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हिदायत: दिल्ली एयरपोर्ट के पास महिपालपुर में बारिश से जलभराव पर हाईकोर्ट सख्त, एनएचएआई-डायल पर जताई नाराजगी

Wed, 23 Sep 2026 06:50 AM IST
दुष्यंत शर्मा गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Sep 2026 06:50 AM IST
सार

अदालत ने कहा कि महिपालपुर क्रॉसिंग और आसपास के इलाकों में जलभराव की तस्वीरें देखकर संबंधित एजेंसियों को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके बावजूद ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी एजेंसी समस्या की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। 

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High Court takes a tough stance on waterlogging in Mahipalpur near Delhi Airport
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI

विस्तार

एयरपोर्ट के पास महिपालपुर इलाके में बार-बार होने वाले गंभीर जलभराव और उससे लगने वाले ट्रैफिक जाम के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई है। 

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न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ सोशल ज्यूरिस्ट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। अदालत ने कहा कि महिपालपुर क्रॉसिंग और आसपास के इलाकों में जलभराव की तस्वीरें देखकर संबंधित एजेंसियों को गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए थी। इसके बावजूद ऐसा प्रतीत होता है कि कोई भी एजेंसी समस्या की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं है। 
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अदालत ने यह भी कहा कि एयरोसिटी क्षेत्र में विकास कार्यों और राष्ट्रीय राजमार्ग पर किए गए बदलावों से मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके कारण बारिश का पानी नजफगढ़ नाले तक सुचारू रूप से नहीं पहुंच पा रहा।
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‘गुड फेथ’ में प्रस्ताव, लेकिन काम की प्रगति नहीं : सुनवाई के दौरान बताया गया कि डायल ने स्थायी समाधान के तौर पर एनएच-48 पर शंकर विहार से रेडिसन सर्कल तक करीब 3.5 किलोमीटर लंबा स्टॉर्म वॉटर ड्रेन बनाने का प्रस्ताव दिया था। इसे ‘गुड फेथ’ में किया गया प्रस्ताव बताया गया, लेकिन अदालत ने पाया कि इस दिशा में अब तक ठोस प्रगति दिखाई नहीं दे रही है।

शॉर्ट टर्म उपाय भी कागजों तक सीमित
एनएचएआई ने तत्काल राहत के लिए समालखा और महिपालपुर जंक्शन पर पंपिंग स्टेशन स्थापित करने का सुझाव दिया है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के तहत महिपालपुर नाले के चोक पॉइंट खत्म करने, द्वारका एक्सप्रेसवे के ड्रेनेज सिस्टम की दोबारा योजना बनाने, समालखा और नजफगढ़ नाले की नियमित सफाई तथा रेलवे के ड्रेनेज सिस्टम में सुधार जैसे उपाय सुझाए गए हैं। 

अदालत ने कहा कि कई बैठकों के बावजूद अब तक ज्यादातर कार्रवाई कागजी स्तर पर ही हुई है। जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा और काम पूरा करने की समयसीमा भी तय नहीं की गई। एनएचएआई के वकील की उपस्थिति को लेकर भी अदालत ने नाराजगी जताई।

मुख्य सचिव 15 अक्तूबर तक दो बैठकें बुलाएं
खंडपीठ ने दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह 15 अक्तूबर तक दो और बैठकें बुलाकर शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म उपायों के साथ प्रत्येक काम के लिए जिम्मेदार एजेंसी तय करें। सभी संबंधित एजेंसियों को समयसीमा के साथ स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। 


मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि तब तक ठोस प्रस्ताव सामने नहीं आया तो सख्त आदेश पारित किए जा सकते हैं। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है।

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