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Delhi NCR News: नेपाल के रास्ते देश में पहुंच रहे घातक हथियार, दो और तस्कर दबोचे
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आईएसआई समर्थित टेरर-हथियार मॉड्यूल का पर्दाफाश
पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते आते थे विदेशी हथियारों के पुर्जे, दिल्ली में असेंबल कर अपराधियों व आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाए जाते थे, अब तक 18 गिरफ्तार
चेक गणराज्य में बनी एक सब-मशीन गन, इटली और चेक गणराज्य निर्मित तीन अत्याधुनिक पिस्तौल तथा 82 कारतूस बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दिल्ली के सीलमपुर निवासी महफूज अली उर्फ बॉबी उर्फ कबूतर (43) और मोहम्मद अहमद (35) शामिल हैं। दोनों के कब्जे से चेक गणराज्य में बनी एक सब-मशीन गन, इटली और चेक गणराज्य निर्मित तीन अत्याधुनिक पिस्तौल तथा 82 कारतूस बरामद किए गए हैं।
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) एचजीएस धालीवाल ने बताया कि इंस्पेक्टर मान सिंह और इंस्पेक्टर सुंदर गौतम की टीम ने पहले से दर्ज यूएपीए मामले की जांच के दौरान दोनों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के साथ ही इस नेटवर्क में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 18 हो गई है। पुलिस कुल 32 विदेशी आधुनिक हथियार और 363 कारतूस बरामद कर चुकी है।
जांच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे फरार अपराधी शाहबाज अंसारी, रेहान अंसारी और सलीम अहमद उर्फ सलीम पिस्टल के इशारे पर संचालित हो रहा था। हथियारों के पुर्जों को विशेष रूप से तैयार वेल्डिंग मशीनों और गियरबॉक्स के भीतर छिपाकर एयर कार्गो के जरिए नेपाल के काठमांडू भेजा जाता था। वहां से तस्करी कर इन्हें भारत लाया जाता और दिल्ली में जोड़कर पूरी तरह कार्यशील हथियार तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन्हें संगठित अपराधी गिरोहों और अन्य नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
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महफूज अली : जाफराबाद इलाके में हथियार असेंबल करने की यूनिट भी चला चुका है ये
पुलिस के मुताबिक महफूज अली इस नेटवर्क की अहम कड़ी था। उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह हथियारों की खेप प्राप्त करता, पुर्जों को जोड़कर तैयार हथियार बनाता और आगे सप्लाई करता था। उसने अपने भाई इमरान और मारे जा चुके अपराधी नदीम उर्फ चाचा फाडू के साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके में अवैध हथियार असेंबल करने की यूनिट भी संचालित की थी।
-महफूज का आपराधिक रिकॉर्ड भी लंबा है। वर्ष 2006 में हत्या के प्रयास के मामले में पहली बार गिरफ्तार होने के बाद वह कई सनसनीखेज हत्याओं और गैंगवार से जुड़े मामलों में शामिल रहा। पुलिस के अनुसार उसका संबंध हाशिम बाबा, राशिद केबल, शमीम बर्फ वाला, साबिर चौधरी और अन्य कुख्यात अपराधियों से रहा है। वर्ष 2019 में मकोका के एक मामले में नाम आने के बाद वह लंबे समय तक फरार रहा। उसके खिलाफ पॉक्सो समेत 13 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मोहम्मद अहमद : यूपी में विदेशी हथियारों की सप्लाई करता था, बाद में तस्करी भी करने लगा
दूसरे आरोपी मोहम्मद अहमद की भूमिका उत्तर प्रदेश में विदेशी हथियारों के वितरण की थी। पुलिस के अनुसार वर्ष 2013 में आजमगढ़ में गोलीबारी के मामले में जेल जाने के बाद वह अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़ गया। शुरुआत में वह बिहार के मुंगेर से देसी हथियार लाकर उत्तर प्रदेश में सप्लाई करता था, लेकिन बाद में दिल्ली के वसीम मलिक और मोहम्मद राहिल के संपर्क में आने के बाद विदेशी हथियारों की तस्करी करने लगा। पिछले एक वर्ष में उसने करीब 15 से 20 विदेशी पिस्तौल और 50 से 60 कारतूस लेकर शाहगंज, आजमगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के अपराधियों तक पहुंचाए। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित करीब 10 गंभीर मामले दर्ज हैं।
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महफूज ने गायक मूसेवाला की हत्या में शामिल शूटरों की मदद की थी
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 में महफूज ने जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा के कहने पर पंजाब में चर्चित पंजाबी गायक मूसेवाला की हत्या में शामिल शूटरों की मदद की थी। उसने वारदात के बाद उनके मोबाइल फोन और इंटरनेट डोंगल इकट्ठा कर यमुना नदी में फेंक दिए, ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट किए जा सकें। इसके अलावा वर्ष 2022 में उसने विदेशी पिस्तौलें जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के सदस्यों तक भी पहुंचाईं।
पाक में बैठे सलीम पिस्टल और शाहबाज अंसारी देश को अस्थिर करने के लिए हथियार मुहैया कराते थे
पुलिस का दावा है कि सलीम पिस्टल और शाहबाज अंसारी का उद्देश्य केवल अवैध हथियारों की तस्करी से कमाई करना नहीं था, बल्कि देश में सक्रिय आतंकी संगठनों और संगठित अपराधी गिरोहों को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराकर कानून-व्यवस्था को अस्थिर करना भी था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों को भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर अंधाधुंध फायरिंग जैसी घटनाओं के लिए हथियारों का जखीरा तैयार करने के निर्देश भी दिए गए थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की भी जांच कर रही है।
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पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते आते थे विदेशी हथियारों के पुर्जे, दिल्ली में असेंबल कर अपराधियों व आतंकी नेटवर्क तक पहुंचाए जाते थे, अब तक 18 गिरफ्तार
चेक गणराज्य में बनी एक सब-मशीन गन, इटली और चेक गणराज्य निर्मित तीन अत्याधुनिक पिस्तौल तथा 82 कारतूस बरामद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई समर्थित अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी और आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करते हुए दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में दिल्ली के सीलमपुर निवासी महफूज अली उर्फ बॉबी उर्फ कबूतर (43) और मोहम्मद अहमद (35) शामिल हैं। दोनों के कब्जे से चेक गणराज्य में बनी एक सब-मशीन गन, इटली और चेक गणराज्य निर्मित तीन अत्याधुनिक पिस्तौल तथा 82 कारतूस बरामद किए गए हैं।
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध) एचजीएस धालीवाल ने बताया कि इंस्पेक्टर मान सिंह और इंस्पेक्टर सुंदर गौतम की टीम ने पहले से दर्ज यूएपीए मामले की जांच के दौरान दोनों को गिरफ्तार किया। इस कार्रवाई के साथ ही इस नेटवर्क में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 18 हो गई है। पुलिस कुल 32 विदेशी आधुनिक हथियार और 363 कारतूस बरामद कर चुकी है।
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जांच में सामने आया है कि यह मॉड्यूल पाकिस्तान में बैठे फरार अपराधी शाहबाज अंसारी, रेहान अंसारी और सलीम अहमद उर्फ सलीम पिस्टल के इशारे पर संचालित हो रहा था। हथियारों के पुर्जों को विशेष रूप से तैयार वेल्डिंग मशीनों और गियरबॉक्स के भीतर छिपाकर एयर कार्गो के जरिए नेपाल के काठमांडू भेजा जाता था। वहां से तस्करी कर इन्हें भारत लाया जाता और दिल्ली में जोड़कर पूरी तरह कार्यशील हथियार तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन्हें संगठित अपराधी गिरोहों और अन्य नेटवर्क तक पहुंचाया जाता था।
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महफूज अली : जाफराबाद इलाके में हथियार असेंबल करने की यूनिट भी चला चुका है ये
पुलिस के मुताबिक महफूज अली इस नेटवर्क की अहम कड़ी था। उसने पूछताछ में स्वीकार किया कि वह हथियारों की खेप प्राप्त करता, पुर्जों को जोड़कर तैयार हथियार बनाता और आगे सप्लाई करता था। उसने अपने भाई इमरान और मारे जा चुके अपराधी नदीम उर्फ चाचा फाडू के साथ उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद इलाके में अवैध हथियार असेंबल करने की यूनिट भी संचालित की थी।
-महफूज का आपराधिक रिकॉर्ड भी लंबा है। वर्ष 2006 में हत्या के प्रयास के मामले में पहली बार गिरफ्तार होने के बाद वह कई सनसनीखेज हत्याओं और गैंगवार से जुड़े मामलों में शामिल रहा। पुलिस के अनुसार उसका संबंध हाशिम बाबा, राशिद केबल, शमीम बर्फ वाला, साबिर चौधरी और अन्य कुख्यात अपराधियों से रहा है। वर्ष 2019 में मकोका के एक मामले में नाम आने के बाद वह लंबे समय तक फरार रहा। उसके खिलाफ पॉक्सो समेत 13 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मोहम्मद अहमद : यूपी में विदेशी हथियारों की सप्लाई करता था, बाद में तस्करी भी करने लगा
दूसरे आरोपी मोहम्मद अहमद की भूमिका उत्तर प्रदेश में विदेशी हथियारों के वितरण की थी। पुलिस के अनुसार वर्ष 2013 में आजमगढ़ में गोलीबारी के मामले में जेल जाने के बाद वह अवैध हथियारों की तस्करी से जुड़ गया। शुरुआत में वह बिहार के मुंगेर से देसी हथियार लाकर उत्तर प्रदेश में सप्लाई करता था, लेकिन बाद में दिल्ली के वसीम मलिक और मोहम्मद राहिल के संपर्क में आने के बाद विदेशी हथियारों की तस्करी करने लगा। पिछले एक वर्ष में उसने करीब 15 से 20 विदेशी पिस्तौल और 50 से 60 कारतूस लेकर शाहगंज, आजमगढ़ और आसपास के क्षेत्रों के अपराधियों तक पहुंचाए। उसके खिलाफ हत्या, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट सहित करीब 10 गंभीर मामले दर्ज हैं।
महफूज ने गायक मूसेवाला की हत्या में शामिल शूटरों की मदद की थी
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2021 में महफूज ने जेल में बंद गैंगस्टर हाशिम बाबा के कहने पर पंजाब में चर्चित पंजाबी गायक मूसेवाला की हत्या में शामिल शूटरों की मदद की थी। उसने वारदात के बाद उनके मोबाइल फोन और इंटरनेट डोंगल इकट्ठा कर यमुना नदी में फेंक दिए, ताकि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट किए जा सकें। इसके अलावा वर्ष 2022 में उसने विदेशी पिस्तौलें जग्गू भगवानपुरिया गिरोह के सदस्यों तक भी पहुंचाईं।
पाक में बैठे सलीम पिस्टल और शाहबाज अंसारी देश को अस्थिर करने के लिए हथियार मुहैया कराते थे
पुलिस का दावा है कि सलीम पिस्टल और शाहबाज अंसारी का उद्देश्य केवल अवैध हथियारों की तस्करी से कमाई करना नहीं था, बल्कि देश में सक्रिय आतंकी संगठनों और संगठित अपराधी गिरोहों को आधुनिक हथियार उपलब्ध कराकर कानून-व्यवस्था को अस्थिर करना भी था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपियों को भीड़भाड़ वाले सार्वजनिक स्थानों पर अंधाधुंध फायरिंग जैसी घटनाओं के लिए हथियारों का जखीरा तैयार करने के निर्देश भी दिए गए थे। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार आरोपियों और वित्तीय लेनदेन की कड़ियों की भी जांच कर रही है।