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Chamoli: नंदा देवी क्षेत्र में जैव विविधता का अध्ययन कर लौटी टी, कहा-ग्लेशियरों पर दिखा ग्लोबल वार्मिंग का असर

Sun, 28 Jun 2026 09:32 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ (चमोली)
संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ (चमोली) Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 28 Jun 2026 09:32 PM IST
सार

वैज्ञानिकों का दल सात जून को ज्योतिर्मठ से रवाना हुआ। दल ने लाता खर्क, धरासी, डिब्रूगेटा, डियोड़ी, भिटारतोली, रामणी, भुजगढ़, पातालखान होते हुए नंदा देवी के बेसकैंप सरसोपाताल तक अत्यंत दुर्गम स्थलों पर जैव विविधता की स्थिति का आकलन किया।

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Biodiversity study in Nanda Devi region  Effect of global warming on glaciers seen good herbal resources found
नंदा देवी क्षेत्र में जैव विविधता का अध्ययन करने गई टीम लौटी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

नंदा देवी क्षेत्र में जैव विविधता का अध्ययन करने गया वैज्ञानिकों व विशेषज्ञों का दल लौट आया है। अलग-अलग विषयों पर किए गए अध्ययन की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि क्षेत्र में कुछ अच्छे तो कुछ चिंताजनक संकेत मिले हैं। खासकर वहां ग्लेशियरों के टूटने और उन पर ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखा है।

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वैज्ञानिकों का दल सात जून को ज्योतिर्मठ से रवाना हुआ। दल ने लाता खर्क, धरासी, डिब्रूगेटा, डियोड़ी, भिटारतोली, रामणी, भुजगढ़, पातालखान होते हुए नंदा देवी के बेसकैंप सरसोपाताल तक अत्यंत दुर्गम स्थलों पर जैव विविधता की स्थिति का आकलन किया। दल अध्ययन कर ज्योतिर्मठ लौट आया है। वैज्ञानिकों ने बताया कि नंदा देवी के अंतर्गत कई ग्लेशियर हैं, कई एवलांच ट्रैक हैं। ग्लेशियर टूटने से मोरेन फट रहे हैं। जियोलॉजी की टीम ने सैंपल लिए हैं, जिससे अध्ययन किया जाएगा कि यह कब से टूट रहे हैं।
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वैज्ञानिक दल के लीडर व पूर्व निदेशक भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून प्रो. जीएस रावत ने बताया कि कुछ जगह पर दुर्लभ प्रजाति जैसे कस्तूरी और सेरो पिछली बार के मुकाबले इस बार अधिक ऊंचाई तक मिले हैं। कई जगह पर पार्क की सीमा के बाहर भी निशान मिले हैं। दुर्लभ जड़ी बूटी जैसे कुटकी, अतीस, सालम आदि की अच्छी प्राकृतिक पैदावार मिली है। कूट के पौधे जिस जगह पर पिछली बार 16 रिपोर्ट किए गए थे वहां भूस्खलन से सिर्फ दो पौधे ही मिले हैं।

टीम में हर विषय के विशेषज्ञ शामिल रहे, जिन्होंने उसी के अनुसार अध्ययन कर आंकड़े एकत्रित किए हैं। इन आंकड़ों का पुरानी रिपोर्ट से तुलना करेंगे, तभी विस्तार से पता चल पाएगा कि वास्तविक स्थिति में किस तरह का बदलाव आया है। यह अभियान नंदादेवी राष्ट्रीय पार्क के उपवन संरक्षक अभिमन्यु के निर्देश में संपन्न किया गया।

इन विषयों पर किया अध्ययन

- उच्च हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली वनस्पतियों व संकटग्रस्त प्रजातियों का।
- वृक्षरेखा व हिमरेखा के मध्य मिलने वाले बुग्यालों का, वन्यजीवों के व्यवहार व संख्या का अध्ययन।
- पक्षियों, कीट पतंगों, ग्लेशियरों का अध्ययन किया गया।

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