{"_id":"6a32f483986abed8600be399","slug":"rise-in-kidney-cancer-cases-experts-emphasize-regular-screening-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-72644-2026-06-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: किडनी कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी, नियमित जांच पर विशेषज्ञों का जोर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: किडनी कैंसर के मामलों में बढ़ोतरी, नियमित जांच पर विशेषज्ञों का जोर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
35 वर्ष की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच और अल्ट्रासाउंड जरूरी, शुरुआती पहचान से बढ़ती है उपचार की सफलता
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-86 स्थित एक निजी अस्पताल में पिछले कुछ समय से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनमें जांच के दौरान किडनी में गांठ, ट्यूमर या शुरुआती चरण का कैंसर पाया जा रहा है। इनमें कई मरीज कमर दर्द, पेशाब में खून आने, थकान और वजन कम होने जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में बीमारी का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी कैंसर शुरुआती अवस्था में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है, इसलिए समय पर जांच और स्क्रीनिंग ही इससे बचाव और सफल उपचार की सबसे बड़ी कुंजी है।
किडनी कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए एकॉर्ड अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने लोगों से इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि किडनी कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो कई मामलों में ऑपरेशन और आधुनिक उपचार पद्धतियों के जरिये इसका सफल इलाज संभव है।
डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि किडनी कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। कई मरीजों में बीमारी का पता सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान ही चलता है। हालांकि कमर में लगातार दर्द, पेशाब में खून आना, अत्यधिक थकान, भूख कम लगना और अचानक वजन घटना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि 35 वर्ष की आयु के बाद नियमित बॉडी चेकअप कराना आवश्यक है। जांच में अल्ट्रासाउंड को शामिल करने से किडनी संबंधी कई समस्याओं और कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता लगाया जा सकता है।
समय पर जांच से बची जान
53 वर्षीय हेमंत कुमार कई महीनों से कमर के एक तरफ दर्द और पेशाब में खून आने की समस्या से परेशान थे। जांच में उनकी दायी किडनी में ट्यूमर पाया गया, जिसकी बाद में कैंसर के रूप में पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने सफल सर्जरी कर कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाल दिया। अब मरीज स्वस्थ हैं और नियमित फॉलो-अप पर हैं।
जागरूकता से मिला नया जीवन
25 वर्षीय राहुल शर्मा को लगातार थकान, भूख कम लगना और वजन घटने की शिकायत थी। सामान्य जांच के दौरान उनकी बायी किडनी में शुरुआती चरण का कैंसर पाया गया। समय रहते उपचार शुरू होने से सर्जरी और दवाओं के जरिये बीमारी पर नियंत्रण पा लिया गया। चिकित्सकों का कहना है कि नियमित जांच और जागरूकता से किडनी कैंसर का समय रहते पता लगाकर मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है।
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-86 स्थित एक निजी अस्पताल में पिछले कुछ समय से ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, जिनमें जांच के दौरान किडनी में गांठ, ट्यूमर या शुरुआती चरण का कैंसर पाया जा रहा है। इनमें कई मरीज कमर दर्द, पेशाब में खून आने, थकान और वजन कम होने जैसी शिकायतों के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं, जबकि कुछ मामलों में बीमारी का पता नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान चल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी कैंसर शुरुआती अवस्था में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है, इसलिए समय पर जांच और स्क्रीनिंग ही इससे बचाव और सफल उपचार की सबसे बड़ी कुंजी है।
किडनी कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए एकॉर्ड अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के चेयरमैन डॉ. जितेंद्र कुमार ने लोगों से इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने और नियमित स्वास्थ्य जांच कराने की अपील की है। उनका कहना है कि किडनी कैंसर का शुरुआती चरण में पता चल जाए तो कई मामलों में ऑपरेशन और आधुनिक उपचार पद्धतियों के जरिये इसका सफल इलाज संभव है।
विज्ञापन
विज्ञापन
डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि किडनी कैंसर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती अवस्था में इसके स्पष्ट लक्षण सामने नहीं आते। कई मरीजों में बीमारी का पता सामान्य स्वास्थ्य जांच के दौरान ही चलता है। हालांकि कमर में लगातार दर्द, पेशाब में खून आना, अत्यधिक थकान, भूख कम लगना और अचानक वजन घटना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं।
उन्होंने बताया कि 35 वर्ष की आयु के बाद नियमित बॉडी चेकअप कराना आवश्यक है। जांच में अल्ट्रासाउंड को शामिल करने से किडनी संबंधी कई समस्याओं और कैंसर का शुरुआती अवस्था में पता लगाया जा सकता है।
समय पर जांच से बची जान
53 वर्षीय हेमंत कुमार कई महीनों से कमर के एक तरफ दर्द और पेशाब में खून आने की समस्या से परेशान थे। जांच में उनकी दायी किडनी में ट्यूमर पाया गया, जिसकी बाद में कैंसर के रूप में पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने सफल सर्जरी कर कैंसरग्रस्त हिस्से को निकाल दिया। अब मरीज स्वस्थ हैं और नियमित फॉलो-अप पर हैं।
जागरूकता से मिला नया जीवन
25 वर्षीय राहुल शर्मा को लगातार थकान, भूख कम लगना और वजन घटने की शिकायत थी। सामान्य जांच के दौरान उनकी बायी किडनी में शुरुआती चरण का कैंसर पाया गया। समय रहते उपचार शुरू होने से सर्जरी और दवाओं के जरिये बीमारी पर नियंत्रण पा लिया गया। चिकित्सकों का कहना है कि नियमित जांच और जागरूकता से किडनी कैंसर का समय रहते पता लगाकर मरीजों को नया जीवन दिया जा सकता है।