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Dehradun News: बिना सर्जन के तैनात किए निश्चेतक, अब वह भी छुट्टी पर
Sat, 31 Oct 2026 07:31 PM IST
देहरादून ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
संवाद न्यूज एजेंसी, देहरादून
Updated Sat, 31 Oct 2026 07:31 PM IST
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- विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में सीएचसी में नहीं हो पा रहे सिजेरियन प्रसव और बड़े ऑपरेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहसपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का हाल यह है कि अस्पताल में सर्जन के बिना ही निश्चेतक की तैनाती कर दी गई। सर्जन न होने के कारण निश्चेतक की तैनाती के बावजूद अस्पताल में ऑपरेशन शुरू नहीं हो सके। अब निश्चेतक भी आगे की पढ़ाई के लिए छुट्टी लेकर चले गए हैं। ऐसे में सिजेरियन प्रसव और ऑपरेशन की सुविधा के लिए गर्भवतियों व मरीजों को अब भी निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के करीब एक लाख लोग उपचार के लिए निर्भर हैं। अस्पताल राष्ट्रीय राजमार्ग और एक अन्य राजमार्ग से सटा होने के कारण यहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है। इसके बावजूद अस्पताल में लंबे समय से सर्जन और निश्चेतक की तैनाती नहीं थी। हाल में चिकित्सकों के तबादलों के बाद अस्पताल को निश्चेतक तो मिल गया, लेकिन सर्जन की तैनाती नहीं होने से यह व्यवस्था मरीजों के काम नहीं आ सकी।
इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। प्रसव के दौरान सिजेरियन की जरूरत होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। कई महिलाओं को मजबूरी में निजी अस्पतालों में प्रसव कराना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। सर्जन और निश्चेतक की उपलब्धता नहीं होने के कारण अस्पताल में बड़े ऑपरेशन के लिए ओटी भी विकसित नहीं की गई है।
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फिलहाल अस्पताल में सामान्य प्रसव की सुविधा ही उपलब्ध है। सर्जन न होने के कारण सिजेरियन और ऑपरेशन के मरीजों को रेफर किया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाता है। - डॉ. मोहन सिंह डोगरा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
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संवाद न्यूज एजेंसी
विकासनगर। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सहसपुर में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का हाल यह है कि अस्पताल में सर्जन के बिना ही निश्चेतक की तैनाती कर दी गई। सर्जन न होने के कारण निश्चेतक की तैनाती के बावजूद अस्पताल में ऑपरेशन शुरू नहीं हो सके। अब निश्चेतक भी आगे की पढ़ाई के लिए छुट्टी लेकर चले गए हैं। ऐसे में सिजेरियन प्रसव और ऑपरेशन की सुविधा के लिए गर्भवतियों व मरीजों को अब भी निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आसपास के करीब एक लाख लोग उपचार के लिए निर्भर हैं। अस्पताल राष्ट्रीय राजमार्ग और एक अन्य राजमार्ग से सटा होने के कारण यहां सड़क दुर्घटनाओं में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी अधिक रहती है। इसके बावजूद अस्पताल में लंबे समय से सर्जन और निश्चेतक की तैनाती नहीं थी। हाल में चिकित्सकों के तबादलों के बाद अस्पताल को निश्चेतक तो मिल गया, लेकिन सर्जन की तैनाती नहीं होने से यह व्यवस्था मरीजों के काम नहीं आ सकी।
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इसका सबसे अधिक असर गर्भवती महिलाओं पर पड़ रहा है। प्रसव के दौरान सिजेरियन की जरूरत होने पर उन्हें हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। कई महिलाओं को मजबूरी में निजी अस्पतालों में प्रसव कराना पड़ता है। इससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ता है। सर्जन और निश्चेतक की उपलब्धता नहीं होने के कारण अस्पताल में बड़े ऑपरेशन के लिए ओटी भी विकसित नहीं की गई है।
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फिलहाल अस्पताल में सामान्य प्रसव की सुविधा ही उपलब्ध है। सर्जन न होने के कारण सिजेरियन और ऑपरेशन के मरीजों को रेफर किया जाता है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती के लिए मुख्यालय को प्रस्ताव भेजा जाता है। - डॉ. मोहन सिंह डोगरा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक