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Gurugram News: फर्जी वोटर कार्ड मामले में पूर्व मंत्री के खिलाफ याचिका खारिज
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फर्जी तरीके से ग्रांट और फर्जी वोट बनवाने में दायर की थी याचिका
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया के खिलाफ लोगों के फर्जी वोट बनवाने और फर्जी तरीके से ग्रांट दिलवाने के मामले में दायर की याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार की अदालत ने दिया है।
याचिकाकर्ता ओम प्रकाश ने अदालत में दायर की याचिका में आरोप लगाया था कि सुखबीर कटारिया ने दस्तावेजों में हेरफेर कर मतदाता सूची में दो अन्य लोगों की गलत प्रविष्टियां कराईं। सेक्टर 12 निवासी परीक्षित व मोहित को फर्जी तरीके से घर बनवाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की ग्रांट दिलवाई। याचिकाकर्ता ने 2022 में अदालत से मांग की थी कि इसमें मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। अदालत के आदेश पर पुलिस ने तीन बार रिपोर्ट अदालत में जमा करी थी। अनुदान राशि मुख्य सचिव पंचायत विभाग द्वारा स्वीकृति व डीसी, तहसील के द्वारा वेरीफाई करने के बाद आवेदक के खाते में दी गई थी। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फर्जी वोट बनवाने के मामले में याचिकाकर्ता को डीसी कार्यालय व चुनाव आयोग में अपील करने के लिए स्वतंत्र है। कहा कि वोट बनाने का काम और उसे दर्ज करने का काम चुनाव आयोग व डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का है।
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया के खिलाफ लोगों के फर्जी वोट बनवाने और फर्जी तरीके से ग्रांट दिलवाने के मामले में दायर की याचिका को जिला अदालत ने खारिज कर दिया है। यह आदेश अतिरिक्त मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार की अदालत ने दिया है।
याचिकाकर्ता ओम प्रकाश ने अदालत में दायर की याचिका में आरोप लगाया था कि सुखबीर कटारिया ने दस्तावेजों में हेरफेर कर मतदाता सूची में दो अन्य लोगों की गलत प्रविष्टियां कराईं। सेक्टर 12 निवासी परीक्षित व मोहित को फर्जी तरीके से घर बनवाने के नाम पर एक-एक लाख रुपये की ग्रांट दिलवाई। याचिकाकर्ता ने 2022 में अदालत से मांग की थी कि इसमें मामला दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। अदालत के आदेश पर पुलिस ने तीन बार रिपोर्ट अदालत में जमा करी थी। अनुदान राशि मुख्य सचिव पंचायत विभाग द्वारा स्वीकृति व डीसी, तहसील के द्वारा वेरीफाई करने के बाद आवेदक के खाते में दी गई थी। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि फर्जी वोट बनवाने के मामले में याचिकाकर्ता को डीसी कार्यालय व चुनाव आयोग में अपील करने के लिए स्वतंत्र है। कहा कि वोट बनाने का काम और उसे दर्ज करने का काम चुनाव आयोग व डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट का है।
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