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Delhi: यमुना नदी में घट रही हैं देसी मछलियां, NGT का निर्देश- प्रवासन के लिए केंद्र और राज्य सरकार उठाएं कदम

गौरव बाजपेई, अमर उजाला, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 31 Jan 2026 02:12 AM IST
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सार

यह मामला अमर उजाला में 9 मई 2024 को प्रकाशित समाचार पर स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया गया था, जिसमें यमुना में 126 मछली प्रजातियों की पहचान की गई थी।
 

indigenous fish in the Yamuna decreasing, NGT has directed the central and state governments to take action
यमुना नदी file - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना नदी में देसी मछलियों की घटती संख्या और विदेशी प्रजातियों के बढ़ते प्रभाव को गंभीर मुद्दा मानते हुए केंद्र और राज्य सरकारों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। 29 जनवरी को दिए फैसले में एनजीटी ने प्रदूषण नियंत्रण, मछली प्रजनन और प्रवासन सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाने का आदेश दिया। यह मामला अमर उजाला में 9 मई 2024 को प्रकाशित समाचार पर स्वत: संज्ञान लेकर शुरू किया गया था, जिसमें यमुना में 126 मछली प्रजातियों की पहचान की गई थी।

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एनजीटी के चेयरपर्सन न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की बेंच ने कहा कि यमुना में देशी मछलियां जैसे कैटला, रोहू, नयन, पादिन, गोन्च, चितल, रेंगन, रीठा, बामचर और महाशीर की संख्या में गिरावट आई है, जबकि विदेशी प्रजातियां जैसे कॉमन कार्प, सिल्वर कार्प, बिग हेड, थाई मंगूर, ग्रास कार्प, टिलापिया, क्रोकोडाइल फिश और बास बढ़ रही हैं। केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीआईएफआरआई), प्रयागराज के सर्वेक्षण के अनुसार, यमुना के 1368 किमी खंड (यमुनोत्री से प्रयागराज तक) में प्रदूषण मुख्य कारण है, खासकर दिल्ली से मथुरा तक का खंड जहां वजीराबाद से ओखला तक केवल थाई मंगूर जैसी प्रदूषण-सहनशील मछली ही जीवित रह पाती है।
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गंभीर प्रदूषण के चलते कम हो रहीं मछलियां
फैसले में प्रदूषण, बांध निर्माण, आवास परिवर्तन, अत्यधिक मछली पकड़ना, अवैध जालों का उपयोग और जलवायु परिवर्तन को देसी मछलियों की गिरावट के प्रमुख कारण बताया गया। सीपीसीबी की रिपोर्ट से पता चला कि कई स्थानों पर घुलित ऑक्सीजन और कुल कोलीफॉर्म के स्तर मानकों से नीचे हैं, जो मछलियों के अस्तित्व के लिए घातक हैं। विदेशी मछलियां व्यापक पर्यावरणीय परिस्थितियों में जीवित रहने, तेजी से प्रजनन करने और विविध भोजन पर निर्भर होने के कारण बढ़ रही हैं।

इन सरकारों और विभागों को दिए निर्देश
राज्य सरकारें (उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश) सीआईएफआरआई की सिफारिशों पर अमल करें, जैसे अवैध मछली पकड़ने के जालों पर रोक, मछली प्रतिबंध अवधि में निगरानी बढ़ाना, महाशीर और इंडियन मेजर कार्प्स का रैंचिंग (बीज डालना), विदेशी मछलियों को धार्मिक अनुष्ठानों में छोड़ने पर प्रतिबंध और जन जागरूकता अभियान।

सीपीसीबी, एनएमसीजी और दिल्ली जल बोर्ड
सीवेज और औद्योगिक कचरे पर सख्ती, एसटीपी की स्थापना तेज करना और पानी की गुणवत्ता की निरंतर निगरानी।

जल शक्ति मंत्रालय, पर्यावरण मंत्रालय और सिंचाई विभाग
यमुना में न्यूनतम जल प्रवाह (ई-फ्लो) सुनिश्चित करना, रेत खनन पर रोक और बैराजों पर फिश लैडर बनाने का आदेश।

मत्स्य विभाग
विदेशी मछलियों जैसे थाई मंगूर की खेती पर प्रतिबंध लागू करना, देशी मछलियों की हैचरी स्थापित करना और रैंचिंग कार्यक्रम को मजबूत करना। विभाग ने पहले ही पीएमएमएसवाई के तहत 1386 लाख फिंगरलिंग्स का रैंचिंग किया है, जिसमें यमुना भी शामिल है।

हिंडन नदी बचाने को सहारनपुर से चली पदयात्रा दिल्ली पहुंची
 हिंडन नदी को बचाने के लिए पश्चिमांचल विकास परिषद की 23 जनवरी से सहारनपुर से शुरू हुई पद यात्रा शुक्रवार को दिल्ली पहुंची। इसमें शामिल लोगों के हाथों में हिंडन बचाओ-पश्चिमांचल बचाओ, नदियों को बचाओ सरीखे नारे लिखी तख्तियां थीं। इनकी कोशिश संसद तक मार्च करने की थी, लेकिन पुलिस ने इनको संसद मार्ग पर रोक लिया। इसके बाद पदयात्रियों ने जंतर मंतर पर अपनी आवाज बुलंद की। 

पदयात्रा में शामिल नितिन स्वामी व गौरव पांचाल ने बताया कि पश्चिम उत्तर प्रदेश की प्रमुख नदियां हिंडन, कृष्णा, ढमोला, आदि नदियां प्रदूषित हो चुकी हैं। इन्हें बचाना हमारा दायित्व है। आंदोलन में शामिल लोगों ने कहा कि हिंडन समेत दूसरी नदियों को पुनर्जीवित किया जाए। इसके अलावा एनजीटी की निगरानी में एक कमेटी का गठन हो।

 

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