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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Late-night use of mobile phones and laptops is robbing people of sleep, leading to a rise in insomnia patients

Delhi NCR News: देर रात मोबाइल-लैपटॉप उड़ा रहा नींद, बढ़ रहे अनिद्रा के मरीज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 06:24 PM IST
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हाई बीपी, मधुमेह और हृदय रोग का बढ़ा खतरा
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सोनम प्रतिहस्त
नई दिल्ली। देर रात तक मोबाइल, लैपटॉप, सोशल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से लोगों की नींद उड़ रही है। बढ़ता तनाव व अनियमित दिनचर्या भी इसका कारण है। राजधानी के अस्पतालों में स्लीप डिसऑर्डर (अनिद्रा) के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि स्क्रीन की नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन को बाधित करती है, जिससे समय पर नींद नहीं आती और धीरे-धीरे अनिद्रा की समस्या बन जाती है। लगातार कम नींद सिर्फ थकान नहीं, बल्कि हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का भी कारण बन रही है। लंबी अवधि में एकाग्रता में कमी, चिड़चिड़ापन, याददाश्त कमजोर होना और कार्यक्षमता पर असर पड़ने की भी आशंका जताई गई है।
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केस
केस स्टडी-1:
पूर्वी दिल्ली के 28 वर्षीय एक निजी आईटी कंपनी में कार्यरत एक युवक रोज रात दो बजे तक लैपटॉप पर काम करने के बाद मोबाइल पर सोशल मीडिया देखते थे। कुछ महीनों बाद उन्हें रात में नींद न आने, सुबह सिरदर्द और दिनभर थकान की शिकायत रहने लगी। जीटीबी अस्पताल में जांच के बाद डॉक्टरों ने इसे स्लीप डिसऑर्डर बताया। स्क्रीन टाइम कम करने और नियमित दिनचर्या अपनाने के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ।
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केस स्टडी-2:
35 वर्षीय एक महिला जो एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं, देर रात तक लैपटॉप पर काम करती थीं। धीरे-धीरे उन्हें रात में कई बार नींद टूटने, चिड़चिड़ापन और दिनभर सुस्ती की समस्या होने लगी। डॉक्टर की सलाह पर उन्होंने सोने का निश्चित समय तय किया, सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल बंद किया और नियमित व्यायाम शुरू किया। कुछ सप्ताह में उनकी नींद सामान्य होने लगी।


विशेषज्ञ की राय
एक स्वस्थ व्यक्ति को हर दिन सात से आठ घंटे की नींद लेनी चाहिए। सोने से कम से कम एक घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल बंद कर दें। यदि लगातार दो से तीन सप्ताह तक नींद नहीं आ रही तो इसको नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ से परामर्श और जीवनशैली में बदलाव से स्लीप डिसऑर्डर को नियंत्रित किया जा सकता है।
डॉ. प्रवीण कुमार, अतिरिक्त चिकित्सा अधीक्षक, जीटीबी अस्पताल
- क्या कहते हैं विशेषज्ञ
-रोजाना एक ही समय पर सोएं और जागें।
-शाम के बाद चाय-कॉफी का सीमित सेवन करें।
नियमित व्यायाम करें और सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाए रखें।
-अच्छी और पर्याप्त नींद ही बेहतर शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य की सबसे मजबूत नींव है।
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