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प्रदेश में सूखे की स्थिति, शासन स्तर पर चर्चा तक नहीं : हरीश रावत
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- सूखे से कृषि व बागवानी फसलों पर पड़ रहा है
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा, प्रदेश में बारिश व बर्फबारी न होने से सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए शासन में उच्च स्तर पर चर्चा तक नहीं हो रही है।
पूर्व सीएम रावत ने कहा, लंबे समय से प्रदेश में बारिश नहीं हो रही है। पहाड़ों पर दूर तक बर्फ नजर नहीं आ रही है। सूखे से कृषि व बागवानी फसलों को असर पड़ रहा है। वहीं पर्यटन व्यवसाय को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जलस्रोत भी बारिश व बर्फ के अभाव में कमजोर पड़ते जाएंगे।
उन्होंने कहा, सरकार की ओर से लगातार चिंतनीय होती जा रही स्थिति का सामना करने व सूखे के असर पर काम करने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। अभी तक इसका सामना करने की रणनीति बनाने के लिए कोई उच्च स्तरीय विचार विमर्श नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गैर सिंचित क्षेत्रों में गेहूं व अन्य सब्जी फसलें खराब हो रही हैं। इस समय सेब व अन्य अन्य बागवानी फसलों के बर्फबारी बहुत ही जरूरी है। लेकिन बर्फ न पड़ने से बागवानों को सेब व फलों के उत्पादन की चिंता सता रही है।
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अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा, प्रदेश में बारिश व बर्फबारी न होने से सूखे की स्थिति गंभीर होती जा रही है। इस स्थिति से निपटने के लिए शासन में उच्च स्तर पर चर्चा तक नहीं हो रही है।
पूर्व सीएम रावत ने कहा, लंबे समय से प्रदेश में बारिश नहीं हो रही है। पहाड़ों पर दूर तक बर्फ नजर नहीं आ रही है। सूखे से कृषि व बागवानी फसलों को असर पड़ रहा है। वहीं पर्यटन व्यवसाय को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जलस्रोत भी बारिश व बर्फ के अभाव में कमजोर पड़ते जाएंगे।
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उन्होंने कहा, सरकार की ओर से लगातार चिंतनीय होती जा रही स्थिति का सामना करने व सूखे के असर पर काम करने की दिशा में कोई पहल नहीं की जा रही है। अभी तक इसका सामना करने की रणनीति बनाने के लिए कोई उच्च स्तरीय विचार विमर्श नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि गैर सिंचित क्षेत्रों में गेहूं व अन्य सब्जी फसलें खराब हो रही हैं। इस समय सेब व अन्य अन्य बागवानी फसलों के बर्फबारी बहुत ही जरूरी है। लेकिन बर्फ न पड़ने से बागवानों को सेब व फलों के उत्पादन की चिंता सता रही है।