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रिचा ग्लोबल फैक्टरी हिंसा: विजेंद्र की तीसरी जमानत याचिका खारिज
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर स्थित रिचा ग्लोबल फैक्टरी हिंसा मामले में आरोपी विजेंद्र की तीसरी जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने परिस्थितियों में कोई नया बदलाव न होने के कारण जमानत का आधार नहीं माना।
आरोपी पर नौ अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन को हिंसक बनाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप में भड़काऊ संदेश भेजने का आरोप है। उसके मोबाइल से फैक्टरी में आग लगाने, अधिकारियों पर हमला करने और पेट्रोल बम फेंकने जैसे संदेश भेजे गए। पुलिस ने यह मोबाइल उसके कब्जे से बरामद किया।
बचाव पक्ष ने प्रदर्शन को सांविधानिक अधिकार बताया, लेकिन अदालत ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक माना। अदालत ने आरोपी की भूमिका को प्रथमदृष्टया गंभीर माना और समानता का आधार लागू नहीं होता कहा। केवल चालान पेश होने या लंबी न्यायिक हिरासत के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तीसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल चालान पेश हो जाने या लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। मामले के तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तीसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी।
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गुरुग्राम। आईएमटी मानेसर स्थित रिचा ग्लोबल फैक्टरी हिंसा मामले में आरोपी विजेंद्र की तीसरी जमानत याचिका जिला अदालत ने खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश डॉ. गगन गीत कौर की अदालत ने परिस्थितियों में कोई नया बदलाव न होने के कारण जमानत का आधार नहीं माना।
आरोपी पर नौ अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन को हिंसक बनाने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप में भड़काऊ संदेश भेजने का आरोप है। उसके मोबाइल से फैक्टरी में आग लगाने, अधिकारियों पर हमला करने और पेट्रोल बम फेंकने जैसे संदेश भेजे गए। पुलिस ने यह मोबाइल उसके कब्जे से बरामद किया।
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बचाव पक्ष ने प्रदर्शन को सांविधानिक अधिकार बताया, लेकिन अदालत ने सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी आवश्यक माना। अदालत ने आरोपी की भूमिका को प्रथमदृष्टया गंभीर माना और समानता का आधार लागू नहीं होता कहा। केवल चालान पेश होने या लंबी न्यायिक हिरासत के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती है। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तीसरी जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल चालान पेश हो जाने या लंबे समय से न्यायिक हिरासत में रहने के आधार पर जमानत नहीं दी जा सकती। मामले के तथ्यों और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तीसरी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी।
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