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देहरादून: पीएमकेएसवाई में कथित फर्जीवाड़े की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश; संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी को सौंपी जांच
Wed, 09 Sep 2026 02:47 PM IST
Alka Tyagi
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
Published by: Alka Tyagi
Updated Wed, 09 Sep 2026 02:47 PM IST
सार
आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन की जब थर्ड पार्टी सत्यापन किया गया तो इसमें कई तरह की अनियमितताएं मिली हैं। योजना का लाभ वास्तविक किसानों को मिला या नहीं इसकी पुष्टि करने वाले दस्तावेज और भौतिक सत्यापन पर्याप्त नहीं मिले हैं।
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जांच के आदेश
- फोटो : freepik.com(प्रतीकात्मक)
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विस्तार
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) की माइक्रो इरिगेशन में कथित फर्जीवाड़े मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए गए हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद इस मामले की जांच करेंगे। आरोप है कि इस योजना के क्रियान्वयन में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। पात्र किसानों का सत्यापन भी नहीं किया गया है। इसके अलावा भुगतान संबंधी भी बहुत सी गड़बड़ियां सीए ऑडिट व ऑडिट में सामने आने का दावा किया गया है।
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संयुक्त मजिस्ट्रेट ने इस मामले में कृषि विभाग और उद्यान विभाग के अफसरों को 11 सितंबर को मय दस्तावेज अपने कार्यालय में तलब किया है। इस मामले में अधिवक्ता विकेश नेगी ने गत 27 जुलाई को जिलाधिकारी को शिकायत की थी। आरोप है कि योजना के क्रियान्वयन की जब थर्ड पार्टी सत्यापन किया गया तो इसमें कई तरह की अनियमितताएं मिली हैं। योजना का लाभ वास्तविक किसानों को मिला या नहीं इसकी पुष्टि करने वाले दस्तावेज और भौतिक सत्यापन पर्याप्त नहीं मिले हैं। कई लाभार्थियों का गलत तरीके से सत्यापन किया गया है और कुछ का सत्यापन ही अधूरा है। कई मामलों में लाभार्थियों के आवेदन पत्र, भूमि संबंधी रिकॉर्ड, पहचान पत्र, फोटो और अन्य आवश्यक दस्तावेजों में कमी और असंगति पाई गई।
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कुछ मामलों में आवेदन पत्र के साथ लगे फोटो और अधिकारियों द्वारा मौके पर लिए गए फोटो में समानता नहीं पाई गई। आरोप यह भी हैं कि किसानों के खेतों पर स्थापित सिंचाई उपकरणों की जियो-टैगिंग कई मामलों में नहीं की गई, जबकि इसे योजना के तहत आवश्यक बताया गया है। कथित तौर पर कई जगह लाभार्थियों के खेतों में लगाई गई सामग्री/उपकरण का मेक, मॉडल या ब्रांड संबंधी पूरा रिकॉर्ड नहीं मिला। परिवहन के लिए ई-वे बिल और अन्य दस्तावेज भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं बताए गए। सामग्री की ढुलाई के दौरान किए गए वजन की रसीदें दस्तावेजों से संलग्न नहीं मिलीं, जिससे सामग्री की वास्तविक मात्रा की पुष्टि करना कठिन बताया गया।
शासनादेश की अवहेलना का भी आरोप
आरोप यह भी हैं कि कुछ मामलों में सक्षम अधिकारियों की अनुमति और निर्धारित प्रक्रिया के बिना कार्य एवं भुगतान संबंधी कार्रवाई हुई। इस मामले में शासनादेश की अवहेलना की गई है। शिकायत में यह भी आरोप हैं कि अधिकारियों को खेत का निरीक्षण, स्थापित उपकरणों का सत्यापन, लाभार्थी के साथ फोटो, निरीक्षण रिपोर्ट, स्थान और उपकरणों का रिकॉर्ड तैयार करना था। जब इस मामले में ऑडिट हुआ तो ऐसे मामले भी सामने आए जिनमें निरीक्षण अधिकारी का नाम एक ही था। सत्यापन या निरीक्षण की तिथियों और रिकॉर्ड में विसंगतियां थीं। कुछ मामलों में संपत्ति की स्थापना से पहले की तारीख फोटो होने जैसी गंभीर विसंगतियां भी मिली हैं।