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Faridabad News: मास्टर प्लान को लागू करने के लिए बड़े स्तर पर हो सकती है तोड़फोड़

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 18 Jun 2026 12:58 AM IST
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Large-scale demolition may take place to implement the master plan.
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तेजी से बन रहीं अवैध कालोनियां योजना के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। मास्टर प्लान 2031 शहर के नियोजित विकास की नई तस्वीर पेश करता है लेकिन जमीन पर तेजी से फैल रहीं अवैध काॅलोनियां इस योजना के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। शहर और आसपास के गांवों में कृषि भूमि पर लगातार हो रही अवैध प्लाॅटिंग और निर्माण भविष्य में सेक्टर, मास्टर रोड, औद्योगिक क्षेत्र और अन्य सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा बन सकते हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि मास्टर प्लान को पूरी तरह लागू करने के लिए आने वाले समय में बड़े स्तर पर तोड़फोड़ की कार्रवाई करनी पड़ सकती है।
ग्रेटर फरीदाबाद के 18 गांवों में नए सेक्टर विकसित करने की योजना है। खेड़ी कलां, नचौली, ताजुपुर, ढहकौला, शाहबाद, बदरपुर सैद, साहुपुरा, सोतई, सुनपेड़, मलेरना, जाजरू, भैंसरावली, फत्तुपुरा, भुआपुर, जसाना, फरीदपुर, सदपुरा और तिगांव सहित कई गांवों में कृषि भूमि पर तेजी से अवैध प्लाटिंग हो रही है। यदि निर्माण इसी तरह जारी रहे तो सेक्टर विकसित करने से पहले बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाना पड़ सकता है।
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औद्योगिक शहर और एक्सप्रेसवे परियोजना पर भी असर

दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक प्रस्तावित औद्योगिक शहर के लिए फरीदाबाद और पलवल के नौ गांवों की हजारों एकड़ भूमि चिह्नित की गई है। लेकिन कई गांवों में कृषि भूमि को छोटे-छोटे प्लाटों में बदलकर बेचा जा रहा है। इससे भविष्य में परियोजना के क्रियान्वयन और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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मंझावली कनेक्टिविटी के आसपास भी बढ़ रही अवैध प्लाटिंग

फरीदाबाद-नोएडा-गाजियाबाद कनेक्टिविटी परियोजना और मंझावली पुल के आसपास भी अवैध काॅलोनियों का विस्तार तेजी से हो रहा है। बेहतर संपर्क व्यवस्था का फायदा उठाकर कई कालोनाइजर आसपास की कृषि भूमि पर प्लाॅट काट रहे हैं। इससे मास्टर प्लान के तहत प्रस्तावित सड़क नेटवर्क और सार्वजनिक सुविधाओं के विकास में बाधा आने की आशंका बढ़ गई है।

शुरुआत में नहीं होती कार्रवाई, बाद में उठाना पड़ता है भारी नुकसान

विशेषज्ञों का कहना है कि जब अवैध प्लाॅटिंग शुरू होती है, तभी प्रभावी कार्रवाई कर दी जाए तो समस्या को आसानी से रोका जा सकता है। लेकिन अक्सर पूरी काॅलोनी बस जाने के बाद कार्रवाई होती है, जिससे प्रशासन को विरोध, कानून-व्यवस्था की चुनौती और सरकारी संसाधनों की अतिरिक्त खपत का सामना करना पड़ता है। वहीं आम लोगों की वर्षों की जमा-पूंजी भी प्रभावित होती है।

एक हजार से अधिक अवैध काॅलोनियां बनी चिंता

शहर में विभिन्न विभागों की जमीन और कृषि भूमि पर एक हजार से अधिक अवैध काॅलोनियां विकसित होने की बात सामने आ चुकी है। नगर निगम, एचएसवीपी, सिंचाई विभाग, वन विभाग और जिला नगर योजनाकार विभाग की जमीन पर भी अवैध निर्माण बड़ी समस्या बने हुए हैं। कई बार कार्रवाई के दौरान विरोध और हंगामे की स्थिति भी बन चुकी है।

औद्योगिक क्षेत्रों में भी फैल चुका है अवैध कब्जा

सरूरपुर, नंगला, कुरेशीपुर, गाजीपुर, मादलपुर, नेकपुर, सिरोही, घौज और फतेहपुर सहित कई क्षेत्रों में अवैध औद्योगिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। फतेहपुर क्षेत्र में बड़ी संख्या में औद्योगिक इकाइयों के संचालन से पर्यावरण और नियोजित विकास दोनों प्रभावित हो रहे हैं।

समय रहते सख्ती नहीं हुई तो बढ़ेगी मुश्किल

शहरी विकास से जुड़े जानकारों का मानना है कि मास्टर प्लान 2031 को धरातल पर सफलतापूर्वक लागू करने के लिए अवैध प्लाॅटिंग पर शुरुआती स्तर पर सख्ती जरूरी है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो भविष्य में विकास परियोजनाओं को लागू करने से पहले बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ करनी पड़ सकती है, जिससे प्रशासन, स्थानीय निवासियों और शहर के विकास पर व्यापक असर पड़ेगा।

डीटीपी विभाग की तरफ से अवैध निर्माण पर तेजी से कार्रवाई की जा रही है। पिछले कुछ माह में 70 से अधिक बार कार्रवाई की जा चुकी है। -यजन चौधरी, डीटीपी फरीदाबाद
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