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Delhi NCR News: फिट दिखते हैं तो भी दिल पूरी तरह सुरक्षित नहीं, हो सकता है चुपचाप बढ़ रहा हो खतरा
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हाई बीपी, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम लंबे समय तक बिना लक्षण के रह सकते हैं, नियमित जांच से समय रहते हो सकती है पहचान
1,13,106 लोगों की जांच की गई आईसीएमआर-इंडियाब के अध्ययन में
11.4 प्रतिशत लोगों में डायबिटीज पाई गई
सिमरन
नई दिल्ली। उम्र कम है, शरीर फिट है और रोजमर्रा की जिंदगी में कोई परेशानी नहीं है, तो क्या इसका मतलब है कि दिल पूरी तरह सुरक्षित है? डॉक्टरों का कहना है कि जरूरी नहीं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मोटापा जैसे जोखिम कारक लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बने रह सकते हैं। धीरे-धीरे ये हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में केवल फिट दिखना दिल की सेहत की गारंटी नहीं है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर-इंडियाब) के अध्ययन में देशभर के 1,13,106 लोगों की जांच की गई। इसमें 11.4 प्रतिशत लोगों में डायबिटीज पाई गई। अध्ययन में प्री-डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसी स्थितियों का भी आकलन किया गया। वहीं, आईसीएमआर की अगुवाई में इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इनिशिएटिव के विश्लेषण में हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर, हाई कोलेस्ट्रॉल, अधिक बीएमआई और खराब खानपान को बीमारियों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया गया है।
साधारण जांच से मिल सकता है जोखिम का संकेत
पैथोलॉजी प्रमुख डॉ. सुनीता कपूर के मुताबिक, दिल की बीमारी से जुड़े कई जोखिमों की पहचान बिना लक्षणों के भी की जा सकती है। फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, एचबीए1सी और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की स्थिति समझने में मदद करती हैं। वहीं, ब्लड प्रेशर, वजन, बीएमआई और कमर का घेरा भी मेटाबोलिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि किसी एक जांच की सामान्य रिपोर्ट को दिल के पूरी तरह सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। हृदय संबंधी जोखिम का आकलन करते समय मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, खानपान, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, वजन और अन्य जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
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इन स्थितियों में जांच पर दें विशेष ध्यान
जिन युवाओं के परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है या जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान अथवा शारीरिक निष्क्रियता जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। कंसल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आकार कपूर के मुताबिक, हर युवा के लिए एक जैसा हार्ट टेस्ट पैकेज सही नहीं है। लक्षणों और जोखिम के आधार पर डॉक्टर ईसीजी, 2डी इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट या कुछ मामलों में सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी की सलाह दे सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जांच का चुनाव व्यक्ति की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत के मुताबिक होना चाहिए।
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1,13,106 लोगों की जांच की गई आईसीएमआर-इंडियाब के अध्ययन में
11.4 प्रतिशत लोगों में डायबिटीज पाई गई
सिमरन
नई दिल्ली। उम्र कम है, शरीर फिट है और रोजमर्रा की जिंदगी में कोई परेशानी नहीं है, तो क्या इसका मतलब है कि दिल पूरी तरह सुरक्षित है? डॉक्टरों का कहना है कि जरूरी नहीं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मोटापा जैसे जोखिम कारक लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर में बने रह सकते हैं। धीरे-धीरे ये हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं। ऐसे में केवल फिट दिखना दिल की सेहत की गारंटी नहीं है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर-इंडियाब) के अध्ययन में देशभर के 1,13,106 लोगों की जांच की गई। इसमें 11.4 प्रतिशत लोगों में डायबिटीज पाई गई। अध्ययन में प्री-डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, असामान्य कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसी स्थितियों का भी आकलन किया गया। वहीं, आईसीएमआर की अगुवाई में इंडिया स्टेट-लेवल डिजीज बर्डन इनिशिएटिव के विश्लेषण में हाई ब्लड प्रेशर, हाई ब्लड शुगर, हाई कोलेस्ट्रॉल, अधिक बीएमआई और खराब खानपान को बीमारियों के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल किया गया है।
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साधारण जांच से मिल सकता है जोखिम का संकेत
पैथोलॉजी प्रमुख डॉ. सुनीता कपूर के मुताबिक, दिल की बीमारी से जुड़े कई जोखिमों की पहचान बिना लक्षणों के भी की जा सकती है। फास्टिंग ब्लड ग्लूकोज, एचबीए1सी और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की स्थिति समझने में मदद करती हैं। वहीं, ब्लड प्रेशर, वजन, बीएमआई और कमर का घेरा भी मेटाबोलिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण संकेतक हैं। डॉक्टरों का कहना है कि किसी एक जांच की सामान्य रिपोर्ट को दिल के पूरी तरह सुरक्षित होने का प्रमाण नहीं मानना चाहिए। हृदय संबंधी जोखिम का आकलन करते समय मेडिकल और पारिवारिक इतिहास, खानपान, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, वजन और अन्य जोखिम कारकों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
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इन स्थितियों में जांच पर दें विशेष ध्यान
जिन युवाओं के परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है या जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, धूम्रपान अथवा शारीरिक निष्क्रियता जैसी समस्याएं हैं, उनके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो सकती है। कंसल्टेंट रेडियोलॉजिस्ट डॉ. आकार कपूर के मुताबिक, हर युवा के लिए एक जैसा हार्ट टेस्ट पैकेज सही नहीं है। लक्षणों और जोखिम के आधार पर डॉक्टर ईसीजी, 2डी इकोकार्डियोग्राम, स्ट्रेस टेस्ट या कुछ मामलों में सीटी कोरोनरी एंजियोग्राफी की सलाह दे सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जांच का चुनाव व्यक्ति की स्थिति और चिकित्सकीय जरूरत के मुताबिक होना चाहिए।