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Noida News: वेबसाइट पर बढ़ी फीस अपलोड नहीं करने वालों पर होगी कार्रवाई
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माई सिटी रिपोर्टर
ग्रेटर नोएडा। जिला शुल्क नियामक समिति की बैठक के बाद जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से निजी स्कूलों को बढ़ी फीस अपलोड करने को कहा गया है। साथ ही हिदायत दी गई है कि अगर ऐसा नहीं किया गया तो कार्रवाई होगी। अधिकारियों ने बताया कि जिलाधिकारी मेधा रूपम की अध्यक्षता वाली कमेटी की सिफारिशों की जानकारी सभी स्कूलों को भेज दी गई है। यदि किसी स्कूल ने इन सिफारिशों को मानने से इन्कार किया तो कड़ी कार्रवाई होगी। विभाग इसकी निगरानी भी कर रहा है।
जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के तहत फीस वृद्धि की सीमा तय करते हुए इस वर्ष अधिकतम 7.23 प्रतिशत फीस वृद्धि को मंजूरी दी है जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर निर्धारित है। उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों को यह जानकारी भेज दी गई है। अब कोई भी स्कूल बहाना नहीं कर सकेगा कि उसे जानकारी नहीं दी गई है।
उन्होंने बताया कि स्कूल छात्रों को किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। एनसीईआरटी की किताबों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है। कोई भी विद्यालय 5 वर्षों के भीतर अपनी यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेगा। यदि किसी कारण ऐसा करता है तो समिति से अनुमति लेना होगा। नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान भी तय किया गया है। पहली बार उल्लंघन पर अधिक वसूली गई फीस वापस करने के साथ एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना और तीसरी बार में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।
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जिला विद्यालय निरीक्षक राजेश कुमार सिंह ने बताया कि समिति ने उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियमन) अधिनियम-2018 के तहत फीस वृद्धि की सीमा तय करते हुए इस वर्ष अधिकतम 7.23 प्रतिशत फीस वृद्धि को मंजूरी दी है जो कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आधार पर निर्धारित है। उन्होंने बताया कि सभी स्कूलों को यह जानकारी भेज दी गई है। अब कोई भी स्कूल बहाना नहीं कर सकेगा कि उसे जानकारी नहीं दी गई है।
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उन्होंने बताया कि स्कूल छात्रों को किताबें, यूनिफॉर्म, जूते या अन्य सामग्री किसी विशेष दुकान से खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। एनसीईआरटी की किताबों को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया गया है। कोई भी विद्यालय 5 वर्षों के भीतर अपनी यूनिफॉर्म में बदलाव नहीं करेगा। यदि किसी कारण ऐसा करता है तो समिति से अनुमति लेना होगा। नियमों के उल्लंघन पर सख्त दंड का प्रावधान भी तय किया गया है। पहली बार उल्लंघन पर अधिक वसूली गई फीस वापस करने के साथ एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार उल्लंघन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना और तीसरी बार में मान्यता रद्द करने तक की कार्रवाई की जाएगी।