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Terror Network: दिल्ली पुलिस का खुलासा- गिरफ्तार संदिग्धों ने मेवात में लगाए गए थे पाकिस्तान समर्थित पोस्टर

पुरुषोत्तम वर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 18 Jun 2026 03:34 AM IST
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सार

गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा के नूंह, मेवात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के निर्देश पर भड़काऊ पोस्टर लगाए थे।

Delhi Police reveals arrested suspects had put up Pakistan-backed posters in Mewat.
जांच में सामने आया है कि पोस्टर लगाने के बाद आरोपियों ने उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग की और उसे अपने पाकिस्तानी हैंडलरों को भेजा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और उसके समर्थित नेटवर्क की भारत में सक्रियता को लेकर दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बड़ा खुलासा किया है। गिरफ्तार किए गए पांच संदिग्धों पर आरोप है कि उन्होंने हरियाणा के नूंह, मेवात और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में पाकिस्तान स्थित हैंडलरों के निर्देश पर भड़काऊ पोस्टर लगाए थे। इन पोस्टरों का उद्देश्य आईएसआई समर्थित तत्वों का प्रचार करना और भारत में भय तथा अस्थिरता का माहौल बनाना था।



स्पेशल सेल के अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों को सोशल मीडिया के जरिए पाकिस्तान से दो पीडीएफ फाइलें भेजी गई थीं। इनमें पाकिस्तान में बैठे हैंडलर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट की तस्वीरें और प्रचार सामग्री शामिल थी। आरोपियों ने इन पीडीएफ को भारत में प्रिंट कराया और उसके बाद नूंह, मेवात, मेरठ तथा अन्य स्थानों पर करीब 40 से 50 पोस्टर लगाए।
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जांच में सामने आया है कि पोस्टर लगाने के बाद आरोपियों ने उनकी वीडियो रिकॉर्डिंग की और उसे अपने पाकिस्तानी हैंडलरों को भेजा। पुलिस का कहना है कि यह गतिविधि केवल प्रचार तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके जरिए युवाओं को प्रभावित करने और आतंकी नेटवर्क के लिए माहौल तैयार करने की कोशिश की जा रही थी।
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स्पेशल सेल के पुलिस उपायुक्त प्रवीण कुमार त्रिपाठी के अनुसार गिरफ्तार संदिग्धों को सुरक्षा बलों के जवानों की लक्षित हत्या, आकाओं के प्रचार और तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान के नाम पर दहशत फैलाने का काम सौंपा गया था। शुरुआती जांच में पता चला है कि इस नेटवर्क के निशाने पर आर्थिक रूप से कमजोर और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले युवा थे, जिन्हें पैसों और बेहतर जिंदगी का लालच देकर अपने साथ जोड़ा जा रहा था।

दिल्ली पुलिस की विभिन्न इकाइयों ने हाल के महीनों में आईएसआई और उसके समर्थित मॉड्यूल्स के खिलाफ लगातार कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार अब तक करीब 45 संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें अपराध शाखा और स्पेशल सेल की अलग-अलग इकाइयों की ओर से पकड़े गए कई मॉड्यूल शामिल हैं।

इसी साल चर्चा में आया तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान नाम
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान कोई स्वतंत्र या स्थापित आतंकी संगठन नहीं है। इस संगठन का नाम पहली बार इसी साल तब सामने आया, जब इसके तथाकथित अल-बुरक ब्रिगेड ने पंजाब (जैसे गुरदासपुर और अमृतसर) में पुलिसकर्मियों की हत्याओं की जिम्मेदारी ली। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नाम पाकिस्तान स्थित तत्वों की ओर से प्रचार और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर की जाने वाली आपराधिक या आतंकी गतिविधियों को बड़े आतंकी संगठन का रूप देकर भय का माहौल तैयार करना है। अधिकारियों का कहना है कि समय रहते मॉड्यूल का पर्दाफाश होने से एक बड़ी साजिश नाकाम हुई है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पाकिस्तान स्थित हैंडलरों की भूमिका की भी पड़ताल कर रही हैं।

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