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Delhi NCR News: बदलती लाइफ स्टाइल से कमजोर हो रहीं हड्डियां
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-डॉक्टरों ने किया आगाह, कैल्शियम और विटामिन डी युक्त संतुलित आहार जरूरी
-नियमित व्यायाम और समय पर बीएमडी जांच ही इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। हड्डियों की कमजोरी का पता अक्सर तब चलता है, जब मामूली चोट लगने या गिरने से हड्डी टूट जाती है। इसलिए समय रहते हड्डियों की जांच कराना जरूरी है। स्वामी दयानंद अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. गौरव शर्मा ने लोगों को हड्डियों की सेहत को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। कहा, आज की बदलती जीवनशैली का हमारी हड्डियों की सेहत पर बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्वामी दयानंद अस्पताल में हड्डियों की जांच कराने वाले करीब 77 लोगों में 70 में हड्डियों की कमजोरी के संकेत मिले हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, हड्डियों की कमजोरी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। डॉ. गौरव शर्मा ने बताया कि हड्डियों का घनत्व कम होने पर उनकी मजबूती प्रभावित होती है। कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब उन्हें फ्रैक्चर होता है। हड्डियों की स्थिति का पता लगाने के लिए बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) जांच की जाती है। इससे हड्डियों के घनत्व का आकलन करने और उनमें कमजोरी के संकेत पहचानने में मदद मिलती है। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर बीएमडी जांच ही इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
हड्डियां कमजोर होने पर बढ़ता है फ्रैक्चर का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, हड्डियों का घनत्व कम होने की शुरुआती स्थिति को ऑस्टियोपीनिया कहते हैं। जब हड्डियां अधिक कमजोर हो जाती हैं, तो इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मामूली चोट लगने या गिरने से भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है। हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने के लिए टी-स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य तौर पर माइनस एक या इससे अधिक स्कोर सामान्य माना जाता है। माइनस एक से माइनस 2.5 के बीच का स्कोर ऑस्टियोपीनिया और माइनस 2.5 या इससे कम का स्कोर ऑस्टियोपोरोसिस की श्रेणी में आता है।
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बुजुर्गों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत
डॉक्टरों के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में 40 साल के बाद और पुरुषों में 50 साल के बाद हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हालांकि, कम उम्र के लोगों में भी यह समस्या हो सकती है। इसलिए हड्डियों में दर्द या कमजोरी के लक्षण न होने पर भी जरूरत के अनुसार जांच कराना महत्वपूर्ण है।
खानपान और व्यायाम से रखें हड्डियां मजबूत
डॉक्टरों ने हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी है। भोजन में कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिए जा सकते हैं। समय पर जांच कराने से हड्डियों की कमजोरी का पता लगाकर उचित देखभाल और इलाज शुरू किया जा सकता है।
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-नियमित व्यायाम और समय पर बीएमडी जांच ही इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका
अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली। हड्डियों की कमजोरी का पता अक्सर तब चलता है, जब मामूली चोट लगने या गिरने से हड्डी टूट जाती है। इसलिए समय रहते हड्डियों की जांच कराना जरूरी है। स्वामी दयानंद अस्पताल के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के प्रमुख डॉ. गौरव शर्मा ने लोगों को हड्डियों की सेहत को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। कहा, आज की बदलती जीवनशैली का हमारी हड्डियों की सेहत पर बहुत गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्वामी दयानंद अस्पताल में हड्डियों की जांच कराने वाले करीब 77 लोगों में 70 में हड्डियों की कमजोरी के संकेत मिले हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, हड्डियों की कमजोरी धीरे-धीरे बढ़ती है और शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। डॉ. गौरव शर्मा ने बताया कि हड्डियों का घनत्व कम होने पर उनकी मजबूती प्रभावित होती है। कई लोगों को इसकी जानकारी तब मिलती है, जब उन्हें फ्रैक्चर होता है। हड्डियों की स्थिति का पता लगाने के लिए बोन मिनरल डेंसिटी (बीएमडी) जांच की जाती है। इससे हड्डियों के घनत्व का आकलन करने और उनमें कमजोरी के संकेत पहचानने में मदद मिलती है। कैल्शियम और विटामिन डी युक्त संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय पर बीएमडी जांच ही इससे बचने का सबसे अच्छा तरीका है।
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हड्डियां कमजोर होने पर बढ़ता है फ्रैक्चर का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, हड्डियों का घनत्व कम होने की शुरुआती स्थिति को ऑस्टियोपीनिया कहते हैं। जब हड्डियां अधिक कमजोर हो जाती हैं, तो इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। ऐसी स्थिति में मामूली चोट लगने या गिरने से भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है। हड्डियों की कमजोरी का पता लगाने के लिए टी-स्कोर का इस्तेमाल किया जाता है। सामान्य तौर पर माइनस एक या इससे अधिक स्कोर सामान्य माना जाता है। माइनस एक से माइनस 2.5 के बीच का स्कोर ऑस्टियोपीनिया और माइनस 2.5 या इससे कम का स्कोर ऑस्टियोपोरोसिस की श्रेणी में आता है।
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बुजुर्गों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत
डॉक्टरों के मुताबिक, उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है। महिलाओं में 40 साल के बाद और पुरुषों में 50 साल के बाद हड्डियों की सेहत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। हालांकि, कम उम्र के लोगों में भी यह समस्या हो सकती है। इसलिए हड्डियों में दर्द या कमजोरी के लक्षण न होने पर भी जरूरत के अनुसार जांच कराना महत्वपूर्ण है।
खानपान और व्यायाम से रखें हड्डियां मजबूत
डॉक्टरों ने हड्डियों को मजबूत बनाए रखने के लिए संतुलित आहार लेने, नियमित व्यायाम करने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी है। भोजन में कैल्शियम और विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा होना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लिए जा सकते हैं। समय पर जांच कराने से हड्डियों की कमजोरी का पता लगाकर उचित देखभाल और इलाज शुरू किया जा सकता है।