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Delhi NCR News: 2020 उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और 2019 जामिया हिंसा की एसआईटी जांच की याचिकाओं पर सुनवाई 23 को
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) गठन की मांग वाली कई याचिकाओं पर अगली सुनवाई 23 जनवरी को निर्धारित की है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की अध्यक्षता वाली समन्वय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि समन्वय पीठ ने 11 दिसंबर 2025 को मामले को आगे की दलीलों के लिए अगली तारीख पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसी आदेश के अनुपालन में यह मामला उसी पीठ के समक्ष ही रखा जाए। याचिकाकर्ताओं ने दंगों की निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय या दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र एसआईटी गठित करने की मांग की है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिका में विशेष रूप से मांग की गई है कि एसआईटी में दिल्ली पुलिस के किसी भी अधिकारी को शामिल न किया जाए। इसके अलावा अजय गौतम द्वारा दायर याचिका में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की गई है। ये सभी याचिकाएं 2020 में ही दायर की गई थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से इनकी सुनवाई लंबित रही।
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नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने फरवरी 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों और दिसंबर 2019 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय परिसर में हुई हिंसा की स्वतंत्र विशेष जांच दल (एसआईटी) गठन की मांग वाली कई याचिकाओं पर अगली सुनवाई 23 जनवरी को निर्धारित की है। न्यायमूर्ति नवीन चावला और न्यायमूर्ति रविंदर डुडेजा की पीठ ने मामले को मुख्य न्यायाधीश के निर्देशानुसार न्यायमूर्ति विवेक चौधरी की अध्यक्षता वाली समन्वय पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लिया कि समन्वय पीठ ने 11 दिसंबर 2025 को मामले को आगे की दलीलों के लिए अगली तारीख पर सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया था। पीठ ने स्पष्ट किया कि उसी आदेश के अनुपालन में यह मामला उसी पीठ के समक्ष ही रखा जाए। याचिकाकर्ताओं ने दंगों की निष्पक्ष जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय या दिल्ली हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र एसआईटी गठित करने की मांग की है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद द्वारा दायर याचिका में विशेष रूप से मांग की गई है कि एसआईटी में दिल्ली पुलिस के किसी भी अधिकारी को शामिल न किया जाए। इसके अलावा अजय गौतम द्वारा दायर याचिका में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कराने की मांग की गई है। ये सभी याचिकाएं 2020 में ही दायर की गई थीं, लेकिन विभिन्न कारणों से इनकी सुनवाई लंबित रही।
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