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Gurugram News: लखपति दीदी की चंदेरी साड़ियों और ढोकरा आर्ट की मेले में धूम
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मध्यप्रदेश की स्टॉल पर चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों की खास मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-29 स्थित लैजर वैली ग्राउंड में चल रहे सरस आजीविका मेला 2026 ग्रामीण हुनर, पारंपरिक शिल्प और स्वदेशी उत्पादों का भव्य संगम बनकर उभरा है। देशभर से आईं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पादों और कला कौशल से मेले को जीवंत बना दिया है। पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम यहां विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मध्यप्रदेश की स्टॉल पर चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों की खास मांग देखने को मिल रही है। हैंडलूम तकनीक और प्राकृतिक रंगों से तैयार ये साड़ियां हल्की, आरामदायक और हर मौसम के लिए उपयुक्त हैं। प्लेन साड़ी एक से दो दिन में तैयार हो जाती हैं, जबकि प्रिंटेड व बॉर्डर वाली साड़ियों को बनाने में लगभग 3 दिन लगते हैं। यहां कॉटन साड़ी, महेश्वरी सिल्क, डोला सिल्क और चंदेरी सूट भी उपलब्ध हैं। खादी की कुर्तियां भी महिलाओं को खूब पसंद आ रही हैं, जिन पर हैंडलूम से कढ़ाई की जाती है। सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध पंजाबी गायक करण रंधावा ने अपने लोकप्रिय गीत फुलकारी और न सुन मित्रां दा सहित कई प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।
4000 वर्ष पुरानी मूर्तियां बनीं खास पसंद
छत्तीसगढ़ की स्टॉल पर कड़ी पत्ता, टमाटर व अदरक के अचार के साथ पारंपरिक दालें, राजमा और जड़ी-बूटियां लोगों को लुभा रही हैं। साथ ही 4000 वर्ष पुरानी ढोकरा कला की धातु मूर्तियां और होम डेकोर सामग्री भी खास पसंद की जा रही हैं। यह मेला ग्रामीण परंपरा और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रतीक बन गया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सेक्टर-29 स्थित लैजर वैली ग्राउंड में चल रहे सरस आजीविका मेला 2026 ग्रामीण हुनर, पारंपरिक शिल्प और स्वदेशी उत्पादों का भव्य संगम बनकर उभरा है। देशभर से आईं स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपने उत्पादों और कला कौशल से मेले को जीवंत बना दिया है। पारंपरिक परिधान, हस्तशिल्प, खाद्य उत्पाद और सांस्कृतिक कार्यक्रम यहां विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।
मध्यप्रदेश की स्टॉल पर चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों की खास मांग देखने को मिल रही है। हैंडलूम तकनीक और प्राकृतिक रंगों से तैयार ये साड़ियां हल्की, आरामदायक और हर मौसम के लिए उपयुक्त हैं। प्लेन साड़ी एक से दो दिन में तैयार हो जाती हैं, जबकि प्रिंटेड व बॉर्डर वाली साड़ियों को बनाने में लगभग 3 दिन लगते हैं। यहां कॉटन साड़ी, महेश्वरी सिल्क, डोला सिल्क और चंदेरी सूट भी उपलब्ध हैं। खादी की कुर्तियां भी महिलाओं को खूब पसंद आ रही हैं, जिन पर हैंडलूम से कढ़ाई की जाती है। सांस्कृतिक संध्या में प्रसिद्ध पंजाबी गायक करण रंधावा ने अपने लोकप्रिय गीत फुलकारी और न सुन मित्रां दा सहित कई प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया। पूरा पंडाल तालियों और उत्साह से गूंज उठा।
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4000 वर्ष पुरानी मूर्तियां बनीं खास पसंद
छत्तीसगढ़ की स्टॉल पर कड़ी पत्ता, टमाटर व अदरक के अचार के साथ पारंपरिक दालें, राजमा और जड़ी-बूटियां लोगों को लुभा रही हैं। साथ ही 4000 वर्ष पुरानी ढोकरा कला की धातु मूर्तियां और होम डेकोर सामग्री भी खास पसंद की जा रही हैं। यह मेला ग्रामीण परंपरा और सांस्कृतिक विविधता का जीवंत प्रतीक बन गया है।