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Dehradun News: मोबाइल एप से मुआवजा वितरण की होगी ट्रैकिंग
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- मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं के विश्लेषण में भी मिलेगी मदद
- राजाजी टाइगर रिजर्व, नरेंद्र नगर और रामनगर वन प्रभाग में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत ट्रायल होगा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। वन महकमे के मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने का काम आने वाले समय में मोबाइल एप के माध्यम से होगा। इसको लेकर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने एक मोबाइल एप्लिकेशन (ई-वन राहत) को विकसित किया है। इससे मानव- वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रियल टाइम ट्रैकिंग भी हो सकेगी।
वन महकमा वन्यजीव हमले में मानव मृत्यु, घायल के अलावा फसल, पशु और भवन क्षति का मुआवजा देता है। अभी यह कार्य मैनुअल होता है। इसमें कई बार और जरूरी कागजात आदि के पूरा न होने या कोई त्रुटि होने पर मुआवजे में देरी भी हो जाती है। ऐसे में मुआवजा वितरण को सुगम को तकनीक के उपयोग का फैसला किया गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे कहते हैं कि इसे लेकर चीला रेंज में एक कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है। इस एप में मुआवजा से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। इससे तकनीकी कमी की समस्या दूर हो सकेगी। साथ ही किस अधिकारी या स्तर पर प्रक्रिया है? उसका भी पता रहेगा। एप से किस क्षेत्र में किस वन्यजीव के हमले हो रहे हैं, उसका भी रिकार्ड रियल टाइम रहेगा। इससे घटनाओं को और बेहतर ढंग से समझने और प्रबंधन में मदद मिल सकेगी।
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तीन जगह पर पायलेट प्रोजेक्ट के तहत होगा कार्य
देहरादून। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ आईपी बोपन्ना ने बताया कि इस एप को पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर राजाजी टाइगर रिजर्व, नरेंद्र नगर और रामनगर वन प्रभाग में ट्रायल किया जाएगा। इससे मुआवजा वितरण को सुगम, त्वरित बनाने में मदद मिलेगी साथ ही निगरानी भी हो सकेगी। प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा कहते हैं कि यह एप डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने विकसित किया है। इससे काफी मदद मिलेगी।
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- राजाजी टाइगर रिजर्व, नरेंद्र नगर और रामनगर वन प्रभाग में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत ट्रायल होगा
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। वन महकमे के मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को तेज और सुगम बनाने का काम आने वाले समय में मोबाइल एप के माध्यम से होगा। इसको लेकर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने एक मोबाइल एप्लिकेशन (ई-वन राहत) को विकसित किया है। इससे मानव- वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं की रियल टाइम ट्रैकिंग भी हो सकेगी।
वन महकमा वन्यजीव हमले में मानव मृत्यु, घायल के अलावा फसल, पशु और भवन क्षति का मुआवजा देता है। अभी यह कार्य मैनुअल होता है। इसमें कई बार और जरूरी कागजात आदि के पूरा न होने या कोई त्रुटि होने पर मुआवजे में देरी भी हो जाती है। ऐसे में मुआवजा वितरण को सुगम को तकनीक के उपयोग का फैसला किया गया है। राजाजी टाइगर रिजर्व के निदेशक कोको रोसे कहते हैं कि इसे लेकर चीला रेंज में एक कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है। इस एप में मुआवजा से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया हो सकेगी। इससे तकनीकी कमी की समस्या दूर हो सकेगी। साथ ही किस अधिकारी या स्तर पर प्रक्रिया है? उसका भी पता रहेगा। एप से किस क्षेत्र में किस वन्यजीव के हमले हो रहे हैं, उसका भी रिकार्ड रियल टाइम रहेगा। इससे घटनाओं को और बेहतर ढंग से समझने और प्रबंधन में मदद मिल सकेगी।
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तीन जगह पर पायलेट प्रोजेक्ट के तहत होगा कार्य
देहरादून। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ आईपी बोपन्ना ने बताया कि इस एप को पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर राजाजी टाइगर रिजर्व, नरेंद्र नगर और रामनगर वन प्रभाग में ट्रायल किया जाएगा। इससे मुआवजा वितरण को सुगम, त्वरित बनाने में मदद मिलेगी साथ ही निगरानी भी हो सकेगी। प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा कहते हैं कि यह एप डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ने विकसित किया है। इससे काफी मदद मिलेगी।