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इंदौर मॉडल से बदलेगी दिल्ली: एलजी ने किया ठोस कचरा प्रबंधन वर्कशॉप का उद्घाटन, आधुनिक तरीकों पर दिया जोर
Tue, 01 Sep 2026 05:35 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Tue, 01 Sep 2026 05:35 PM IST
सार
दिल्ली एलजी ने आज इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक कार्यशाला का उद्घाटन किया। इसे एमसीडी और आईआईटी दिल्ली ने मिलकर आयोजित किया। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने उद्घाटन सत्र में इंदौर के सफल मॉडल की सराहना की।
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दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का उद्घाटन किया। यह कार्यशाला ठोस कचरा प्रबंधन के विषय पर थी। इसका आयोजन दिल्ली नगर निगम ने आईआईटी दिल्ली के सहयोग से इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया।
ये एमसीडी के द्वारा किसी प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर पहला संस्थागत सहयोग है। उपराज्यपाल ने एमसीडी और आईआईटी दिल्ली को विशेषज्ञों, जन प्रतिनिधियों तथा हितधारकों को एक साथ लाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान साझा करने से बढ़ता है और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से दिल्ली को प्रेरणा लेनी चाहिए।
उपराज्यपाल ने इंदौर को अनुशासित नगरपालिका प्रयासों का एक उत्कृष्ट घरेलू उदाहरण बताया। उन्होंने इसके सफल मॉडल का दिल्ली में अध्ययन और अनुकूलित प्रतिकृति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नगरपालिका अपशिष्ट का वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रबंधन केवल स्वच्छता का विषय नहीं है। यह जन स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और दिल्ली के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ा है। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 13,000 मीट्रिक टन कचरा होता है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक, टिकाऊ और व्यावहारिक समाधानों की आवश्यकता है।
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उपराज्यपाल ने कहा कि इसे आगे बढ़ना चाहिए। इसे अपशिष्ट को कम करने, पुन: उपयोग करने और पुनर्चक्रण करने पर केंद्रित करना होगा। कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदलने पर जोर दिया जाना चाहिए।
इंदौर मॉडल पर एलजी का जोर
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ये एमसीडी के द्वारा किसी प्रमुख शैक्षणिक संस्थान के साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर पहला संस्थागत सहयोग है। उपराज्यपाल ने एमसीडी और आईआईटी दिल्ली को विशेषज्ञों, जन प्रतिनिधियों तथा हितधारकों को एक साथ लाने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ज्ञान साझा करने से बढ़ता है और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से दिल्ली को प्रेरणा लेनी चाहिए।
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उपराज्यपाल ने इंदौर को अनुशासित नगरपालिका प्रयासों का एक उत्कृष्ट घरेलू उदाहरण बताया। उन्होंने इसके सफल मॉडल का दिल्ली में अध्ययन और अनुकूलित प्रतिकृति का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि नगरपालिका अपशिष्ट का वैज्ञानिक और टिकाऊ प्रबंधन केवल स्वच्छता का विषय नहीं है। यह जन स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और दिल्ली के नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता से भी जुड़ा है। दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 13,000 मीट्रिक टन कचरा होता है। इसके प्रभावी प्रबंधन के लिए आधुनिक, टिकाऊ और व्यावहारिक समाधानों की आवश्यकता है।
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Lieutenant Governor of Delhi, Taranjit Singh Sandhu, today inaugurated the "One-Day Brainstorming Workshop on Municipal Solid Waste Management: A Multi-Level/Multi-Stakeholder Strategy towards Circularity", organised by the Municipal Corporation of Delhi (MCD) in collaboration…
— ANI (@ANI) September 1, 2026
उपराज्यपाल ने कहा कि इसे आगे बढ़ना चाहिए। इसे अपशिष्ट को कम करने, पुन: उपयोग करने और पुनर्चक्रण करने पर केंद्रित करना होगा। कचरे को मूल्यवान संसाधनों में बदलने पर जोर दिया जाना चाहिए।
इंदौर मॉडल पर एलजी का जोर
उपराज्यपाल ने पहले भी इंदौर के मॉडल को अनुकरणीय बताया था। उन्होंने इस विषय पर इंदौर के महापौर से भी मुलाकात की थी। यह कार्यशाला उपराज्यपाल द्वारा जारी पिछले निर्देशों के अनुसरण में आयोजित की गई है। दिल्ली को अपनी विशिष्ट परिस्थितियों के अनुसार इंदौर के सफल मॉडल को अपनाना चाहिए।