं हाथ के डिजाइन का बड़ा हिस्सा पूरा हो चुका है, लेकिन दाहिने हिस्से पर अभी काम बाकी है। हाल में उनके टैटू कलेक्शन में एक और डिजाइन जुड़ा, जो पानी की सतह पर एक बूंद गिरने के बाद बनने वाली लहरों जैसा दिखाई देता है। यानी एक छोटी सी चीज का असर लगातार दूर तक फैलता जाता है।
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Virat Kohli: The Stories Behind His Tattoos and How They Became Part of His Identity
क्रिकेटर्स और उनके टैटू - फोटो : Twitter/Instagram
क्या कोहली खुद तय करते हैं कि शरीर पर क्या बनेगा?
कोहली के टैटू को खास बनाने वाली एक और बात यह है कि वह डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया में खुद बेहद सक्रिय रहते हैं। उनके साथ काम करने वाले टैटू आर्टिस्ट बताते हैं कि कोहली सिर्फ कलाकार के सामने बैठकर यह इंतजार नहीं करते कि कलाकार उनके लिए कुछ बना दे। वह हर चीज को समझना चाहते हैं। टैटू आर्टिस्ट के मुताबिक, कोहली टैटू डिजाइन की तकनीकी प्रक्रिया को भी समझने की कोशिश करते हैं। वह डिजाइन की प्रक्रिया में शुरुआत से अंत तक सक्रिय रूप से शामिल रहते हैं। वह यह समझने की कोशिश करते हैं कि टैटू बनाने की तकनीकी प्रक्रिया क्या है, हम जो कर रहे हैं वह क्यों कर रहे हैं और उसे किस तरह किया जाएगा। इतना ही नहीं, कोहली कलाकारों के फैसलों पर सवाल भी करते हैं। वह टैटू आर्टिस्ट के फैसलों को भी चुनौती देते हैं। वह पूछते हैं कि यह हिस्सा क्यों है, यह डिजाइन क्यों है और यह कोण क्यों रखा गया है। 

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कोहली के टैटू - फोटो : Instagram
क्या टैटूज में हैं कोहली की जिंदगी की कहानी?
एक बाहरी व्यक्ति के तौर पर, ये डिजाइन बहुत बोल्ड नहीं लगते और इनके तत्व शांत दिखाई देते हैं। लेकिन विराट के लिए ये सभी तत्व बोल्ड हैं, क्योंकि ये खुद उनका प्रतिबिंब हैं। उनका टैटू उनके भीतर की भावनाओं और एहसासों की अभिव्यक्ति है। यही उनकी खूबसूरती है। वह जीवन, अपने करियर और हर चीज के बारे में जो मानते हैं, जो महसूस करते हैं और उनकी जो सोच है, उनका डिजाइन उसी को दर्शाता है। कोहली टैटू की सुंदरता से ज्यादा उसके पीछे की कहानी को महत्व देते हैं।

किसी क्रिकेटर का टैटू बनाना कितना अलग होता है?
क्या किसी आम व्यक्ति और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के लिए टैटू बनाने की प्रक्रिया अलग होती है? इसका जवाब है, डिजाइन बनाने की मूल प्रक्रिया लगभग एक जैसी रहती है, लेकिन टैटू का टॉपिक अलग हो सकता है।  कोई अपने साथी का नाम चाहता है, कोई किसी उपलब्धि को याद रखना चाहता है, तो किसी के लिए कोई धार्मिक विश्वास महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इसके बाद कलाकार गहराई में जाकर उस विचार के पीछे की असली भावना तक पहुंचने की कोशिश करते हैं। यहीं से टैटू सिर्फ शरीर पर बनाया जाने वाला डिजाइन नहीं रह जाता। वह व्यक्ति के अनुभव का हिस्सा बनने लगता है।
 

 

 

 

 

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कोहली का टैटू - फोटो : Twitter/Instagram
मैच से पहले टैटू? खिलाड़ियों की रिकवरी कैसे होती है?
पेशेवर क्रिकेटरों के मामले में टैटू बनवाने के साथ एक और सवाल जुड़ा होता है- अगर कुछ दिन बाद मैच हो तो शरीर पर टैटू का असर क्या होगा? टैटू आर्टिस्ट के मुताबिक, कलाकार खिलाड़ियों को अपनी सलाह देते हैं, लेकिन विराट कोहली और हार्दिक पांड्या जैसे खिलाड़ी अपने शरीर और रिकवरी को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। ऐसा भी हुआ है कि विराट ने मैच से कुछ दिन पहले टैटू बनवाया और इसके बाद भी मैचों में अच्छा प्रदर्शन किया। हार्दिक के साथ भी कुछ ऐसा ही है। हालांकि, आम व्यक्ति के लिए इसे सीधे अपनाना सही नहीं माना जाना चाहिए। एक पेशेवर खिलाड़ी की ट्रेनिंग, खान-पान, चिकित्सकीय निगरानी और रिकवरी व्यवस्था आम व्यक्ति से अलग हो सकती है।

विराट ही नहीं, पूरी क्रिकेट पीढ़ी ने भी अपनाया यह अंदाज?
भारत में टैटू हमेशा से मौजूद रहे हैं, लेकिन लंबे समय तक इसे लेकर कई तरह की धारणाएं थीं। टैटू को विद्रोह, अलग तरह के व्यक्तित्व या सिर्फ फैशन से जोड़कर देखा जाता था। पुरानी पीढ़ी के कई बड़े क्रिकेटरों की सार्वजनिक पहचान में टैटू का हिस्सा बहुत कम दिखाई देता था। सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ जैसे खिलाड़ियों की छवि टैटू के बजाय उनके खेल और सादगी से जुड़ी रही। मौजूदा पीढ़ी में तस्वीर काफी अलग है। विराट कोहली, हार्दिक पांड्या और दूसरे खिलाड़ियों ने टैटू को अपनी व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बनाया है।

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हार्दिक के शरीर पर माहिका के नाम का टैटू

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हार्दिक और राहुल के टैटूज - फोटो : Twitter/Instagram
और कौन-कौन से भारतीय क्रिकेटर्स ने बनवाए टैटू?
टैटू अब सिर्फ विराट कोहली की पहचान नहीं हैं। भारतीय क्रिकेट के कई मौजूदा सितारों ने अपनी जिंदगी की अलग-अलग कहानियों को शरीर पर जगह दी है। हार्दिक पांड्या ने अपने रिश्ते से जुड़ी भावना को टैटू के जरिए याद किया है। तिलक वर्मा ने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था और माता-पिता के प्रति प्रेम को टैटू के जरिए जाहिर किया है। स्मृति मंधाना ने महिला विश्व कप जीत की याद को अपने दाहिने हाथ पर बने टैटू से जोड़ा। वहीं, अर्शदीप सिंह ने भी अपनी गर्लफ्रेंड समरीन कौर के साथ टैटू बनवाकर इस बढ़ती सूची में अपना नाम जोड़ा है। इसके अलावा केएल राहुल और शिखर धवन जैसे क्रिकेटर्स ने भी काफी टैटू बनवाए हैं। यानी भारतीय क्रिकेटरों के लिए टैटू अब केवल फैशन का हिस्सा नहीं रह गया है। यह निजी रिश्तों, उपलब्धियों, आस्था और जिंदगी के महत्वपूर्ण पलों को याद रखने का तरीका भी बनता जा रहा है।

आखिर खिलाड़ी बार-बार टैटू क्यों बनवाते हैं?
यही इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा है। अगर टैटू बनवाना सिर्फ फैशन है तो खिलाड़ी बार-बार इसके लिए क्यों लौटते हैं? टैटू को लेकर लोगों की सोच में बदलाव सिर्फ खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। टैटू कलाकारों के पेशे को लेकर नजरिया भी बदला है। टैटू सिर्फ स्टाइल और फैशन के बारे में नहीं हैं। यह भावनाओं का प्रतिबिंब है।
 

 

 

 

 

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मंधाना का टैटू - फोटो : Twitter/Instagram

तिलक वर्मा का टैटू

विराट के लिए टैटू अभी खत्म हुई कहानी नहीं?
शायद यही वजह है कि विराट कोहली का टैटू कलेक्शन आज भी बढ़ रहा है। उनके लिए यह किसी एक उपलब्धि की याद में बनवाया गया स्थिर चित्र नहीं है। यह उनकी जिंदगी के साथ आगे बढ़ता हुआ एक सफर है। एक माता-पिता की याद हो सकती है। कोई रिश्ता हो सकता है। बचपन की कोई भावना, कोई विश्वास, भगवान के प्रति आस्था, क्रिकेट की कोई उपलब्धि या जिंदगी का कोई बड़ा बदलाव, हर नया अध्याय शरीर पर जगह पा सकता है।

विराट ने कुछ साल पहले नेशनल जियोग्राफिक से बातचीत में टैटू और अपनी जिंदगी के रिश्ते को बेहद खास तरीके से समझाया था। उन्होंने कहा, 'मुझे यह समझने के लिए कहीं और देखने की जरूरत नहीं है कि मैं कहां था और अब कहां पहुंच गया हूं। मैं अपने दोनों हाथों को देखकर यह समझ सकता हूं।' विराट कोहली की क्रिकेट कहानी रन, रिकॉर्ड, शतक और ट्रॉफियों से लिखी गई है, लेकिन उनकी जिंदगी की एक दूसरी डायरी भी है, जिसे हर कोई मैदान के बाहर देख सकता है। वह डायरी उनके दोनों हाथों पर लिखी हुई है।
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