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Ghaziabad News: वर्षों से पूर्णता प्रमाण पत्र का इंतजार, सोसायटियों में विकास कार्य अटके
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गाजियाबाद। शहर की कई सोसायटियां और कॉलोनियां सालों से पूर्णता प्रमाण पत्र (सीसी) का इंतजार कर रही हैं। जीडीए में आवेदन के बावजूद मामलों का निस्तारण नहीं होने से कहीं हैंडओवर अटका है तो कहीं विकास कार्य पूरे नहीं हो पा रहे हैं। सीसी नहीं होने से निवासियों को संपत्ति के हस्तांतरण, विभिन्न विभागों की एनओसी और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों का आरोप है कि बिल्डर और प्राधिकरण के बीच खींचतान का खामियाजा वर्षों से निवासी भुगत रहे हैं।
अवंतिका-दो में 22 साल से इंतजार
अवंतिका एक्सटेंशन रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव मनोज तिवारी के अनुसार, कॉलोनी का नक्शा वर्ष 2004 में पास हुआ था, लेकिन अभी तक पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं मिला है। उनका कहना है कि सीसी नहीं मिलने के कारण कॉलोनी का विधिवत अधिग्रहण और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आरोप लगाया कि सीसी नहीं होने के बावजूद कई फ्लैट और प्लॉटों की बिक्री की गई। उनका दावा है कि बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर संपत्तियों का लेनदेन किया गया।
मोती रेजीडेंसी में 12 साल से अटका मामला
हम-तुम रोड स्थित मोती रेजीडेंसी के निवासी भी पिछले 12 वर्षों से सीसी का इंतजार कर रहे हैं। निवासी लगातार सप्ताहांत पर प्रदर्शन कर रहे हैं। निवासी रमेश पंत का कहना है कि सीसी नहीं मिलने से अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन का गठन नहीं हो पा रहा है। उनका आरोप है कि बिल्डर की मनमानी के कारण निवासी परेशान हैं और संपत्ति के लेनदेन में भी दिक्कत आती है। मोती रेजीडेंसी के बिल्डर असीम आनंद अग्रवाल का कहना है कि सीसी के लिए काफी समय पहले आवेदन किया जा चुका है। अब जीडीए को आवेदन की जांच कर आगे की प्रक्रिया पूरी करनी है।
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गौर कैस्केड में 2019 से इंतजार
राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैस्केड सोसायटी को भी वर्ष 2019 से सीसी नहीं मिला है। पूर्व एओए सचिव पुनीत गोयल के अनुसार, सीसी नहीं होने के कारण ग्राउंड वाटर, सीटीओ और बिजली कनेक्शन से संबंधित एनओसी की प्रक्रियाओं में दिक्कत आती है। केएम रेजीडेंसी सोसायटी में बिल्डर को वर्ष 2015 तक सभी काम पूरे करने थे, लेकिन कई काम अब तक अधूरे हैं। आरडब्ल्यूए वेलफेयर के सुधीर त्यागी का कहना है कि डीएम, जीडीए वीसी, मंडलायुक्त और डिप्टी रजिस्ट्रार समेत कई अधिकारियों को 20 से अधिक बार पत्र दिया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब काम ही पूरे नहीं हुए तो सीसी मिलना तो दूर की बात है।
यह होता है पूर्णता प्रमाण पत्र
पूर्णता प्रमाण पत्र ऐसा दस्तावेज है, जिससे प्रमाणित होता है कि स्वीकृत भवन या परियोजना का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और संबंधित नियमों के अनुरूप पूरा किया गया है। इसके लिए निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित विकास प्राधिकरण या स्थानीय निकाय में आवेदन किया जाता है। इसके बाद अधिकारी स्थल और स्वीकृत मानकों के अनुसार निर्माण की जांच करते हैं। मानक पूरे होने पर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
सीसी नहीं मिलने से क्या दिक्कत
सीसी नहीं होने पर परियोजना का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा हुआ है या नहीं, इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हो पाती। इससे हैंडओवर, कॉमन एरिया और अन्य परिसंपत्तियों के हस्तांतरण, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण, भूजल और विद्युत लोड से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
80 प्रतिशत से अधिक सोसायटियों में सीसी लंबित होने का दावा
फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन के अध्यक्ष सचिन शर्मा का दावा है कि क्षेत्र की 80 प्रतिशत से अधिक सोसायटियों के सीसी लंबित हैं। उनका आरोप है कि बिल्डर और जीडीए की खींचतान के कारण मामले वर्षों तक अटके रहते हैं और इसका खामियाजा निवासियों को भुगतना पड़ता है।
जीडीए सचिव विवेक मिश्र का कहना है कि जीडीए नक्शा पास करने के बाद स्वीकृत कार्य पूरे होने पर सीसी जारी करता है। जब तक निर्धारित कार्य पूरे नहीं होते, सीसी जारी नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में लोगों की शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है। प्राधिकरण की जमीन से जुड़े मामलों में बकाया राशि का भुगतान पूरा होने के बाद ही सीसी जारी करने का नियम है।
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अवंतिका-दो में 22 साल से इंतजार
अवंतिका एक्सटेंशन रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के महासचिव मनोज तिवारी के अनुसार, कॉलोनी का नक्शा वर्ष 2004 में पास हुआ था, लेकिन अभी तक पूर्णता प्रमाण पत्र नहीं मिला है। उनका कहना है कि सीसी नहीं मिलने के कारण कॉलोनी का विधिवत अधिग्रहण और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। आरोप लगाया कि सीसी नहीं होने के बावजूद कई फ्लैट और प्लॉटों की बिक्री की गई। उनका दावा है कि बिल्डर और अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर संपत्तियों का लेनदेन किया गया।
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मोती रेजीडेंसी में 12 साल से अटका मामला
हम-तुम रोड स्थित मोती रेजीडेंसी के निवासी भी पिछले 12 वर्षों से सीसी का इंतजार कर रहे हैं। निवासी लगातार सप्ताहांत पर प्रदर्शन कर रहे हैं। निवासी रमेश पंत का कहना है कि सीसी नहीं मिलने से अपार्टमेंट ऑनर्स एसोसिएशन का गठन नहीं हो पा रहा है। उनका आरोप है कि बिल्डर की मनमानी के कारण निवासी परेशान हैं और संपत्ति के लेनदेन में भी दिक्कत आती है। मोती रेजीडेंसी के बिल्डर असीम आनंद अग्रवाल का कहना है कि सीसी के लिए काफी समय पहले आवेदन किया जा चुका है। अब जीडीए को आवेदन की जांच कर आगे की प्रक्रिया पूरी करनी है।
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गौर कैस्केड में 2019 से इंतजार
राजनगर एक्सटेंशन स्थित गौर कैस्केड सोसायटी को भी वर्ष 2019 से सीसी नहीं मिला है। पूर्व एओए सचिव पुनीत गोयल के अनुसार, सीसी नहीं होने के कारण ग्राउंड वाटर, सीटीओ और बिजली कनेक्शन से संबंधित एनओसी की प्रक्रियाओं में दिक्कत आती है। केएम रेजीडेंसी सोसायटी में बिल्डर को वर्ष 2015 तक सभी काम पूरे करने थे, लेकिन कई काम अब तक अधूरे हैं। आरडब्ल्यूए वेलफेयर के सुधीर त्यागी का कहना है कि डीएम, जीडीए वीसी, मंडलायुक्त और डिप्टी रजिस्ट्रार समेत कई अधिकारियों को 20 से अधिक बार पत्र दिया जा चुका है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका कहना है कि जब काम ही पूरे नहीं हुए तो सीसी मिलना तो दूर की बात है।
यह होता है पूर्णता प्रमाण पत्र
पूर्णता प्रमाण पत्र ऐसा दस्तावेज है, जिससे प्रमाणित होता है कि स्वीकृत भवन या परियोजना का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और संबंधित नियमों के अनुरूप पूरा किया गया है। इसके लिए निर्माण पूरा होने के बाद संबंधित विकास प्राधिकरण या स्थानीय निकाय में आवेदन किया जाता है। इसके बाद अधिकारी स्थल और स्वीकृत मानकों के अनुसार निर्माण की जांच करते हैं। मानक पूरे होने पर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी किया जाता है।
सीसी नहीं मिलने से क्या दिक्कत
सीसी नहीं होने पर परियोजना का निर्माण स्वीकृत मानचित्र और निर्धारित मानकों के अनुरूप पूरा हुआ है या नहीं, इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं हो पाती। इससे हैंडओवर, कॉमन एरिया और अन्य परिसंपत्तियों के हस्तांतरण, अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण, भूजल और विद्युत लोड से जुड़ी प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं।
80 प्रतिशत से अधिक सोसायटियों में सीसी लंबित होने का दावा
फेडरेशन ऑफ राजनगर एक्सटेंशन के अध्यक्ष सचिन शर्मा का दावा है कि क्षेत्र की 80 प्रतिशत से अधिक सोसायटियों के सीसी लंबित हैं। उनका आरोप है कि बिल्डर और जीडीए की खींचतान के कारण मामले वर्षों तक अटके रहते हैं और इसका खामियाजा निवासियों को भुगतना पड़ता है।
जीडीए सचिव विवेक मिश्र का कहना है कि जीडीए नक्शा पास करने के बाद स्वीकृत कार्य पूरे होने पर सीसी जारी करता है। जब तक निर्धारित कार्य पूरे नहीं होते, सीसी जारी नहीं किया जा सकता। ऐसे मामलों में लोगों की शिकायत मिलने पर कार्रवाई भी की जाती है। प्राधिकरण की जमीन से जुड़े मामलों में बकाया राशि का भुगतान पूरा होने के बाद ही सीसी जारी करने का नियम है।