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Dehradun News: शासन में वार्ता रही विफल, हड़ताल पर गए डिप्लोमा इंजीनियर्स
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- डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ 27 सूत्री मांगों के लिए नौ मार्च से आंदोलनरत
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। वेतन विसंगति दूर करने सहित 27 सूत्री मांगों के लिए आंदोलनरत उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की सोमवार को शासन में हुई वार्ता विफल रही। जिसके बाद महासंघ से जुड़े प्रदेश भर के अभियंता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
लंबित मांगों पर अमल न होने से नाराज उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने आंदोलन के पहले चरण में नौ से 20 मार्च तक लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में प्रदर्शन कर धरना दिया। महासंघ के प्रांतीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसाई के मुताबिक धरने के बावजूद शासन की ओर से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। आंदोलन के दूसरे चरण से पहले महासंघ की सोमवार को प्रमुख सचिव आरके सुधांशु के साथ वार्ता हुई। वार्ता में डिप्लोमा इंजीनियर्स की ओर से सभी 27 सूत्री मांगों पर अमल की मांग की गई। वहीं, प्रमुख सचिव की ओर से कहा गया कि आंदोलन को 15 दिन के लिए स्थगित किया जाए। महासंघ के प्रांतीय महासचिव के मुताबिक शासन में हुई वार्ता बेनतीजा रही। यही वजह रही कि आंदोलन के दूसरे चरण में प्रदेश भर के महासंघ से जुड़े डिप्लोमा इंजीनियर्स हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के पहले दिन महासंघ ने लोनिवि प्रमुख अभियंता कार्यालय में धरना दिया। धरना देने वालों में प्रांतीय अध्यक्ष आरसी शर्मा, छब्बील दास सैनी, चितरंजन जोशी, अनिल पंवार, मुकेश रमोला, शांतनु शर्मा, अरविंद प्रताप, बीसी जोशी, राजेंद्र सिंह रावत, दीपक बहुगुणा, आशीष यादव, मुकेश रतूड़ी, सुरेंद्र श्रीकोटी, पूजा श्रेष्ठ, सरीन कुमार, अमर सिंह, विवेक पुरोहित, दीपचंद्र नवानी, मुकेश डिमरी, मुकेश कोहली, शरद टम्टा, होशियार सिंह, पंकज बडोनी आदि शामिल रहे।
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डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की कुछ प्रमुख मांगे
-10, 16 और 26 साल की सेवा के बाद एसीपी का लाभ दिया जाए
-2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को प्रथम एसीपी के रूप में 5400 ग्रेड पे
-पेयजल निगम और जल संस्थान का एकीकरण कर राजकीयकरण किया जाए
-बाहरी कार्यदायी संस्थाओं के लिए प्रदेश में निर्माण कार्य आवंटन पर रोक लगे
-पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। वेतन विसंगति दूर करने सहित 27 सूत्री मांगों के लिए आंदोलनरत उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की सोमवार को शासन में हुई वार्ता विफल रही। जिसके बाद महासंघ से जुड़े प्रदेश भर के अभियंता अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए।
लंबित मांगों पर अमल न होने से नाराज उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ ने आंदोलन के पहले चरण में नौ से 20 मार्च तक लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय में प्रदर्शन कर धरना दिया। महासंघ के प्रांतीय महामंत्री वीरेंद्र सिंह गुसाई के मुताबिक धरने के बावजूद शासन की ओर से उनकी मांगों की अनदेखी की जा रही है। आंदोलन के दूसरे चरण से पहले महासंघ की सोमवार को प्रमुख सचिव आरके सुधांशु के साथ वार्ता हुई। वार्ता में डिप्लोमा इंजीनियर्स की ओर से सभी 27 सूत्री मांगों पर अमल की मांग की गई। वहीं, प्रमुख सचिव की ओर से कहा गया कि आंदोलन को 15 दिन के लिए स्थगित किया जाए। महासंघ के प्रांतीय महासचिव के मुताबिक शासन में हुई वार्ता बेनतीजा रही। यही वजह रही कि आंदोलन के दूसरे चरण में प्रदेश भर के महासंघ से जुड़े डिप्लोमा इंजीनियर्स हड़ताल पर चले गए। हड़ताल के पहले दिन महासंघ ने लोनिवि प्रमुख अभियंता कार्यालय में धरना दिया। धरना देने वालों में प्रांतीय अध्यक्ष आरसी शर्मा, छब्बील दास सैनी, चितरंजन जोशी, अनिल पंवार, मुकेश रमोला, शांतनु शर्मा, अरविंद प्रताप, बीसी जोशी, राजेंद्र सिंह रावत, दीपक बहुगुणा, आशीष यादव, मुकेश रतूड़ी, सुरेंद्र श्रीकोटी, पूजा श्रेष्ठ, सरीन कुमार, अमर सिंह, विवेक पुरोहित, दीपचंद्र नवानी, मुकेश डिमरी, मुकेश कोहली, शरद टम्टा, होशियार सिंह, पंकज बडोनी आदि शामिल रहे।
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डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ की कुछ प्रमुख मांगे
-10, 16 और 26 साल की सेवा के बाद एसीपी का लाभ दिया जाए
-2014 के बाद नियुक्त कनिष्ठ अभियंताओं को प्रथम एसीपी के रूप में 5400 ग्रेड पे
-पेयजल निगम और जल संस्थान का एकीकरण कर राजकीयकरण किया जाए
-बाहरी कार्यदायी संस्थाओं के लिए प्रदेश में निर्माण कार्य आवंटन पर रोक लगे
-पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए