बड़ी कार्रवाई: दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने वाले एसीपी मानस्वी वशिष्ठ निलंबित, क्यों गिरी गाज?
वर्ष 2019 बैच के दानिप्स अधिकारी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार का 28 अक्तूबर तबादला कर दिया गया था। यह कार्रवाई शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प के बाद की गई थी।
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दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर अपने और एक थाना प्रभारी (एसएचओ) के तबादले के विरोध में पुलिसकर्मियों के साथ प्रदर्शन करने वाले सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने दो नवंबर को देर रात निलंबन का आदेश जारी किया था। एसीपी के निलंबन के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस मुख्यालय में मंगलवार को दिन भर सन्नाटा पसरा रहा।
पुलिस मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे मानस्वी वशिष्ठ
मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि चूंकि दानिप्स (2019) के एंट्री ग्रेड अधिकारी मनस्वी वशिष्ठ के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू करने पर विचार किया जा रहा है, इसलिए सक्षम प्राधिकारी ने केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम 10 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश दिया है। मंत्रालय ने कहा कि निलंबन की अवधि के दौरान वशिष्ठ का मुख्यालय दिल्ली रहेगा और वह सक्षम प्राधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। आदेश को 'अत्यंत तत्काल' श्रेणी में जारी किया गया है।
ये था मामला
वर्ष 2019 बैच के दानिप्स अधिकारी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार का 28 अक्तूबर तबादला कर दिया गया था। यह कार्रवाई शाहदरा थाने में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच हुई झड़प के बाद की गई थी। दिल्ली की सभी जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति के अनुसार, विवाद की शुरुआत अधिवक्ता ललित बंसल को मारपीट में सिर पर गंभीर चोट लगने की घटना से हुई थी। इस मामले में शाहदरा थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। समिति के अनुसार, 23 अक्तूबर की शाम कई वकील मामले में नामजद लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग को लेकर थाने पहुंचे थे। समिति का दावा है कि एसीपी और थाना प्रभारी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि उस समय थाने में मौजूद आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा।
हालांकि, अगले दिन वकीलों को पता चला कि आरोपियों को गिरफ्तार करने के बजाय कथित तौर पर छोड़ दिया गया है। इससे बार के सदस्यों में नाराजगी पैदा हुई। समिति के अनुसार, मामले की जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर जब वकील दोबारा थाने पहुंचे, तो पुलिस अधिकारियों और वकीलों के बीच झड़प हो गई।
सोमवार को किया था प्रदर्शन
वशिष्ठ और कुमार के तबादले के विरोध में सोमवार को महिला पुलिसकर्मी करीब कई सौ पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए थे। प्रदर्शनकारी दोनों अधिकारियों को उनके पुराने पदों पर बहाल करने की मांग कर रहे थे। पुलिसकर्मियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार से मुलाकात कर पांच मांगों का ज्ञापन सौंपा था। इन मांगों में शाहदरा थाने की घटना में शामिल वकीलों के खिलाफ कार्रवाई और कथित तौर पर गुंडागर्दी करने वाले वकीलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करना शामिल था। इससे पहले 30 अक्तूबर को पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने दिल्ली बार काउंसिल और जिला अदालतों के बार एसोसिएशनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। बैठक के बाद संयुक्त समन्वय और शिकायत निवारण व्यवस्था स्थापित करने का निर्णय लिया गया था।
वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे
प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर 'वर्दी का अपमान नहीं सहेंगे' के नारे लगाए। उन्होंने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा थाने के प्रभारी निरीक्षक अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर बहाल करने की मांग की। पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर एक के बाहर उस समय तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई, जब वरिष्ठ अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने पहुंचे। नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने भी मौके पर पहुंचकर प्रदर्शन समाप्त कराने की कोशिश की। वशिष्ठ से बातचीत करते नजर आए शर्मा ने कुछ पुलिसकर्मियों को मुख्यालय के अंदर चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया। प्रदर्शनकारी पुलिस आयुक्त के साथ 'संपर्क सभा' आयोजित करने की मांग पर अड़े रहे।