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सद्भाव और सामाजिक समानता से ही बनेगा बेहतर भारत : एलजी संधू
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किंग्सवे कैंप स्थित गांधी आश्रम में सद्भावना सम्मेलन का उद्घाटन
छुआछूत के खिलाफ सरदार तेजा सिंह समुंदरी के संघर्ष को किया याद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने किंग्सवे कैंप हरिजन सेवक संघ के ऐतिहासिक गांधी आश्रम में सद्भावना सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी के छुआछूत विरोधी संघर्ष को महात्मा गांधी की सामाजिक समानता की विरासत से जोड़ा। कहा कि बेहतर भारत का सपना सामाजिक सद्भाव और हर व्यक्ति की गरिमा से अलग नहीं हो सकता।
एलजी ने बताया कि जब सरदार तेजा सिंह समुंदरी को पता चला कि उनके क्षेत्र में दलितों को सार्वजनिक कुएं से पानी भरने की अनुमति नहीं है, तो वे खुद उन्हें कुएं तक लेकर गए और सबसे पहले पानी पिया। 1923 में जलियांवाला बाग में दलितों की बड़ी सभा हुई थी, जिसकी अध्यक्षता उन्होंने की थी।
एलजी ने कहा कि हरिजन सेवक संघ की स्थापना 1932 में महात्मा गांधी के प्रयासों से हुई। उन्होंने पूना पैक्ट, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉ. बीआर आंबेडकर की भूमिका का भी उल्लेख किया। अक्तूबर 1920 की घटना सुनाई, जब मजहबी और रविदासी सिखों की ओर से श्री दरबार साहिब में कराह प्रसाद चढ़ाया गया था।
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एलजी ने कहा कि सद्भाव का अर्थ केवल साथ रहना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को सम्मान, गरिमा और अपनापन देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्याय, सद्भाव और मानव सेवा पर आधारित भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए युवाओं से इन मूल्यों को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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छुआछूत के खिलाफ सरदार तेजा सिंह समुंदरी के संघर्ष को किया याद
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। एलजी तरनजीत सिंह संधू ने किंग्सवे कैंप हरिजन सेवक संघ के ऐतिहासिक गांधी आश्रम में सद्भावना सम्मेलन का उद्घाटन किया। उन्होंने अपने दादा सरदार तेजा सिंह समुंदरी के छुआछूत विरोधी संघर्ष को महात्मा गांधी की सामाजिक समानता की विरासत से जोड़ा। कहा कि बेहतर भारत का सपना सामाजिक सद्भाव और हर व्यक्ति की गरिमा से अलग नहीं हो सकता।
एलजी ने बताया कि जब सरदार तेजा सिंह समुंदरी को पता चला कि उनके क्षेत्र में दलितों को सार्वजनिक कुएं से पानी भरने की अनुमति नहीं है, तो वे खुद उन्हें कुएं तक लेकर गए और सबसे पहले पानी पिया। 1923 में जलियांवाला बाग में दलितों की बड़ी सभा हुई थी, जिसकी अध्यक्षता उन्होंने की थी।
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एलजी ने कहा कि हरिजन सेवक संघ की स्थापना 1932 में महात्मा गांधी के प्रयासों से हुई। उन्होंने पूना पैक्ट, पंडित मदन मोहन मालवीय और डॉ. बीआर आंबेडकर की भूमिका का भी उल्लेख किया। अक्तूबर 1920 की घटना सुनाई, जब मजहबी और रविदासी सिखों की ओर से श्री दरबार साहिब में कराह प्रसाद चढ़ाया गया था।
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एलजी ने कहा कि सद्भाव का अर्थ केवल साथ रहना नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को सम्मान, गरिमा और अपनापन देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्याय, सद्भाव और मानव सेवा पर आधारित भारत के आह्वान का उल्लेख करते हुए युवाओं से इन मूल्यों को अपनाने की अपील की। कार्यक्रम में हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. शंकर कुमार सान्याल समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।