{"_id":"6a32f8224244891b580dbc52","slug":"opd-of-1000-patients-yet-there-is-shortage-of-doctors-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-72599-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: 1000 मरीजों की ओपीडी, फिर भी डॉक्टरों का टोटा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: 1000 मरीजों की ओपीडी, फिर भी डॉक्टरों का टोटा
विज्ञापन
सीएचसी खेड़ी कलां में स्वास्थ्य सेवाएं बेहाल की खबर के साथ । फाइल फोटो ।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
खेड़ीकलां सीएचसी में मेडिकल ऑफिसर के सातों पद खाली, जर्जर भवन और विशेषज्ञों की कमी से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाला खेड़ीकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन 800 से 1000 मरीजों की ओपीडी होने के बावजूद यहां मेडिकल ऑफिसर का एक भी नियमित पद भरा नहीं है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या जिला नागरिक अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के सात पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सभी पद खाली हैं। यहां कार्यरत दो चिकित्सक डेपुटेशन पर भेजे गए हैं, जबकि दो चिकित्सक पीजी की पढ़ाई के लिए अवकाश पर हैं। ऐसे में मरीजों की बढ़ती संख्या का भार सीमित उपलब्ध स्टाफ पर आ गया है।
खेड़ीकलां सीएचसी ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों की स्वास्थ्य जरूरतों का प्रमुख केंद्र है। यहां सामान्य बीमारियों से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई मामलों में रेफर करना मजबूरी बन जाता है।
विज्ञापन
डिलीवरी सुविधा मौजूद लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं
केंद्र में डिलीवरी सुविधा उपलब्ध होने के कारण आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए यहां पहुंचती हैं। इसके बावजूद यहां शिशु रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत नहीं है। नवजात शिशुओं या बच्चों को विशेष चिकित्सा की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की चुनौती खड़ी होती है।
स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी चिंता का विषय
स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी चिंता का विषय बना हुआ है। कई वर्ष पहले इसे जर्जर घोषित किया जा चुका है। कोरोना काल के दौरान मरम्मत कर स्थिति को कुछ समय के लिए संभाला गया था, लेकिन अब फिर भवन में टूट-फूट और जर्जरता के संकेत दिखाई देने लगे हैं। मरीजों और कर्मचारियों को भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि केंद्र में नर्सिंग स्टाफ के सभी आठ पद भरे हुए हैं। लैब टेक्नीशियन, डेंटल सर्जन, हेल्थ इंस्पेक्टर और महिला स्वास्थ्य कर्मियों की भी तैनाती है। माइनर ऑपरेशन थियेटर संचालित है। इसके बावजूद फार्मासिस्ट, चिकित्सकों और उन्नत जांच सुविधाओं की कमी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर डाल रही है।
एफआरयू-2 की एक्सरे मशीन को खेड़ीकलां सीएचसी में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अलावा बल्लभगढ़ से एक नर्सिंग ऑफिसर की तैनाती भी यहां की गई है। केंद्र में अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हैं और ऑपरेशन थियेटर नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं।-डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। ग्रामीण क्षेत्र की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने वाला खेड़ीकलां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गंभीर स्टाफ संकट से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि प्रतिदिन 800 से 1000 मरीजों की ओपीडी होने के बावजूद यहां मेडिकल ऑफिसर का एक भी नियमित पद भरा नहीं है। चिकित्सकों की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों या जिला नागरिक अस्पताल का रुख करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार केंद्र में मेडिकल ऑफिसर के सात पद स्वीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में सभी पद खाली हैं। यहां कार्यरत दो चिकित्सक डेपुटेशन पर भेजे गए हैं, जबकि दो चिकित्सक पीजी की पढ़ाई के लिए अवकाश पर हैं। ऐसे में मरीजों की बढ़ती संख्या का भार सीमित उपलब्ध स्टाफ पर आ गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
खेड़ीकलां सीएचसी ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों की स्वास्थ्य जरूरतों का प्रमुख केंद्र है। यहां सामान्य बीमारियों से लेकर गर्भवती महिलाओं और बच्चों के उपचार के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ता है और कई मामलों में रेफर करना मजबूरी बन जाता है।
डिलीवरी सुविधा मौजूद लेकिन शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं
केंद्र में डिलीवरी सुविधा उपलब्ध होने के कारण आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए यहां पहुंचती हैं। इसके बावजूद यहां शिशु रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत नहीं है। नवजात शिशुओं या बच्चों को विशेष चिकित्सा की आवश्यकता पड़ने पर उन्हें अन्य अस्पतालों में भेजना पड़ता है, जिससे समय और संसाधनों दोनों की चुनौती खड़ी होती है।
स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी चिंता का विषय
स्वास्थ्य केंद्र का भवन भी चिंता का विषय बना हुआ है। कई वर्ष पहले इसे जर्जर घोषित किया जा चुका है। कोरोना काल के दौरान मरम्मत कर स्थिति को कुछ समय के लिए संभाला गया था, लेकिन अब फिर भवन में टूट-फूट और जर्जरता के संकेत दिखाई देने लगे हैं। मरीजों और कर्मचारियों को भवन की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। हालांकि केंद्र में नर्सिंग स्टाफ के सभी आठ पद भरे हुए हैं। लैब टेक्नीशियन, डेंटल सर्जन, हेल्थ इंस्पेक्टर और महिला स्वास्थ्य कर्मियों की भी तैनाती है। माइनर ऑपरेशन थियेटर संचालित है। इसके बावजूद फार्मासिस्ट, चिकित्सकों और उन्नत जांच सुविधाओं की कमी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर असर डाल रही है।
एफआरयू-2 की एक्सरे मशीन को खेड़ीकलां सीएचसी में स्थानांतरित किया जाएगा। इसके अलावा बल्लभगढ़ से एक नर्सिंग ऑफिसर की तैनाती भी यहां की गई है। केंद्र में अन्य स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित नहीं हैं और ऑपरेशन थियेटर नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं।-डॉ. जयंत आहूजा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी